कांग्रेस अगले दो महीने चलाएगी मनरेगा बचाओ संग्राम,सचिन पायलट ने ली कमेटी की बैठक
Arun Tiwari | Jan 08, 2026, 19:39 IST
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छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अब पूरे प्रदेश में मनरेगा बचाओ संग्राम छेड़ने जा रही है। अगले दो महीने तक यह अभियान चलेगा। इस अभियान को लेकर पूरी रणनीति तैयार की गई है। कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण बैठक हुईं।
रायपुर: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अब पूरे प्रदेश में मनरेगा बचाओ संग्राम छेड़ने जा रही है। अगले दो महीने तक यह अभियान चलेगा। इस अभियान को लेकर पूरी रणनीति तैयार की गई है। कांग्रेस की दो महत्वपूर्ण बैठक हुईं। राजधानी आए प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट ने यह बैठक बुलाई।
इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी डॉ. एस.ए. संपत कुमार, एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी जरिता लेतफ्लांग, एआईसीसी सह-सचिव एवं सह-प्रभारी विजय जांगिड़ भी मौजूद थे। बैठक में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा और कार्यक्रम आयोजन की रणनीति तैयार की गई। साथ ही एसआईआर में वंचित पात्र मतदाताओं का नाम जुड़वाने पर चर्चा और प्रदेश में चल रही धान खरीदी में किसानों को हो रही समस्याओं के निराकरण पर भी बात की गई।
राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि नये साल में पहली बैठक है, आपका नया साल शुभ हो। पिछले दिनों कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में संसद में जो चर्चा हुई उस पर विचार किया। पूरा विपक्ष मनरेगा के संशोधन के विरोध में है। मनरेगा संशोधन को लेकर भाजपा भ्रम फैला रही है। यह मनरेगा को खत्म करना चाहती है।
गांव में जो भूमिहीन लोग है वे मनरेगा में संशोधन से प्रभावित होंगे। पहले यह कानून था अब यह योजना बना दिया। पहले ये कानूनी संवैधानिक अधिकार था। दुनिया में यह अकेला कानून था जो रोजगार को संवैधानिक अधिकार देता है। पहले 15 दिन रोजगार नहीं देने पर 16वें दिन भत्ते का प्रावधान था। इसको खत्म कर दिया। पहले ग्राम पंचायत को ताकत भी काम कराने की।
पहले केंद्र राज्यांश 90-100 था इन्होंने उसको 60-40 कर दिया। एआईसीसी के कैलेंडर के अनुसार हमको आंदोलन करना है। कार्यक्रम बनाना है। इसको हम जनता के बीच कांग्रेस की कामयाबी तथा भाजपा की दुर्भावना के रूप में जनता के बीच ले जाना है। मोदी सरकार ने जैसे तीन कृषि कानून वापस लिए थे वैसे ही मनरेगा संशोधन भी वापस लेगी।
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10 जनवरी 2026 जिला स्तरीय प्रेस कॉन्फ्रेंस - सभी डीसीसी कार्यालयों में जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रस्तावित कानून के ग्रामीण रोजगार और आजीविकाओं पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को बताया जाएगा।
11 जनवरी 2026-एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध - जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, जैसे महात्मा गांधी या डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास, पार्टी नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय उपवास किया जाएगा।
12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 पंचायत स्तर पर जनसंपर्क - सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर की चौपालें और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस चरण के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रावधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों तक पहुंचाए जाएंगे। साथ ही विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण भी किया जाएगा।
30 जनवरी 2026 - वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना - वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा।
31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना - जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों पर धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनके बाद विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
7 फरवरी से 15 फरवरी 2026 राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव - पीसीसी के नेतृत्व में राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, जिसमें अधिकतम मोबिलाइजेशन के माध्यम से केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की नीति और राज्यों पर डाले जा रहे बोझ को उजागर किया जाएगा।
16 फरवरी से 25 फरवरी 2026 क्षेत्रीय एआईसीसी रैलियां निकाली जायेगी।
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इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी डॉ. एस.ए. संपत कुमार, एआईसीसी सचिव एवं सह-प्रभारी जरिता लेतफ्लांग, एआईसीसी सह-सचिव एवं सह-प्रभारी विजय जांगिड़ भी मौजूद थे। बैठक में मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत प्रस्तावित कार्यक्रमों की रूपरेखा और कार्यक्रम आयोजन की रणनीति तैयार की गई। साथ ही एसआईआर में वंचित पात्र मतदाताओं का नाम जुड़वाने पर चर्चा और प्रदेश में चल रही धान खरीदी में किसानों को हो रही समस्याओं के निराकरण पर भी बात की गई।
सचिन पायलट ने बुलाई बैठक :
गांव में जो भूमिहीन लोग है वे मनरेगा में संशोधन से प्रभावित होंगे। पहले यह कानून था अब यह योजना बना दिया। पहले ये कानूनी संवैधानिक अधिकार था। दुनिया में यह अकेला कानून था जो रोजगार को संवैधानिक अधिकार देता है। पहले 15 दिन रोजगार नहीं देने पर 16वें दिन भत्ते का प्रावधान था। इसको खत्म कर दिया। पहले ग्राम पंचायत को ताकत भी काम कराने की।
पहले केंद्र राज्यांश 90-100 था इन्होंने उसको 60-40 कर दिया। एआईसीसी के कैलेंडर के अनुसार हमको आंदोलन करना है। कार्यक्रम बनाना है। इसको हम जनता के बीच कांग्रेस की कामयाबी तथा भाजपा की दुर्भावना के रूप में जनता के बीच ले जाना है। मोदी सरकार ने जैसे तीन कृषि कानून वापस लिए थे वैसे ही मनरेगा संशोधन भी वापस लेगी।
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इस तरह होगा मनरेगा बचाओ संग्राम :
11 जनवरी 2026-एक दिवसीय उपवास एवं प्रतीकात्मक विरोध - जिला मुख्यालयों या प्रमुख सार्वजनिक स्थलों, जैसे महात्मा गांधी या डॉ. बी. आर. आंबेडकर की प्रतिमाओं के पास, पार्टी नेताओं, निर्वाचित प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों की भागीदारी के साथ एक दिवसीय उपवास किया जाएगा।
12 जनवरी से 29 जनवरी 2026 पंचायत स्तर पर जनसंपर्क - सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर की चौपालें और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस चरण के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रावधानों, रोजगार सेवकों और मनरेगा श्रमिकों तक पहुंचाए जाएंगे। साथ ही विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पर्चा वितरण भी किया जाएगा।
30 जनवरी 2026 - वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना - वार्ड और ब्लॉक स्तर पर शांतिपूर्ण धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनमें अहिंसा, संवैधानिक मूल्यों और काम के अधिकार पर जोर दिया जाएगा।
31 जनवरी से 6 फरवरी 2026 जिला स्तरीय मनरेगा बचाओ धरना - जिला कलेक्टर/जिला मजिस्ट्रेट कार्यालयों पर धरने आयोजित किए जाएंगे, जिनके बाद विधेयक को वापस लेने और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
7 फरवरी से 15 फरवरी 2026 राज्य स्तरीय विधानसभा घेराव - पीसीसी के नेतृत्व में राज्य स्तर पर विधानसभाओं का घेराव किया जाएगा, जिसमें अधिकतम मोबिलाइजेशन के माध्यम से केंद्र सरकार की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की नीति और राज्यों पर डाले जा रहे बोझ को उजागर किया जाएगा।
16 फरवरी से 25 फरवरी 2026 क्षेत्रीय एआईसीसी रैलियां निकाली जायेगी।
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