ननिहाल के पास तिरपाल में है भगवान राम, खुले आसमान में पॉलीथिन में लिपटी प्रतिमा
Arun Tiwari | Jul 24, 2026, 17:29 IST
चंद्रखुरी प्रतिमा विवाद 2026
छत्तीसगढ़ के चंद्रखुरी में कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापित होने वाली श्रीराम की नई प्रतिमा पिछले चार महीनों से खुले मैदान में रखी हुई है। करोड़ों की लागत से तैयार इस प्रतिमा को पॉलीथिन और तिरपाल से ढककर रखा गया है।
भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर परिसर में स्थापित की जाने वाली मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नई भव्य प्रतिमा पिछले चार महीनों से खुले मैदान में आसमान के नीचे रखी हुई है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कराई गई यह प्रतिमा अब तक मंदिर परिसर में स्थापित नहीं हो सकी है।
फिलहाल इसे केवल पॉलीथिन से ढंककर खुले मैदान में रखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के मुताबिक यह प्रतिमा गोंदवारा गांव के पास एक खुले स्थान पर रखी गई है। बारिश और कीचड़ के बीच प्रतिमा की सुरक्षा के लिए केवल तिरपाल और पॉलीथिन का सहारा लिया गया है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान श्रीराम की इतनी भव्य प्रतिमा के साथ इस तरह का व्यवहार उनकी आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है। उनका मानना है कि प्रतिमा को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक मंदिर परिसर में स्थापित किया जाना चाहिए।
पिछली कांग्रेस सरकार के समय राम वनगमन पर्यटन परियोजना के तहत चंद्रखुरी स्थित मंदिर परिसर का विकास किया गया था और वहां भगवान श्रीराम की एक विशाल प्रतिमा स्थापित की गई थी।
बाद में वर्तमान बीजेपी सरकार ने यह मानते हुए कि पहले स्थापित प्रतिमा भगवान श्रीराम के सौम्य और मर्यादित स्वरूप के अनुरूप नहीं है उसे बदलने का निर्णय लिया। इसके बाद ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार को नई प्रतिमा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया।
नई प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर के कलाकार दीपक विश्वकर्मा ने किया है। इसे पत्थरों के कई हिस्सों को जोड़कर तैयार किया गया है। करीब दो टन वजनी इस प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को चार महीने पहले ग्वालियर से रायपुर लाया गया था। इसके बाद से ही प्रतिमा स्थापना का इंतजार कर रही है।
![Statue Controversy]()
प्रतिमा स्थापना में हो रही देरी को लेकर जब संस्कृति विभाग के पास कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार भगवान श्रीराम के नाम पर सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये की नई प्रतिमा महीनों से खुले में पड़ी है।
उनका कहना है कि यदि स्थापना में तकनीकी या प्रशासनिक बाधाएं हैं तो सरकार को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं।
इसलिए उनकी प्रतिमा को खुले मैदान में पॉलीथिन से ढंककर रखना उचित नहीं है। लोगों ने मांग की है कि प्रतिमा की सुरक्षित देखभाल के साथ-साथ शीघ्र मंदिर परिसर में विधिवत स्थापना की जाए ताकि श्रद्धालु भगवान श्रीराम के नए स्वरूप के दर्शन कर सकें और लंबे समय से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो सके।
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फिलहाल इसे केवल पॉलीथिन से ढंककर खुले मैदान में रखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है। जानकारी के मुताबिक यह प्रतिमा गोंदवारा गांव के पास एक खुले स्थान पर रखी गई है। बारिश और कीचड़ के बीच प्रतिमा की सुरक्षा के लिए केवल तिरपाल और पॉलीथिन का सहारा लिया गया है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान श्रीराम की इतनी भव्य प्रतिमा के साथ इस तरह का व्यवहार उनकी आस्था को ठेस पहुंचाने वाला है। उनका मानना है कि प्रतिमा को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक मंदिर परिसर में स्थापित किया जाना चाहिए।
नई सरकार स्थापित कर रही नए राम :
बाद में वर्तमान बीजेपी सरकार ने यह मानते हुए कि पहले स्थापित प्रतिमा भगवान श्रीराम के सौम्य और मर्यादित स्वरूप के अनुरूप नहीं है उसे बदलने का निर्णय लिया। इसके बाद ग्वालियर के प्रसिद्ध मूर्तिकार को नई प्रतिमा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया।
नई प्रतिमा का निर्माण ग्वालियर के कलाकार दीपक विश्वकर्मा ने किया है। इसे पत्थरों के कई हिस्सों को जोड़कर तैयार किया गया है। करीब दो टन वजनी इस प्रतिमा के अलग-अलग हिस्सों को चार महीने पहले ग्वालियर से रायपुर लाया गया था। इसके बाद से ही प्रतिमा स्थापना का इंतजार कर रही है।
Statue Controversy
कब स्थापित होंगे श्रीराम :
उनका कहना है कि यदि स्थापना में तकनीकी या प्रशासनिक बाधाएं हैं तो सरकार को इसकी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए और जल्द समाधान निकालना चाहिए। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान श्रीराम करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं।
इसलिए उनकी प्रतिमा को खुले मैदान में पॉलीथिन से ढंककर रखना उचित नहीं है। लोगों ने मांग की है कि प्रतिमा की सुरक्षित देखभाल के साथ-साथ शीघ्र मंदिर परिसर में विधिवत स्थापना की जाए ताकि श्रद्धालु भगवान श्रीराम के नए स्वरूप के दर्शन कर सकें और लंबे समय से चला आ रहा इंतजार समाप्त हो सके।
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