गुजरात की ब्लैक लिस्टेड कंपनी से छत्तीसगढ़ में दवा सप्लाई,पौने 7 करोड़ की खरीदी
Arun Tiwari | Jul 15, 2026, 11:43 IST
CGMSC-ब्लैकलिस्टेड-दवा-घोटाला
छत्तीसगढ़ में गुजरात की ब्लैकलिस्टेड कंपनी यूनिक्योर इंडिया से पौने 7 करोड़ की दवा खरीदी पर विधानसभा में हंगामा हुआ। सात राज्यों में बैन इस कंपनी का ऑर्डर अब निरस्त कर दिया गया है।
RAIPUR : गुजरात की ब्लैक लिस्टेड कंपनी यूनीक्योर इंडिया लिमिटेड ने छत्तीसगढ़ में 6 करोड़ 89 लाख रुपए की दवा सप्लाई कर दी। यह कारनामा छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन ने किया। सरकार कहती है कि हमने वो दवा नहीं खरीदी जिसके कारण कंपनी को गुजरात में ब्लैक लिस्टेड किया गया था।
25 मार्च 2026 को जब सरकार को यह पता चला कि यह कंपनी गुजरात में ब्लैक लिस्टेड है तब तक को करोड़ों की खरीदी की डील हो चुकी थी। सीजीएमएससी पर दवा खरीदी को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। दवा घोटाले की जांच भी चल रही है। इसके बाद भी प्रदेश में इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है। यह सीधे सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह सवाल लगाया लेकिन उनकीअनुपस्थिति के कारण यह सवाल कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने पूछा।
विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वीकार किया कि गुजरात मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड की एस्पिरिन गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम और 150 मिलीग्राम को अमानक पाए जाने के बाद ब्लैकलिस्ट किया था। इस बारे में 25 मार्च 2026 को कंपनी ने सीजीएमएससी को जानकारी दी थी। मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में ब्लैकलिस्ट की गई दवा की खरीदी के आदेश जारी नहीं किए गए थे।
मंत्री के अनुसार मेडिकल कार्पोरेशन ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड को एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) की सप्लाई के लिए खरीद आदेश दिया था। जो गुजरात में प्रतिबंधित गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट से अलग दवा है। मंत्री ने बताया कि हालांकि दोनों दवाएं अलग थीं, लेकिन जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंपनी से सूचना मिलने के बाद एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड) के लिए जारी खरीद आदेश निरस्त कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड से लगभग 184 प्रकार की दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। बताया जा रहा है कि गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद कंपनी को वर्ष 2026 तक ब्लैकलिस्ट किया था। राजस्थान में भी इस कंपनी की कुछ दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल हुई थीं। वहां भी इस कंपनी ब्लैकलिस्टेड कर दिया गया। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में उससे दवा खरीदी करने पर सवाल उठ रहे हैं।
यह कंपनी गुजरात और मध्यप्रदेश समेत सात राज्यों में ब्लैक लिस्टेड है। दवा खरीद से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी कंपनी को गुणवत्ता या अन्य गंभीर कारणों से किसी राज्य में ब्लैकलिस्ट किया जाता है और वह दूसरे राज्य की सरकारी एजेंसी को भी दवाएं सप्लाई कर रही हो, तो संबंधित एजेंसी को उसकी गुणवत्ता रिपोर्ट और अन्य तथ्यों की समीक्षा करनी चाहिए।
आवश्यकता पड़ने पर सप्लाई पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में चिकित्सा उपकरण और दवा खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान भी कई कंपनियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी किए गए थे और खरीद प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
दवा गुणवत्ता विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी अस्पतालों में दी जाने वाली दवाओं की गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। यदि किसी कंपनी के खिलाफ गुणवत्ता संबंधी गंभीर शिकायतें या कार्रवाई हो चुकी है, तो अन्य राज्यों को भी सतर्कता बरतते हुए आवश्यक समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर ब्लैकलिस्टिंग जैसे प्रावधानों पर विचार करना चाहिए।
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25 मार्च 2026 को जब सरकार को यह पता चला कि यह कंपनी गुजरात में ब्लैक लिस्टेड है तब तक को करोड़ों की खरीदी की डील हो चुकी थी। सीजीएमएससी पर दवा खरीदी को लेकर कई बार सवाल उठ चुके हैं। दवा घोटाले की जांच भी चल रही है। इसके बाद भी प्रदेश में इस तरह की लापरवाही सामने आ रही है। यह सीधे सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यह सवाल लगाया लेकिन उनकीअनुपस्थिति के कारण यह सवाल कांग्रेस विधायक अटल श्रीवास्तव ने पूछा।
गुजरात ने ब्लैक लिस्ट की कंपनी :
मंत्री के अनुसार मेडिकल कार्पोरेशन ने यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड को एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड टैबलेट) की सप्लाई के लिए खरीद आदेश दिया था। जो गुजरात में प्रतिबंधित गैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट से अलग दवा है। मंत्री ने बताया कि हालांकि दोनों दवाएं अलग थीं, लेकिन जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कंपनी से सूचना मिलने के बाद एस्पिरिन टैबलेट्स आईपी 75 मिलीग्राम (अनकोटेड) के लिए जारी खरीद आदेश निरस्त कर दिया गया।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी से दवा खरीद:
सात राज्यों में ब्लैकलिस्टेड :
आवश्यकता पड़ने पर सप्लाई पर रोक लगाने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। मामले में यह भी सामने आया है कि दिल्ली में चिकित्सा उपकरण और दवा खरीद से जुड़े कथित 650 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच के दौरान भी कई कंपनियों और अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी। शिकायतों के आधार पर संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को नोटिस जारी किए गए थे और खरीद प्रक्रिया की जांच की जा रही है।
निष्कर्ष :
FAQ
- किस कंपनी को छत्तीसगढ़ में दवा सप्लाई का ठेका दिया गया था?
यूनिक्योर इंडिया लिमिटेड नाम की कंपनी को छत्तीसगढ़ में दवा सप्लाई का ठेका दिया गया था। यह कंपनी गुजरात समेत देश के सात राज्यों में ब्लैकलिस्टेड है। - छत्तीसगढ़ सरकार ने इस कंपनी से कितने रुपये की दवाएं खरीदीं?
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने इस विवादित कंपनी से कुल 6 करोड़ 89 लाख रुपये की दवाओं की खरीदी की थी। - छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) की स्थापना कब हुई थी और इसका मुख्य कार्य क्या है?
उत्तर: CGMSC की स्थापना वर्ष 2011 में की गई थी। यह छत्तीसगढ़ सरकार का एक सार्वजनिक उपक्रम है, जिसका मुख्य कार्य राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और कंज्यूमेबल्स की पारदर्शी खरीद और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
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