पीएमओ पहुंची Ex-Cadre DG बनाने की शिकायत, तीन आईपीएस अफसरों के प्रमोशन की जल्दी
Arun Tiwari | Sept 25, 2026, 14:02 IST
तीन आईपीएस अफसरों के प्रमोशन की तैयारी
छत्तीसगढ़ में तीन नए Ex-Cadre DG पद सृजित कर IPS अधिकारियों को प्रमोशन देने का प्रस्ताव चर्चा में है। मामले को लेकर PMO में शिकायत पहुंची है और केंद्र की पूर्व मंजूरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार के अंदर चल रही कुछ आईपीएस अफसरों को डीजी बनाने की तैयारी का मामला प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंच गया है। पीएमओ में यह शिकायत की गई है कि बिना केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुमति के तीन अफसरों को डीजी के पद पर प्रमोशन देने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार में तीन नए Ex-Cadre DG स्तर के पद सृजित कर 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन IPS अधिकारियों को DG/Special DG स्तर पर पदोन्नत करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। बताया जा रहा है कि इन पदों के सृजन के लिए कैबिनेट की मंजूरी कराने की तैयारी की जा रही है।
जबकि इन पदों के संबंध में केन्द्र सरकार, खासतौर पर गृह मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। यही गलती 2018 में रमन सरकार ने की थी। रमन सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।
पुलिस मुख्यालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक छत्तीसगढ़ सरकार तीन एक्स कैडर डीजी पद बनाने की तैयारी कर रही है। इन पदों पर 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन आईपीएस अफसरों को डीजी या स्पेशल डीजी पद पर प्रमोट किया जाएगा। यदि इन तीन बैच के आईपीएस पर नजर डालें तो इनमें एसआरपी कल्लूरी 1994 बैच, प्रदीप गुप्ता 1995 बैच और विवेकानंद 1996 बैच के नाम आते हैं।
सवाल उठता है कि आखिर इनको प्रमोशन देने में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। छत्तीसगढ़ के पास जरुरत के हिसाब से स्वीकृत डीजी कैडर के दो और एक्स कैडर डीजी के दो पद हैं। डीजी कैडर में डीजीपी अरुणदेव गौतम और जीपी सिह DG, ट्रेनिंग एवं स्टेट पुलिस अकादमी के पद आते है। एक्स कैडर डीजी में पवन देव, DG, होमगार्ड/सिविल डिफेंस/फायर और हिमांशु गुप्ता DG, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं शामिल हैं।
यह चारों पद भरे हुए हैं। छत्तीसगढ़ आईपीएस कैडर की हालिया समीक्षा 21 मई 2025 को राज्य सरकार से राय मशवरे के बाद हुई थी। जिसमें केवल दो Ex-Cadre पदों की अनुमति का उल्लेख है। ऐसे में तीन अतिरिक्त DG स्तर के Ex-Cadre पदों के सृजन की आवश्यकता और औचित्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि पुलिस संगठन में शीर्ष स्तर पर पदों की संख्या बढ़ाने से प्रशासनिक ढांचा अनावश्यक रूप से top-heavy होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए उच्च पद के सृजन से पहले उसकी वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता, कैडर समीक्षा और केन्द्र सरकार की स्वीकृति तीनों पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
रिकॉर्ड के अनुसार 4 दिसंबर 2017 को छत्तीसगढ़ सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से तीन Ex-Cadre DG स्तर के पद सृजित किए थे। उस समय यह प्रावधान रखा गया था कि केन्द्र सरकार की स्वीकृति बाद में प्राप्त की जाएगी। लेकिन गृह मंत्रालय, भारत सरकार ने इन पदों को स्वीकृति प्रदान नहीं की।
इसके बावजूद 6 अक्टूबर 2018 को राज्य सरकार द्वारा इन्हीं पदों के विरुद्ध तीन IPS अधिकारियों संजय पिल्लै, आरके विज और मुकेश गुप्ता को पदोन्नति प्रदान कर दी गई। बाद में सरकार बदली और भूपेश सरकार ने रमन सिंह सरकार के इस फैसले को पलट कर पदोन्नति रद्द कर दीं। मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने भी भूपेश सरकर के फैसले को सही माना। अब इसी गलती को दोहराने की तैयारी की जा रही है।
जानकार कहते हैं कि IPS कैडर व्यवस्था में कैडर की शक्ति और संरचना केवल राज्य सरकार के निर्णय से निर्धारित नहीं होती। कैडर स्ट्रेंथ में परिवर्तन और निर्धारित सीमा से अधिक Ex-Cadre पद पर कैडर अधिकारी की नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार की भूमिका और पूर्व स्वीकृति का प्रावधान है।
नियमों के मुताबिक राज्य सरकार अपनी ओर से केवल कैबिनेट निर्णय के आधार पर ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकती जिससे IPS कैडर की स्वीकृत संरचना अथवा Ex-Cadre पदों की निर्धारित सीमा प्रभावित हो। विशेष रूप से निर्धारित सीमा से अधिक Ex-Cadre पद पर किसी कैडर अधिकारी को नियुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। केंद्र सरकार की अनुमति या अनुमोदन के बिना की गई नियुक्ति को निरस्त किए जाने का प्रावधान भी नियमों में मौजूद है।
जानकारों का कहना है कि 2018 में जो हुआ, उसमें पहले राज्य स्तर पर Ex-Cadre पद बनाए गए, केन्द्र सरकार से स्वीकृति नहीं मिली, फिर भी उन्हीं पदों के आधार पर पदोन्नतियां कर दी गईं। और अंततः उन पदोन्नतियों को वापस लेना पड़ा। ऐसे में यदि वर्तमान में भी केन्द्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना समान प्रकृति के Ex-Cadre DG पद सृजित किए जाते हैं और उन पर पदोन्नति की जाती है, तो यह 2018 की स्थिति की पुनरावृत्ति होगी। प्रश्न केवल तीन पदों अथवा तीन अधिकारियों का नहीं है, बल्कि IPS कैडर प्रबंधन में राज्य और केन्द्र के बीच निर्धारित वैधानिक व्यवस्था का पालन किए जाने का है।
अब यहां पर सवाल उठता है कि क्या किसी चहेते अधिकारी को शीर्ष पद पर बैठाने की तैयारी है जिसके लिए यह किया जा रहा है। सूत्र कहते हैं कि इसमें सीएम सचिवालय और गृह विभाग के अधिकारियों के बीच भी एक मत नहीं है। सूत्र बताते हैं कि कुछ आईपीएस का गठजोड़ यह चाहता है इसीलिए गृह विभाग पर इस प्रस्ताव को कैबिनेट में लाने का दबाव बनाया जा रहा है।
सूत्र कह रहे हैं कि यह आईपीएस अपने पसंदीदा अफसर को अगला पुलिस प्रमुख बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। डीजीपी का कार्यकाल जुलाई 2027 तक है। नए डीजीपी के लिए अभी से गोटियां फिट की जा रही हैं। अब पीएमओ में शिकायत पहुंच चुकी है । हो सकता है अब यह योजना खटाई में पड़ जाए।
3 IPS अफसरों को DG बनाने की जल्दी में सरकार, रमन सिंह की गलती दोहराने को तैयार
तीन आईपीएस अफसरों का डिमोशन; सात साल की लड़ाई, एक साल का दाग… आखिर इज्जत जीत गई
तीन सीनियर आईपीएस अफसरों को प्रमोशन not, अगले कैबिनेट में मिल सकती है मंजूरी
शराब घोटाले के दोषी अफसरों को प्रमोशन की तैयारी, डीपीसी के लिए प्रस्ताव भेजा गया
सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार में तीन नए Ex-Cadre DG स्तर के पद सृजित कर 1994, 1995 और 1996 बैच के तीन IPS अधिकारियों को DG/Special DG स्तर पर पदोन्नत करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। बताया जा रहा है कि इन पदों के सृजन के लिए कैबिनेट की मंजूरी कराने की तैयारी की जा रही है।
जबकि इन पदों के संबंध में केन्द्र सरकार, खासतौर पर गृह मंत्रालय की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। यही गलती 2018 में रमन सरकार ने की थी। रमन सरकार के इस फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया था।
क्या है पूरा मामला :
सवाल उठता है कि आखिर इनको प्रमोशन देने में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। छत्तीसगढ़ के पास जरुरत के हिसाब से स्वीकृत डीजी कैडर के दो और एक्स कैडर डीजी के दो पद हैं। डीजी कैडर में डीजीपी अरुणदेव गौतम और जीपी सिह DG, ट्रेनिंग एवं स्टेट पुलिस अकादमी के पद आते है। एक्स कैडर डीजी में पवन देव, DG, होमगार्ड/सिविल डिफेंस/फायर और हिमांशु गुप्ता DG, जेल एवं सुधारात्मक सेवाएं शामिल हैं।
यह चारों पद भरे हुए हैं। छत्तीसगढ़ आईपीएस कैडर की हालिया समीक्षा 21 मई 2025 को राज्य सरकार से राय मशवरे के बाद हुई थी। जिसमें केवल दो Ex-Cadre पदों की अनुमति का उल्लेख है। ऐसे में तीन अतिरिक्त DG स्तर के Ex-Cadre पदों के सृजन की आवश्यकता और औचित्य पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्र कहते हैं कि पुलिस संगठन में शीर्ष स्तर पर पदों की संख्या बढ़ाने से प्रशासनिक ढांचा अनावश्यक रूप से top-heavy होने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए उच्च पद के सृजन से पहले उसकी वास्तविक प्रशासनिक आवश्यकता, कैडर समीक्षा और केन्द्र सरकार की स्वीकृति तीनों पहलुओं को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
क्या है रमन सरकार की गलती :
इसके बावजूद 6 अक्टूबर 2018 को राज्य सरकार द्वारा इन्हीं पदों के विरुद्ध तीन IPS अधिकारियों संजय पिल्लै, आरके विज और मुकेश गुप्ता को पदोन्नति प्रदान कर दी गई। बाद में सरकार बदली और भूपेश सरकार ने रमन सिंह सरकार के इस फैसले को पलट कर पदोन्नति रद्द कर दीं। मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने भी भूपेश सरकर के फैसले को सही माना। अब इसी गलती को दोहराने की तैयारी की जा रही है।
केन्द्र की पूर्व स्वीकृति क्यों महत्वपूर्ण :
नियमों के मुताबिक राज्य सरकार अपनी ओर से केवल कैबिनेट निर्णय के आधार पर ऐसी व्यवस्था नहीं कर सकती जिससे IPS कैडर की स्वीकृत संरचना अथवा Ex-Cadre पदों की निर्धारित सीमा प्रभावित हो। विशेष रूप से निर्धारित सीमा से अधिक Ex-Cadre पद पर किसी कैडर अधिकारी को नियुक्त करने के लिए केन्द्र सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है। केंद्र सरकार की अनुमति या अनुमोदन के बिना की गई नियुक्ति को निरस्त किए जाने का प्रावधान भी नियमों में मौजूद है।
2018 से सबक :
क्या ये कुछ आईपीएस का गठजोड़ का खेल :
सूत्र कह रहे हैं कि यह आईपीएस अपने पसंदीदा अफसर को अगला पुलिस प्रमुख बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। डीजीपी का कार्यकाल जुलाई 2027 तक है। नए डीजीपी के लिए अभी से गोटियां फिट की जा रही हैं। अब पीएमओ में शिकायत पहुंच चुकी है । हो सकता है अब यह योजना खटाई में पड़ जाए।
ये खबरें भी पढ़ें…
तीन आईपीएस अफसरों का डिमोशन; सात साल की लड़ाई, एक साल का दाग… आखिर इज्जत जीत गई
तीन सीनियर आईपीएस अफसरों को प्रमोशन not, अगले कैबिनेट में मिल सकती है मंजूरी
शराब घोटाले के दोषी अफसरों को प्रमोशन की तैयारी, डीपीसी के लिए प्रस्ताव भेजा गया
वन विभाग प्रमोशन: वापस वनरक्षक बनाया, 13 केस ने बढ़ाए सवाल, खंडवा-रीवा के बाद शिवपुरी में आदेश पलटा
By Ramanand Tiwari
50 हजार रुपए मानदेय की सीमा बरकरार, नियमितीकरण की मांग खारिज, पास के कॉलेज में देना होगा मौका
By Neel Tiwari
कांकेर में भाजपा को बड़ा झटका: उपेक्षा से नाराज 53 कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने थामा कांग्रेस का दामन
By Umeshwari Baghel
डोंगरगढ़ नवरात्र मेले के लिए रेलवे का बड़ा फैसला: श्रद्धालुओं की सुविधा को 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव
By Umeshwari Baghel
MP Top News : मध्य प्रदेश की बड़ी खबरें, सीएम मोहन यादव ने युवाओं को लेकर किए बड़े ऐलान; संविदा स्वास्थ्यकर्मियों के नियमितीकरण को HC में चुनौती...
By Jitendra Shrivastava
Rajasthan Top News: धनतेरस के चलते पंचायत चुनाव की तारीखों में बड़ा बदलाव, जानें पूरा शेड्यूल
By Ashish Bhardwaj
CG Top News : MLA का नंबर हैक, CEC दौरा का रद्द, IAS दंपत्ति पर शिकंजा व कांकेर में नक्सली हमला समेत पढ़े दिनभर की बड़ी खबरें
By Umeshwari Baghel