छत्तीसगढ़ में जारी होगा 200 रुपए का खास सिक्का, राष्ट्रपति मुर्मू करेंगी विमोचन, जानें इसकी खासियत
Umeshwari Baghel | Oct 10, 2026, 19:17 IST
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती।
छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। केंद्र सरकार सिंधी समाज की प्रमुख संत माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती पर 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 अक्टूबर को रायपुर में इस खास सिक्के का विमोचन करेंगी।
इस मौके पर माता साहिब हासी देवी के सम्मान में एक विशेष डाक टिकट भी जारी होगा। सिक्का कोलकाता टकसाल में तैयार किया गया है। इसका वजन 35 ग्राम होगा।
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती को यादगार बनाने के लिएकेंद्र सरकारने खास तैयारी की है। रायपुर के लोकभवन में 22 अक्टूबर को विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 200 रुपए का स्मारक सिक्का जारी करेंगी।
इसी कार्यक्रम में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। शदाणी दरबार से जुड़े लोगों के अनुसार यह सिंधी समाज के लिए गर्व का अवसर है। इस आयोजन के जरिए माता साहिब हासी देवी के धार्मिक और सामाजिक योगदान को सम्मान दिया जाएगा।
यह स्मारक सिक्का सामान्य सिक्कों से अलग होगा। इसे भारत सरकार की कोलकाता टकसाल में तैयार किया गया है। प्रसिद्ध सिक्का विशेषज्ञ सुधीर लूणावत के अनुसार इसका वजन 35 ग्राम रखा गया है।
सिक्का बनाने में चार तरह की धातुओं का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा चांदी की होगी।
सिक्के की धातुओं और अन्य तकनीकी जानकारियों को लेकर सरकारी राजपत्र में अधिसूचना जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
इस खास सिक्के को श्रद्धालु और सिक्का संग्रह करने वाले लोग भी हासिल कर सकेंगे। शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई ने बताया कि विमोचन के बाद इसकी बुकिंग शुरू करने की तैयारी है।
इसके लिए शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट से भी सिक्का बुक करने की सुविधा मिलने की बात कही गई है।
हालांकि सिक्के की बिक्री कीमत और बुकिंग शुरू होने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। 200 रुपए इस सिक्के का अंकित मूल्य है। संग्रह के लिए इसकी बिक्री कीमत अलग हो सकती है।
शदाणी दरबार के सचिव उदय सांई ने इस फैसले को सिंधी समाज के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार किसी सिंधी धार्मिक विभूति के सम्मान में स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट जारी होना ऐतिहासिक अवसर है।
उन्होंने बताया कि सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहे थे। इन प्रयासों ने इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उदय सांई का कहना है कि भारत के साथ विदेशों में रहने वाले सिंधी समाज के लोगों के लिए भी यह सम्मान विशेष महत्व रखता है।
माता साहिब हासी देवी का संबंध सिंधी समाज की प्रसिद्ध धार्मिक संस्था शदाणी दरबार से रहा है। वे इस दरबार की पांचवीं पीठाधीश थीं। सिंधी समाज में शदाणी दरबार का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार उनके योगदान को स्मारक सिक्के और डाक टिकट के माध्यम से सम्मानित करने जा रही है। इस पहल से नई पीढ़ी को भी माता साहिब हासी देवी और शदाणी दरबार की परंपरा के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
शदाणी दरबार की धार्मिक परंपरा की शुरुआत 18वीं सदी से मानी जाती है। इसके संस्थापक संत शदूराम साहिब का जन्म अक्टूबर 1708 में लाहौर में हुआ था। शदाणी दरबार की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार संत शदूराम साहिब 1768 में सिंध के मठेलो पहुंचे थे।
बाद में उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब जलाई गई थी। इस धूनी का धार्मिक महत्व आज भी बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शदाणी परंपरा से जुड़े हुए हैं।
साल 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद शदाणी दरबार की धार्मिक परंपरा भारत में भी आगे बढ़ी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इसके प्रमुख धार्मिक केंद्र का विकास किया गया।
रायपुर के धमतरी रोड पर करीब 12 एकड़ जमीन में शदाणी दरबार तीर्थ स्थित है। इसकी नींव 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्य भी किए जाते हैं।
माता साहिब हासी देवी की जयंती पर जारी होने वाला स्मारक सिक्का केवल संग्रह की वस्तु नहीं होगा। यह सिंधी समाज के धार्मिक इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की पहचान भी बनेगा।
शदाणी दरबार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इस पहल से संस्था के इतिहास और समाज के योगदान की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। 22 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह है। अब श्रद्धालुओं और सिक्का संग्राहकों को इसके औपचारिक विमोचन और बुकिंग शुरू होने का इंतजार है।
FAQ
रायपुर में राष्ट्रपति करेंगी सिक्के का विमोचन
इसी कार्यक्रम में विशेष डाक टिकट भी जारी किया जाएगा। शदाणी दरबार से जुड़े लोगों के अनुसार यह सिंधी समाज के लिए गर्व का अवसर है। इस आयोजन के जरिए माता साहिब हासी देवी के धार्मिक और सामाजिक योगदान को सम्मान दिया जाएगा।
35 ग्राम के सिक्के में होगी 50 फीसदी चांदी
सिक्का बनाने में चार तरह की धातुओं का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें सबसे ज्यादा मात्रा चांदी की होगी।
| धातु | मात्रा |
|---|---|
| चांदी | 50 प्रतिशत |
| तांबा | 40 प्रतिशत |
| निकल | 5 प्रतिशत |
| जस्ता | 5 प्रतिशत |
आम लोग भी कर सकेंगे स्मारक सिक्के की बुकिंग
इसके लिए शदाणी दरबार की अलग-अलग इकाइयों के माध्यम से सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट से भी सिक्का बुक करने की सुविधा मिलने की बात कही गई है।
हालांकि सिक्के की बिक्री कीमत और बुकिंग शुरू होने की तारीख अभी स्पष्ट नहीं है। 200 रुपए इस सिक्के का अंकित मूल्य है। संग्रह के लिए इसकी बिक्री कीमत अलग हो सकती है।
सिक्का जारी कराने के लिए कई साल से हो रहे थे प्रयास
उन्होंने बताया कि सिक्का संग्राहक विक्रम तेजवानी लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहे थे। इन प्रयासों ने इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। उदय सांई का कहना है कि भारत के साथ विदेशों में रहने वाले सिंधी समाज के लोगों के लिए भी यह सम्मान विशेष महत्व रखता है।
कौन थीं माता साहिब हासी देवी?
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती के अवसर पर केंद्र सरकार उनके योगदान को स्मारक सिक्के और डाक टिकट के माध्यम से सम्मानित करने जा रही है। इस पहल से नई पीढ़ी को भी माता साहिब हासी देवी और शदाणी दरबार की परंपरा के बारे में जानने का अवसर मिलेगा।
करीब 300 साल पुराना है शदाणी दरबार का इतिहास
बाद में उन्होंने हयात पिताफी में शदाणी दरबार की स्थापना की। यहां पवित्र धूनी साहिब जलाई गई थी। इस धूनी का धार्मिक महत्व आज भी बना हुआ है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु शदाणी परंपरा से जुड़े हुए हैं।
बंटवारे के बाद रायपुर में बना शदाणी दरबार तीर्थ
रायपुर के धमतरी रोड पर करीब 12 एकड़ जमीन में शदाणी दरबार तीर्थ स्थित है। इसकी नींव 20 जनवरी 1988 को संत गोबिंदराम साहिब ने रखी थी। वर्तमान में संत डॉ. युधिष्ठिर लाल शदाणी दरबार के नौवें पीठाधीश्वर हैं। यहां धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सामाजिक सेवा और जनकल्याण के कार्य भी किए जाते हैं।
सिंधी समाज की विरासत को मिलेगी नई पहचान
शदाणी दरबार से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इस पहल से संस्था के इतिहास और समाज के योगदान की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी। 22 अक्टूबर को होने वाले कार्यक्रम को लेकर समाज में उत्साह है। अब श्रद्धालुओं और सिक्का संग्राहकों को इसके औपचारिक विमोचन और बुकिंग शुरू होने का इंतजार है।
FAQ
- माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती कब मनाई जाएगी?
माता साहिब हासी देवी की 200वीं जयंती 22 अक्टूबर 2023 को मनाई जाएगी। - स्मारक सिक्के का विमोचन कौन करेगा?
स्मारक 200 रुपए के सिक्के का विमोचन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू करेंगी। - स्मारक सिक्के की बुकिंग कैसे की जाएगी?
स्मारक सिक्के की बुकिंग शदाणी दरबार की इकाइयों और कोलकाता टकसाल की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से की जाएगी।
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