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Photograph: (the sootr)
News in Short
- बस्तर में हिड़मा के गाने ने सोशल मीडिया और सरकारी तंत्र में हलचल मचाई।
- गाने में नक्सली लीडर हिड़मा को 'जल-जंगल-जमीन' का रखवाला बताया जा रहा है।
- भूमकाल स्मृति दिवस पर यह गाना पुलिस के सामने बजा, जिससे विवाद गहरा गया।
- पुलिस ने यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया और रैली आयोजकों से पूछताछ की।
- हिड़मा नक्सली कमांडर था, उस पर कई बड़े हमलों का आरोप था।
Shailendra Thakur@Jagdalpur. छत्तीसगढ़ के बस्तर में इन दिनों बंदूकों की गड़गड़ाहट से ज्यादा एक 'गाने' के शोर ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा रखी है। कल तक जो हिड़मा बस्तर के जंगलों में खौफ का पर्याय था और 18 नवंबर को मुठभेड़ में मारा गया, आज वही एआई और सोशल मीडिया के जरिए एक क्रांतिकारी जननायक के रूप में पेश किया जा रहा है।
News in Detail
छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों से निकलकर एक गाना इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर दूरदराज के गांवों तक गूंज रहा है। इसने रायपुर से लेकर दिल्ली तक गलियारों में खलबली मचा दी है। यह गाना किसी फिल्म का नहीं, बल्कि खूंखार नक्सली कमांडर माड़वी हिड़मा की 'महिमा मंडन' का वह सुर है, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बन गया है।
एक तरफ सरकार मार्च 2026 तक नक्सलवाद के पूर्ण सफाए की डेडलाइन गिन रही है, तो दूसरी तरफ एआई-जेनरेटेड तस्वीरों और भावुक कर देने वाले गीतों के जरिए हिड़मा को 'जल-जंगल-जमीन' का रखवाला बताकर उसकी प्रेम कहानी को घर-घर तक परोसा जा रहा है।
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भूमकाल स्मृति दिवस पर गूंजा गाना
​विवाद तब और गहरा गया जब जगदलपुर की सड़कों पर भूमकाल स्मृति दिवस की रैली में पुलिस की मौजूदगी के बीच यह गाना तेज आवाज में गूंज उठा। "हमारा उबलता लहू हिड़मा... हमारी बंदूक तू हिड़मा...जैसे बोलों पर जब भीड़ झूमने लगी, तो खुफिया विभाग के कान खड़े हो गए। यह महज एक चूक है या नक्सली विचारधारा को दोबारा जिंदा करने की कोई गहरी साजिश? फिलहाल, यूएपीए के तहत दर्ज मामले और पुलिस की तफ्तीश के बीच बस्तर की फिजाओं में गूंजता यह संगीत अब सीधे सत्ता के इकबाल को चुनौती दे रहा है।
रैली में गाना बजा, पुलिस मौन?
जगदलपुर के अग्रसेन चौक के पास भूमकाल स्मृति दिवस की रैली के दौरान जब यह गीत बजा, तो कई लोग झूमते और तालियां बजाते दिखे। हैरानी की बात यह रही कि मौके पर पुलिस बल मौजूद था। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई है। रायपुर के सिविल लाइन थाने में यूएपीए के तहत मामला दर्ज होने की जानकारी है। रैली आयोजकों से पूछताछ की जा रही है।
सर्व आदिवासी समाज अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने सफाई दी कि डीजे ऑपरेटर की चूक से गीत बज गया और संगठन किसी भी असंवैधानिक गतिविधि का समर्थन नहीं करता।
कौन था हिड़मा?-
सुकमा जिले के पूवर्ती गांव का रहने वाला हिड़मा नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था और उस पर 1 करोड़ से अधिक का इनाम घोषित था। नवंबर 2025 में आंध्र प्रदेश के अल्लुरी सीतारामा राजू जिला में मुठभेड़ में वह मारा गया। उस पर कई बड़े हमलों का नेतृत्व करने का आरोप था, जिनमें-
•2007: रानी बोदली कैंप हमला- 55 जवान शहीद
•2010: ताड़मेटला हमला- 76 सीआरपीएफ जवान शहीद
•2010: चिंतलनार-चिंगावरम IED ब्लास्ट- 20 जवान और 12 नागरिकों की मौत
डेडलाइन नजदीक, नैरेटिव की जंग तेज
केंद्र और राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तय की है। कई बड़े नक्सली नेताओं के मारे जाने और आत्मसमर्पण की घटनाओं के बीच सरकार अपने अभियान को सफल बताने लगी है।
हिड़मा के नाम पर तैयार हो रहा भावनात्मक और डिजिटल समर्थन यह संकेत दे रहा है कि जंग सिर्फ जंगल में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लड़ी जा रही है। बस्तर रेंज आईजी सुन्दरराज पी ने कहा है कि मामले की जांच जारी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एडवाइजरी जारी की जा रही है।
सवाल अब सीधा है- क्या यह सिर्फ एक गाना है या नक्सल विचारधारा को नए रूप में जिंदा रखने की संगठित कोशिश? बस्तर में शांति की राह पर बढ़ते कदमों के बीच यह विवाद एक नई बहस छेड़ चुका है।
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