महिला कांग्रेस की कुर्सी पर गुटों की जंग, भूपेश और टीएस के बीच फंसा नाम

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने का इंतजार करीब ढाई साल से जारी है। इस पद के लिए All India Congress Committee ने दिल्ली में पांच वरिष्ठ महिला नेताओं का इंटरव्यू लिया।

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Arun Tiwari
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Raipur. छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने का लंबा इंतजार हो गया है। करीब ढाई साल से खाली पड़े इस अहम पद को लेकर कांग्रेस संगठन में हलचल तेज हो गई है।

 पार्टी आलाकमान ने पांच वरिष्ठ महिला नेताओं का इंटरव्यू लेकर यह संकेत दिया है कि फैसला जल्द किया जाएगा। ऐसे में सवाल यही है कि महिला कांग्रेस की कमान आखिर किसके हाथों में सौंपी जाएगी विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक छन्नी साहू या कोई नया चेहरा।

दिल्ली में हुआ इंटरव्यू : 

प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने  पांच प्रमुख महिला नेताओं को दिल्ली बुलाकर साक्षात्कार लिया। इस इंटरव्यू प्रक्रिया को संगठन के भीतर बेहद अहम माना जा रहा है।

जिन नेताओं को बुलाया गया, उनमें विधायक संगीता सिन्हा, पूर्व विधायक छन्नी साहू, पूर्व विधायक लक्ष्मी ध्रुव, पूर्व विधायक ममता चंद्राकर और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तूलिका कर्मा शामिल रहीं।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह इंटरव्यू राष्ट्रीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने लिया। माना जा रहा है कि इंटरव्यू के बाद आलाकमान को रिपोर्ट सौंप दी गई है और जल्द ही नाम की घोषणा हो सकती है।

दो नाम रेस से बाहर :

दो नाम इस रेस से बाहर हो गए हैं। तूलिका कर्मा को राष्ट्रीय महिला कांग्रेस में सचिव और ममता चंद्राकर को महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ऐसे में इन दोनों के प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना अब लगभग खत्म मानी जा रही है। अब मुकाबला मुख्य रूप से दो नामों संगीता सिन्हा और छन्नी साहू के बीच हो गया है। दोनों ही नेता संगठन और चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं।

गुटीय संतुलन में उलझा फैसला : 

महिला कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति केवल संगठनात्मक फैसला नहीं रह गई है, बल्कि यह कांग्रेस के अंदर चल रहे गुटीय संतुलन से जुड़ गई है। विधायक संगीता सिन्हा को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल खेमे का करीबी माना जाता है।

वहीं छन्नी साहू को पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के समर्थक गुट का माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व इस नियुक्ति के जरिए संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

पहले से चल रहा छन्नी साहू का नाम: 

इस पूरे घटनाक्रम में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि छन्नी साहू का नाम करीब एक साल पहले ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजा जा चुका था।

 इसके बाद भी उस प्रस्ताव पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। यह सवाल उठ रहा है कि क्या पार्टी पुराने प्रस्ताव को आगे बढ़ाएगी या फिर नए सिरे से फैसला लिया जाएगा।

बीजेपी का कांग्रेस पर हमला

महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर चल रही इस खींचतान पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी की प्रदेश प्रवक्ता शताब्दी पाण्डेय ने कहा कि यह पूरा मामला कांग्रेस के अंदरूनी लोकतंत्र पर सवाल खड़े करता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात तो करती है, लेकिन जब नेतृत्व देने की बारी आती है तो फैसले बंद कमरों में गुटीय सौदेबाजी से होते हैं।

शताब्दी पाण्डेय ने यह भी कहा कि कांग्रेस में योग्यता और संघर्ष के बजाय चापलूसी और गुटबाजी को तरजीह दी जाती है।

जल्द आएगा फैसला : 

फिलहाल महिला कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है, लेकिन इंटरव्यू प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह माना जा रहा है कि आलाकमान जल्द ही अंतिम मुहर लगाएगा।

कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आंनद शुक्ला कहते हैं कि कांग्रेस कोई गुटबाज़ी नहीं है। सभी नेता एक साथ हैं। जल्द ही महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष का नाम सामने आ जायेगा।

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