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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र बॉर्डर पर अबूझमाड़ के जंगल में मुठभेड़, 7 नक्सली ढेर
- मारे गए नक्सलियों में 3 महिलाएं शामिल, AK-47 और SLR बरामद
- महाराष्ट्र पुलिस का एक जवान शहीद, दूसरा जवान घायल लेकिन खतरे से बाहर
- शहीद कॉन्स्टेबल दीपक मदावी को गार्ड ऑफ ऑनर, शव गृहग्राम रवाना
- एक दिन पहले बीजापुर में 8 लाख के इनामी नक्सली कमांडर उधम सिंह ढेर
NEWS IN DETAIL
अबूझमाड़ में भीषण मुठभेड़
6 फरवरी की सुबह छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा से लगे अबूझमाड़ के जंगल में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच जबरदस्त मुठभेड़ हुई। दोनों ओर से काफी देर तक गोलीबारी चली।
महाराष्ट्र पुलिस के अनुसार मुठभेड़ स्थल से 7 नक्सलियों के शव बरामद किए गए हैं, जिनमें 4 पुरुष और 3 महिला नक्सली शामिल हैं। मौके से AK-47 और SLR राइफल भी जब्त की गई है। मारे गए नक्सलियों की पहचान की जा रही है।
महाराष्ट्र का जवान शहीद
नक्सलियों की फायरिंग में महाराष्ट्र पुलिस के कॉन्स्टेबल दीपक चिन्ना मदावी (38) को गोली लगी। उन्हें एयरलिफ्ट कर भामरागड़ अस्पताल लाया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान वे शहीद हो गए।
शहीद जवान दीपक को पूरे सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उनका पार्थिव शरीर गृहग्राम रवाना किया गया। इस दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
एक अन्य जवान घायल
मुठभेड़ में किष्ट्यापल्ली निवासी जवान जोगा मदवी भी घायल हुआ है। उसे भी एयरलिफ्ट किया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत खतरे से बाहर है। मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र में सर्च और एरिया डॉमिनेशन ऑपरेशन जारी है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है।
Sootr Knowledge
- अबूझमाड़ नक्सलियों का सबसे मजबूत और दुर्गम इलाका माना जाता है
- यहां अक्सर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र पुलिस की संयुक्त कार्रवाई होती है
- महिला नक्सलियों की मौजूदगी से संगठन की सक्रियता का संकेत मिलता है
- नक्सलियों के पास आधुनिक हथियार अभी भी बड़ी चुनौती हैं
- एयरलिफ्ट सुविधा ने घायल जवानों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई
IMP FACTS
- रिकॉर्ड सफलता: जनवरी 2024 से अब तक कुल 232 नक्सली मारे जा चुके हैं।
- बड़ा सरेंडर: इसी अवधि में 888 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा को चुना है।
- इनामी कमांडर का अंत: 5 फरवरी को मारा गया उधम सिंह 2021 के टेकुलगुड़ेम हमले का मुख्य आरोपी था।
- मोस्ट वांटेड: वर्तमान में थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी नक्सल संगठन का सबसे बड़ा लीडर (महासचिव) है, जिसकी पुलिस को तलाश है।
आगे क्या?
सुरक्षाबल अब 'टॉप-4' बड़े नक्सली नेताओं (देवजी, गणपति, भास्कर और पापाराव) की घेराबंदी करने की योजना बना रहे हैं। अबूझमाड़ के उन इलाकों में नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए जा रहे हैं जहां अब तक फोर्स नहीं पहुंच पाई थी।
निष्कर्ष
अबूझमाड़ मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित किया कि नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक मोड़ पर है। जहां सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली, वहीं एक जवान की शहादत ने पूरे सिस्टम को सतर्क कर दिया है। आने वाले दिनों में नक्सलियों पर दबाव और बढ़ना तय है।
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