रमन सिंह के खिलाफ 5 बार आया अविश्वास प्रस्ताव, भूपेश सरकार के विरोध में 2 बार
Arun Tiwari | Jul 14, 2026, 16:50 IST
रमन सिंह के खिलाफ 5 बार आया अविश्वास प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ विधानसभा में विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने 10वां अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। इससे पहले अजीत जोगी, रमन सिंह और भूपेश बघेल सरकारों के खिलाफ 9 प्रस्ताव आए, लेकिन कोई भी पारित नहीं हुआ।
Raipur : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार करते हुए चर्चा के लिए निर्धारित किया। राज्य गठन के बाद विधानसभा में यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। हालांकि विधानसभा में बीजेपी के स्पष्ट बहुमत को देखते हुए सरकार पर किसी तत्काल राजनीतिक संकट की संभावना नहीं है, लेकिन इस बहस को सत्ता और विपक्ष के बीच बड़े राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास पर नजर डालें तो अब तक कुल नौ बार तीन सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए जा चुके हैं। हर बार सत्ता पक्ष सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहा और कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इस लिहाज से अब तक का रिकॉर्ड पूरी तरह सरकारों के पक्ष में रहा है।
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनकी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। वहीं 15 साल मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में भी सरकार के खिलाफ पांच बार अविश्वास प्रस्ताव आया। भूपेश बघेल सरकार के समय भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।
संसदीय परंपरा में अविश्वास प्रस्ताव का महत्व केवल सरकार को गिराने तक सीमित नहीं होता। यह विपक्ष को सरकार के पूरे कार्यकाल का राजनीतिक और प्रशासनिक लेखा-जोखा लेने का अवसर देता है। बहस के दौरान विपक्ष सरकार की नीतियों, फैसलों और कामकाज पर सवाल उठाता है, जबकि सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाकर आरोपों का जवाब देता है। अंत में मतदान कराया जाता है और यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो अविश्वास प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो जाता है।
इस बार कांग्रेस कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रही है। विपक्ष नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बढ़ती बेरोजगारी, भ्रष्टाचार के आरोप और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को प्रमुखता से उठाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार कई मोर्चों पर अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी है और जनता की समस्याओं का समाधान करने में विफल रही है।
वहीं बीजेपी सरकार बहस के दौरान अपने विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन और प्रशासनिक उपलब्धियों को सामने रखेगी। सरकार का दावा है कि उसने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं और प्रदेश के विकास को नई गति देने का काम किया है। सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने की तैयारी में जुटा हुआ है।
यदि विधानसभा की वर्तमान स्थिति पर नजर डालें तो बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है। 90 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 35 सदस्य हैं। एक विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से हैं। ऐसे में संख्या के लिहाज से सरकार पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में है। यही कारण है कि राजनीतिक विश्लेषक इस अविश्वास प्रस्ताव को सरकार के अस्तित्व से ज्यादा विपक्ष के लिए सरकार को घेरने और जनता के सामने अपनी बात रखने का मंच मान रहे हैं।
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जुलाई 2015 में हुई थी, जब डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर 24 घंटे 25 मिनट तक लगातार बहस चली थी। अब राज्य गठन के बाद 10वें अविश्वास प्रस्ताव पर भी तीखी राजनीतिक बहस की उम्मीद है।
2002 अजीत जोगी
2003 अजीत जोगी
2007 डॉ रमन सिंह
2011 डॉ रमन सिंह
2015 डॉ रमन सिंह
2017 डॉ रमन सिंह
2018 डॉ रमन सिंह
2022 भूपेश बघेल
2023 भूपेश बघेल
2026 विष्णुदेव साय
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इससे पहले 9 अविश्वास प्रस्ताव
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनकी सरकार के खिलाफ दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। वहीं 15 साल मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह के कार्यकाल में भी सरकार के खिलाफ पांच बार अविश्वास प्रस्ताव आया। भूपेश बघेल सरकार के समय भी दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया।
सरकार को घेरने का मौका
नकटी पर हमलावर कांग्रेस
वहीं बीजेपी सरकार बहस के दौरान अपने विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं, सुशासन और प्रशासनिक उपलब्धियों को सामने रखेगी। सरकार का दावा है कि उसने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की हैं और प्रदेश के विकास को नई गति देने का काम किया है। सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों का तथ्यात्मक जवाब देने की तैयारी में जुटा हुआ है।
यह है बहुमत की स्थिति
विधानसभा के इतिहास में सबसे लंबी अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा जुलाई 2015 में हुई थी, जब डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर 24 घंटे 25 मिनट तक लगातार बहस चली थी। अब राज्य गठन के बाद 10वें अविश्वास प्रस्ताव पर भी तीखी राजनीतिक बहस की उम्मीद है।
इन सरकारों के खिलाफ आया अविश्वास प्रस्ताव
2003 अजीत जोगी
2007 डॉ रमन सिंह
2011 डॉ रमन सिंह
2015 डॉ रमन सिंह
2017 डॉ रमन सिंह
2018 डॉ रमन सिंह
2022 भूपेश बघेल
2023 भूपेश बघेल
2026 विष्णुदेव साय
FAQ
- छत्तीसगढ़ विधानसभा में अब तक कितनी बार अविश्वास प्रस्ताव आया है?
छत्तीसगढ़ विधानसभा के गठन के बाद अब तक 10 बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। इससे पहले 9 प्रस्ताव अलग-अलग सरकारों के खिलाफ आ चुके हैं। - विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव किसने पेश किया?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सदन में प्रस्ताव रखा। - क्या अविश्वास प्रस्ताव से सरकार गिर सकती है?
संख्या बल के आधार पर विष्णुदेव साय सरकार सुरक्षित स्थिति में है। 90 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी के पास 54 विधायक हैं, इसलिए प्रस्ताव पारित होने की संभावना नहीं है।
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