भुगतान अटका.. भर्ती लंबित..कर्मचारी नाखुश, कैसे पूरा होगा छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047 का सपना?

वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ सरकार ने जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य, सड़क, डिजिटल गवर्नेंस, रोजगार, आवास और कौशल विकास जैसी योजनाओं के लिए हजारों करोड़ रूपए का प्रावधान किया। लेकिन जमीनी स्तर पर कई परियोजनाएं अधूरी हैं।

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VINAY VERMA
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Raipur. वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट में छत्तीसगढ़ में कई योजनाओं पर हजारों करोड़ का प्रावधान हुआ था। जल जीवन मिशन से लेकर सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार योजनाएं शामिल हैं। मगर जमीनी हाल अलग हैं। कई प्रोजेक्ट अधूरे हैं। भुगतान अटका है। भर्ती लंबित है। अब सवाल यही है कि छत्तीसगढ़ विजन 2047 के पहले चरण में सरकार पीछे हो गई तो तय लक्ष्य कैसे पाएगी?

जल जीवन मिशन के लिए 4500 करोड़, फिर भी प्यास

मूलभूत सुविधाओ के लिए तरस रहीं छग की जनता को हजारो करोड़ खर्च करने के बाद भी साफ पानी नहीं मिल रहा। समस्या दूर करने पिछले साल बजट में जल जीवन मिशन के लिए 4500 करोड़ रखे गए। खर्च के बाद भी असर सीमित दिखता है। पाइपलाइन और नल कनेक्शन अधूरे हैं। गांव तो दूर राजधानी रायपुर सहित बड़े शहरों में अब भी टैंकर से पानी मिलता है।

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डिजिटल गवर्नेंस-पोर्टल अभी तक बंद

लालफीताशाही रोकने ई- ऑफिस योजना शुरू हुई। मंत्रालय, सचिवालय और विभागाध्यक्ष कार्यालयों ने तो लागू कर लिया लेकिन जिला स्तर तक इसे लागू नहीं किया जा सका है। 10 करोड़ का अटल मॉनिटरिंग पोर्टल अटका है।

जेम पोर्टल अनिवार्य, फिर भी गड़बड़ी

पिछले बजट के अनुसार भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के दावों के साथ सरकारी खरीद के लिए जेम पोर्टल अनिवार्य किया गया था। लेकिन सख्ती के बावजूद कई विभागों पर नियम तोड़ दिए। स्कूल शिक्षा और महिला बाल विभाग, वन और पर्यटन विभाग चर्चा मे ंरहे। इसके अलावा उन पर हुई जांच और कार्रवाईयां भी सवालों के घेरे मे ंहै।

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जमीन रजिस्ट्री, सुधार की फाइल अटकी

स्टांप विभाग में आईटी सुधार की घोषणा हुई। 20 करोड़ का प्रावधान भी तय हुआ। फर्जी रजिस्ट्री रोकने का मॉडल नहीं बना। पासपोर्ट जैसी सुविधा शुरू नहीं हो सकी। हक त्याग, बंटवारा जैसे प्रक्रिया के दौरान लाखों के खर्च को घटाने का दावा था। 500 रुपए में प्रक्रिया पूरी करने की बात हुई। लागू करने की दिशा में प्रगति नहीं दिखी। लोग अब भी भारी शुल्क दे रहे हैं।

सुशासन फेलोशिप के लिए युवा इंतजार में

सीएम सुशासन फेलोशिप के लिए बजट तय हुआ। उच्च संस्थानों से ट्रेनिंग की योजना बनी। आईआईएम और ट्रिपल आईटी से सहयोग की बात हुई। हजारों युवाओं को नौकरी का इंतजार है।

हेल्पलाइन और भुगतान, सिस्टम फंसा

22 करोड़ से आधुनिक कॉल सेंटर बनना था। हेल्पलाइन सेवा अभी तक शुरू नहीं हुई। वेंडर भुगतान समय पर करने का वादा था। करोड़ों के बिल अटके होने की शिकायतें हैं। भुगतान में लेनदेन के आरोप भी लगे। कई वेंडरों ने काम करना तक छोड़ दिया। पीडब्ल्यूडी, पीएचई, स्वास्थ्य विभाग सहित लगभग सभी विभागों के यहीं हालात हैं।

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मेडिकल कॉलेज और स्वास्थ्य संकट

आयुष्मान योजना के लिए 1500 करोड़ रखे गए। एनएचएम के लिए 18500 करोड़ का प्रावधान है। उसके बावजूद रायपुर सहित प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है, पैरासिटामॉल जैसी बेसिक दवाएं नहीं, साल भर दवाओं के खरीदी में घोटाला होता रहा। निजी अस्पतालों में भी मरीजों से लूट जारी है।

 सरकार निजी अस्पतालों को आयुष्मान भारत योजना के तहत तय राशि नहीं दिलवा पा रही, जिससे उनका भुगतान अटका रहता है। जिसके कारण मरीजो को अपने पैसे से महबूरन महंगा इलाज करवाना पड़ता है। दंतेवाड़ा में ढाई सौ करोड़ से कॉलेज बना। विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है। एमआरआई और सीटी मशीन लगाने की घोषणा हुई। खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे।

इंजीनियर भर्ती खाली पद

पिछले बजट में सरकार ने प्रदेश के जल संसाधन, लोक निर्माण और पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग में 600 इंजीनियर भर्ती की अनुमति दी। लेकिन आज तक इन तीन विभागों में लंबे समय से खाली पड़े 30 प्रतिशत पद भरे नहीं गए।

उनका काम दूसरे अधिकारियों से करवाया जा रहा है। सबसे अधिक समस्या जल संसाधन विभाग की है। जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली है। उन पदों पर रिटायर्ड अधिकारियों को ही संविदा नियुक्ति देकर काम करवाया जा रहा है।  

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सड़क और रिंग रोड योजना की हकीकत

छग सरकार ने रोड प्लान 2030 का लक्ष्य घोषित किया है। जिसके लिए लोक निर्माण विभाग को 9500 करोड़ का बजट मिला था। लेकिन कई शहरों में सड़कें जर्जर हैं। रिंग रोड की डीपीआर भी अधूरा है। भुगतान नहीं मिलने से पुराने ठेकेदार काम नहीं कर रहे। नए ठेकेदार इतनी कम राशि में काम उठा लेते हैं जितने में पूरा नहीं हो पाता। इस वजह से वे भी बीच में काम छोड़ चले जाते हैं।  

मेट्रो, फ्लाइओवर और एयरपोर्ट

पिछले साल की घोषणाओ ंके आधार पर रायपुर और दुर्ग के बीच मेट्रो चलने की उम्मीद जगी थी। पिछले मेट्रो सर्वे के लिए राशि तय हुई। लेकिन सर्वे ही हो पाया है। प्रदेश के कई शहरों में फ्लाइओवर की मांग वर्षों से लंबित है। घोषणाए हुई लेकिन काम अधूरे हैं। इधर जगदलपुर, अंबिकापुर और बिलासपुर को 40 करोड़ मिलने के बाद भी एयरपोर्ट विकास की गति भी धीमी है।

कौशल विकास और बेरोजगारी

कौशल विकास के लिए 26 करोड़ तय हुए। इसे जरिए राज्य में 356 संस्थाएं युवाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। लेकिन युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही। 10000 पदों पर भर्ती की घोषणा के तहत प्रक्रिया शुरु होने का इंतजार युवाओ ंको अभी भी है।

पिछले वित्तीय वर्ष में वित्त मंत्री ने 18 लाख आवास का लक्ष्य रखा था। 8500 करोड़ का बजट की घोषणा की थी। केवल पांच लाख मकान पूरे बताए जाते हैं। जिसे रिकार्ड बता सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।

क्राइम रोकने वादे अधूरे

नए साइबर थाने खोलने की घोषणा हुई। जो कि अधूरी रही। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स को मंजूरी मिली। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप का प्रस्ताव पास हुआ। फोर्स गठन की प्रक्रिया अब भी लंबित है।

कर्मचारी असंतोष और एरियर विवाद

सरकार का दावा था कि कर्मचारियों को समय पर महंगाई भत्ता देने का प्रावधान था लेकिन उसमें 4 महीने देरी की गई। साथ में एरियर नहीं दिया गया। जिसके कारण कर्मचारियों में नाराजगी है। छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा बता रहे हैं कि फिलहाल 80 महीने का एरिसर्य बकाया है सरकार उसे नहीं दे रही।

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