राज्यसभा चुनाव 16 मार्च को : छत्तीसगढ़ से अभिषेक मनु सिंघवी के नाम पर कांग्रेस में घमासान

Arun Tiwari | Feb 18, 2026, 11:50 IST
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chhattisgarh rajya sabha election 2026 abhishek manu singhvi congress controversy
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राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई है। इसी के साथ छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की रेस शुरू हो गई है। राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की दो सीटें खाली हो रही हैं। इन सीटों पर 16 मार्च को चुनाव होंगे।

News in short

  • राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की दो सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होंगे।
  • कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक-एक सीट का बंटवारा होगा।
  • कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है।
  • कांग्रेस में अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा ने बाहरी बनाम स्थानीय विवाद को फिर से तूल दिया है।
  • कई विधानसभा चुनाव हार चुके नेता राज्यसभा के जरिए राजनीति में वापसी करना चाहते हैं।
  • राज्यसभा सीटों के उम्मीदवार का चयन दिल्ली से होगा, बीजेपी के पास एक और कांग्रेस के पास चार सीटें हैं।

News in detail

राज्यसभा में छत्तीसगढ़ की दोनों सीटें कांग्रेस के पास हैं, लेकिन अब एक-एक सीट का बंटवारा हो जाएगा। एक सीट कांग्रेस को मिलेगी, तो एक सीट बीजेपी के खाते में जाएगी। कांग्रेस की फूलोदेवी नेताम और केटीएस तुलसी का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा है। कांग्रेस में बाहरी और स्थानीय नेता की कलह शुरू हो गई है।

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कांग्रेस में घमासान

छत्तीसगढ़ में अप्रैल में होने वाले राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही बीजेपी और कांग्रेस के हिस्से में एक-एक सीट जाना तय माना जा रहा है।

कांग्रेस में अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा ने बाहरी बनाम स्थानीय के पुराने विवाद को फिर हवा दे दी है। केटीएस तुलसी के बाद एक और बाहरी चेहरे पर कार्यकर्ताओं के तेवर कड़े बताए जा रहे हैं।

विधानसभा चुनाव हार चुके नेता राज्यसभा के जरिए वापसी की कोशिश में हैं। दिल्ली नेतृत्व स्थानीय निष्ठा को प्राथमिकता देगा या रणनीतिक चेहरों को, इस पर सबकी नजर है।

कांग्रेस में सिंघवी के नाम की चर्चा

कांग्रेस खेमे में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा से प्रदेश इकाई में असहजता देखी जा रही है। चर्चा है कि तेलंगाना में बाहरी उम्मीदवार के रूप में विरोध झेल रहे सिंघवी के लिए छत्तीसगढ़ को विकल्प बनाया जा सकता है।

सिंघवी के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व की पैरवी और प्रदेश के शीर्ष नेताओं के कानूनी मामलों में उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। हालांकि, स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा पार्टी के भीतर मतभेद पैदा कर रहा है।

एक धड़ा केटीएस तुलसी के बाद फिर किसी बाहरी को मौका देने के विरोध में है। बताया जा रहा है कि स्थानीय नेता अपनी बात रखने के लिए दिल्ली में हाईकमान से मुलाकात कर सकते हैं।

चुनाव हारे नेता जाना चाहते हैं राज्यसभा

बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टी के चुनाव हार चुके नेता राज्यसभा जाना चाहते हैं। विधानसभा चुनाव हार चुके कई नेता राज्यसभा के जरिए सक्रिय राजनीति में लौटने की कोशिश में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार संगठन से जुड़े किसी स्थानीय चेहरे को मौका दिया जा सकता है।

हालांकि, अंतिम निर्णय राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा। इन राज्यसभा सीटों पर कौन जाएगा इसका फैसला दिल्ली से ही होगा, यह किसी से छिपा नहीं है। राज्य की पांच राज्यसभा सीटों में फिलहाल चार कांग्रेस और एक बीजेपी के पास है।

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 68 सीटें मिलने के बाद समीकरण बदले थे। 2018 से 2023 के बीच खाली हुई चारों सीटें कांग्रेस को मिलीं। साल 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी के 54, कांग्रेस के 35 और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का एक विधायक है।

वर्तमान संख्या बल के आधार पर बीजेपी के हिस्से में तीन और कांग्रेस के खाते में दो सीटें आने की संभावना जताई जा रही है।

छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सदस्य और उनका कार्यकाल

  • फूलोदेवी नेताम, कांग्रेस - 9 अप्रैल 2026
  • केटीएस तुलसी, कांग्रेस - 9 अप्रैल 2026
  • राजीव शुक्ला, कांग्रेस - 29 जून 2028
  • रंजीत रंजन, कांग्रेस - 29 जून 2028
  • देवेंद्र प्रताप सिंह, बीजेपी - 2 अप्रैल 2030

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो चुकी है। गणित साफ है, एक सीट कांग्रेस और एक बीजेपी के खाते में जाना तय माना जा रहा है, लेकिन असली लड़ाई कांग्रेस के भीतर है।

अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा ने पार्टी में बाहरी बनाम स्थानीय का पुराना विवाद फिर सतह पर ला दिया है। कार्यकर्ता और स्थानीय नेता अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या राज्यसभा को फिर से ‘एडजस्टमेंट हाउस’ बनाया जाएगा या जमीनी नेताओं को प्रतिनिधित्व मिलेगा।

अब आगे क्या

कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान तेज होगी, सिंघवी जैसे बाहरी चेहरे के नाम से असंतोष और बढ़ सकता है। स्थानीय नेता दिल्ली दरबार में अपनी दावेदारी मज़बूती से रख सकते हैं। राज्यसभा उम्मीदवारों पर अंतिम मुहर हमेशा की तरह दिल्ली से ही लगेगी। बीजेपी को एक सीट मिलना लगभग तय है, ऐसे में वहां ज़्यादा विवाद की संभावना कम मानी जा रही है। विधानसभा चुनाव हार चुके नेता राज्यसभा के ज़रिए राजनीतिक वापसी की कोशिश करेंगे, जिससे दोनों दलों में दावेदारों की संख्या बढ़ेगी।

Sootr Knowledge

राज्यसभा के सदस्य जनता के जरिए सीधे नहीं, बल्कि विधानसभा के निर्वाचित विधायक चुनते हैं। चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है। हर राज्य में सीटों का बंटवारा विधानसभा में विधायकों की संख्या के आधार पर तय होता है। एक राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल 6 साल का होता है।

हर दो साल में एक-तिहाई सीटें खाली होती हैं। उम्मीदवार का उस राज्य का निवासी होना अब अनिवार्य नहीं है। इसी वजह से “बाहरी उम्मीदवार” का विवाद खड़ा होता है। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की पांच सीटें हैं जिनमें से 4 कांग्रेस और एक बीजेपी के पास है। अप्रैल में 2 सीटें खाली होंगी जिनमें से एक बीजेपी और एक कांग्रेस के खाते में जाएगी।

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