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News in Short:
.छत्तीसगढ़ में नकली बिक रही हैं कई आयुर्वेदिक दवाएं
.गठिया,एसीडिटी,बवासीर,डायबिटीज और माइग्रेन जैसी दवाएं नकली
.सैंपल जांच में अमानक पाई गई दवाएं
.सरकार ने कार्यवाही के लिए नोटिस जारी किया
News in Detail :
सेहत से खिलवाड़ :
छत्तीसगढ़ में आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। जवां बने रहने की चाह, शुगर कंट्रोल करने की मजबूरी और गठिया-बवासीर जैसी बीमारियों से राहत पाने की उम्मीद में लोग जिन आयुर्वेदिक दवाओं पर भरोसा कर रहे हैं, उनमें से कई नकली निकल रही हैं।
दो साल में 434 नमूनों की जांच की गई। सैंपल जांच में इस चौंकाने वाले सच का खुलासा हुआ है। राजधानी रायपुर सहित राज्य के कई जिलों में मेडिकल स्टोर्स पर बिक रही आयुर्वेदिक औषधियों की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं।
जांच में सामने आया है कि युवावस्था बनाए रखने वाले तेल (anti aging medicine), शुगर कंट्रोल करने वाले चूर्ण, गठिया, एसीडिटी, बवासीर और माइग्रेन जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर बेची जा रही कई दवाएं तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं।
ये आयुर्वेदिक दवाएं नकली मिलीं :
साल 2024-25 :
गाउठ गोल्ड कैप्सूल - अर्थराइटिस ठीक करने के लिए
गाउठ गोल्ड टैबलेट - अर्थराइटिस के कारण होने वाले शरीर के दर्द से निवारण के लिए
कामदुधा रस - शरीर में पित्त दोष को शांत करने, पुरानी एसिडिटी, पेट की जलन, सीने में जलन और मतली-उल्टी के इलाज में उपयोग की जाती है।
ज्योतिष्मति तेल - मस्तिष्क की कार्यक्षमता, याददाश्त और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए एक प्रसिद्ध आयुर्वेदिक तेल है। यह नसों को मजबूत करता है, तनाव कम करता है, सिरदर्द, माइग्रेन, आँखों की समस्याओं में प्रभावी है।
जात्यादि तेल - बवासीर, भगंदर, और त्वचा के जिद्दी घावों को भरने के लिए बेहतरीन है। इसके एंटी-बैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण जलन, खुजली और दर्द से राहत देते हैं
सैंधवादि तेल - इसका उपयोग गठिया और कमर दर्द के इलाज में किया जाता है।
ब्रह्मा रसायन - याददाश्त,बुद्धि, मानसिक स्पष्टता और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए जानी जाती है। यह तनाव, कमजोरी, बालों के सफेद होने और असमय बुढ़ापे के लक्षणों को कम करने में बेहद प्रभावी है।
साल 2025-26 :
श्री श्याम फास्टेक शुगर नाशक आयुर्वेदिक चूर्ण - डायबिटीज को नियंत्रित करने का पावडर
जात्यादि तेल - बवासीर, भगंदर, और त्वचा के जिद्दी घावों को भरने के लिए बेहतरीन है। इसके एंटी-बैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण जलन, खुजली और दर्द से राहत देते हैं
कुटजघन वटी - दस्त,पेचिश,आँतों में सूजन और IBS जैसी पाचन संबंधी समस्याओं के लिए बहुत प्रभावी
इन आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने वाली कंपनियां :
गाउठ गोल्ड कैप्सूल - जीएएचपी,हरियाणा
गाउठ गोल्ड टैबलेट - जीएएचपी,हरियाणा
कामदुधा रस - उपकारन फार्मास्युटीकल्स,भोपाल
ज्योतिष्मति तेल - धनवंतरी आयुर्वेदिक,छत्तीसगढ़
जात्यादि तेल - मुल्तानी फार्मास्युटीकल्स,हरिद्वार
सैंधवादि तेल - मुल्तानी फार्मास्युटीकल्स,हरिद्वार
ब्रह्मा रसायन - हिमालया रिसर्च लैबोटरी,जम्मू
श्री श्याम फास्टेक शुगर नाशक आयुर्वेदिक चूर्ण -शुगर सेफ आयुर्वेदिक,रामपुर बिहार,रायगढ़
कुटजघन वटी - उपकारन फार्मास्युटीकल्स,भोपाल
Sootr knowledge :
आयुर्वेद पर भरोसा करना गलत नहीं, लेकिन आंख मूंदकर किसी भी दावे पर यकीन करना खतरनाक जरूर है। विशेषज्ञों की सलाह है कि आयुर्वेदिक दवा खरीदते समय पैकिंग पर निर्माता कंपनी का नाम, लाइसेंस नंबर, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें।
बहुत सस्ते दामों पर मिलने वाली चमत्कारी दवाओं से सावधान रहें। बिना डॉक्टर या वैद्य की सलाह के दवा लेना जोखिम भरा हो सकता है। सरकार ने साफ किया है कि नकली दवाओं के कारोबार को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा छत्तीसगढ़ में जांच अभियान चलाया जाएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ सरकारी कार्रवाई काफी नहीं है। जब तक उपभोक्ता खुद सतर्क नहीं होंगे तब तक ऐसे फर्जीवाड़े का रुकना मुश्किल है।
Important points :
. आयुर्वेदिक दवाओं का इस्तेमाल करें लेकिन जांच परख कर
. कई आयुर्वेदिक दवाएं जांच में अमानक पाई गईं
. जवान रहने के लिए लोग आंख मूंदकर करते हैं आयुर्वेदिक औषधि का इस्तेमाल
. सोशल मीडिया की जानकरी पर्याप्त नहीं डॉक्टर या वैद्य से सलाह जरुर लें
आगे क्या :
कंपनियों और मेडिकल स्टोर्स को नोटिस :
जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने संबंधित दवा निर्माता कंपनियों और इन दवाओं को बेचने वाले मेडिकल स्टोर्स को नोटिस जारी किया है। उनसे जवाब तलब किया गया है कि बिना मानक और लाइसेंस के दवाएं कैसे बाजार में पहुंचीं।
नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस रद्द करने और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरु कर दी है।
जिन आयर्वेदिक अस्पतालों में इन दवाओं की सप्लाई हुई थी वो वापस कर दी गई हैं।
निष्कर्ष :
डॉक्टरों और आयुष विशेषज्ञों का कहना है कि नकली आयुर्वेदिक दवाएं (fake medicine) सबसे ज्यादा खतरनाक इसलिए होती हैं क्योंकि लोग इन्हें “प्राकृतिक” और “साइड इफेक्ट फ्री” मानकर लंबे समय तक इस्तेमाल करते रहते हैं।
इससे बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकती है। शुगर के मरीजों के लिए नकली चूर्ण जानलेवा साबित हो सकता है। वहीं गठिया और माइग्रेन के रोगियों को भी बड़ा नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
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