चूहों के खाने के बाद सूरज सुखा रहा छत्तीसगढ़ की धान, 5 साल में 800 करोड़ का नुकसान
Arun Tiwari | Jan 15, 2026, 15:57 IST
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छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है इसलिए यहां की धान पर सबकी नजर होती है। इस धान को करॅप्शन का कीड़ा भी बहुत लगता है। चूहों के साथ इस धान पर अब सूर्यदेव की नजर भी रहती है। चूहे करोड़ों की धान चट कर गए तो इससे ज्यादा सूरज ने धान को सुखा दिया।
NEWS IN SHORT
. पांच साल में सूख गई 800 करोड़ की धान
. दो साल में 200 करोड़ की धान सूखी
. सरकार कर रही धान का पैसा वसूलने की माथापच्ची
NEWS IN DETAIL
धान को लगा करॅप्शन का कीड़ा :
यहां पर धान खरीदी का मूल्य 3100 रुपए प्रति क्विंटल है। यहां से ही धान में करॅप्शन का कीड़ा लगना शुरु हो जाता है। धान को कभी चूहे खा जाते हैं तो कभी सूरज निगल लेता है। यानी धान की शॉर्टेज का जब हिसाब लगाया जाता है तो कारण सामने आता है कि धान की कमी इसलिए है क्योंकि उतनी धान चूहे खा गए।
चूहे के खाने से कहीं ज्यादा का आंकड़ा आता है कि धान सूखत में चली गई यानी धान सूख गई। जाहिर है ये चूहे भी सियासी हैं और सूरज भी सियासी। न तो इतना धान चूहे खा सकते हैं और न ही सूरज सुखा सकता है। करॅप्शन का कीड़ा धान को खाए जा रहा है।
5 साल में सूखी 800 करोड़ की धान :
पिछले दो साल में सूखत का आंकड़ा 200 करोड़ का रहा है। यानी सरकार कांग्रेस की हो या बीजेपी की, धान का सूखना उसी तेजी से जारी है। साल 2023-24 में 39448 मीट्रिक टन और साल 2024-25 में 62313 मीट्रिक टन धान सूख गई।जाहिर है ये आंकड़ा बहुत बड़ा है।
5 सालों में इतने करोड़ की धान सूखी :
2020-21 198 करोड़ रुपए
2021-22 135 करोड़ रुपए
2023-24 86 करोड़ रुपए
2024-25 143 करोड़ रुपए
इतने लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी :
साल 2020-21 - 92.02
साल 2021-22 - 97.99
साल 2022-23 - 107.54
साल 2023-24 - 144.92
साल 2024-25 - 149.25
साल 2025-26 - 160 का लक्ष्य
अब आगे क्या :
संग्रहण केन्द्रों में धान में आई सूखत कमी के लिए भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित नियम के हिसाब से सूखत मात्रा के अतिरिक्त सूखत आने पर संग्रहण केन्द्र प्रभारियों को नोटिस जारी किया जाता है। और प्राप्त जवाब का गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेकर अग्रिम कार्यवाही की जाती है।
धान उपार्जन में हुए सूखत कमी का दावा पत्रक भारत सरकार को प्रेषित किया जाता है। भारत सरकार द्वारा मान्य किये गये सूखत मात्रा के बाद यदि इस मद में कोई हानि होती है तो राज्य शासन को हानि दावा पत्रक प्रस्तुत किया जाता है, जो विभागीय बजट के अंतर्गत मांग की जाती है।
Importent Points :
. भ्रष्टाचार के नाम पर कभी चूहे खा रहे तो कभी सूख रही धान
. पांच साल में 800 करोड़ की धान सूखी
. सरकार कर रही समितियों से वसूली की तैयारी
Sootr Knowledge :
निष्कर्ष :
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