छत्तीसगढ़ के 26 में से 12 जिला अस्पताल बीमार, लीवर-किडनी, हार्ट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर का एक भी पद नहीं

छत्तीसगढ़ के 12 जिला अस्पताल बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। नौ जिलों में आईसीयू और 12 में सीटी स्कैन नहीं है। साथ ही विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक भी पद स्वीकृत नहीं।

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Arun Tiwari
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News In Short

  • छत्तीसगढ़ के 12 जिला अस्पताल बीमार हैं।
  • प्रदेश के 26 जिला अस्पतालों में से 9 में आईसीयू नहीं है।
  • 12 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है।
  • लीवर किडनी हार्ट के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर का एक भी पद नहीं है।

News In Detail

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य पर खास फोकस करने की बात कहती है लेकिन असलियत कुछ और है। छत्तीसगढ़ के जिला अस्पताल ही बीमार हैं। प्रदेश के 26 जिला अस्पतालों में से नौ में आईसीयू नहीं है जबकि 12 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

इनमें से अधिकांश जिले ऐसे हैं जिनमें न आईसीयू है और न सीटी स्कैन की सुविधा। एक भी जिला अस्पताल में हार्ट अटैक,ब्रेन हेमरेज,लीवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक भी पद स्वीकृत नहीं है। सिर्फ 8 मेडिकल कॉलेजों में  क्रिटिकल आईसीयू हैं।

स्वास्थ्य सिस्टम खुद वेंटिलेटर पर

छत्तीसगढ़ सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। प्रदेश के जिला अस्पताल, जिन्हें ग्रामीण और दूरदराज इलाकों की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है,वह खुद गंभीर हालत में हैं। बुनियादी सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी ने जिला अस्पतालों को मानो वेंटिलेटर पर पहुंचा दिया है।

प्रदेश में कुल 33 जिला अस्पताल संचालित हैं, लेकिन इनमें से 21 जिला अस्पताल गंभीर अव्यवस्था से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि 9 जिला अस्पतालों में अब तक आईसीयू की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिससे गंभीर मरीजों का इलाज जिला स्तर पर संभव ही नहीं हो पाता है। सड़क हादसे, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या गंभीर संक्रमण के मामलों में मरीजों को तत्काल बड़े शहरों के मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

विशेषज्ञ डॉक्टर का एक भी पद नहीं 

इन जिला अस्पतालों में जांच सुविधाओं की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। 12 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है, जबकि यह जांच ब्रेन हेमरेज, सिर में गंभीर चोट और स्ट्रोक जैसी स्थितियों में जीवन रक्षक मानी जाती है। जांच में देरी के कारण कई बार मरीजों की हालत बिगड़ जाती है और जान का जोखिम बढ़ जाता है।

सबसे बड़ा और गंभीर सवाल विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को लेकर है। चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश के एक भी जिला अस्पताल में हार्ट, ब्रेन, लीवर और किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का कोई पद ही स्वीकृत नहीं है। यानी कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट जैसे डॉक्टर जिला अस्पतालों में तैनात ही नहीं किए जा सकते। ऐसे में जटिल बीमारियों का इलाज जिला स्तर पर लगभग असंभव हो जाता है। 

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर

इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण, आदिवासी और गरीब तबके के मरीजों पर पड़ रहा है। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को सैकड़ों किलोमीटर दूर रायपुर, बिलासपुर, अंबिकापुर या जगदलपुर जैसे शहरों के मेडिकल कॉलेजों तक जाना पड़ता है। कई मामलों में समय पर इलाज न मिलने से मरीजों की जान तक चली जाती है।

प्रदेश में फिलहाल केवल 8 मेडिकल कॉलेजों में ही क्रिटिकल आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है, जबकि जिला अस्पतालों पर मरीजों का सबसे अधिक भार रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जिला अस्पतालों को मजबूत नहीं किया गया, तो मेडिकल कॉलेजों पर दबाव और बढ़ेगा और आम जनता को सस्ती व सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाएंगी। 

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल कहते हैं कि सरकार की प्राथमिकताओं में स्वास्थ्य शामिल है। सरकार अस्पतालों में सभी सुविधाएं मुहैया कराने के पूरे प्रयास कर रही है ताकि लोगों को अपने घर के पास ही बीमारी का इलाज मिल सके। 

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सरकार लगातार स्वास्थ्य बजट बढ़ाने और नई योजनाओं की बात कर रही है, लेकिन जिला अस्पतालों की बदहाल स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं। अब जरूरत है कि सरकार जिला अस्पतालों में आईसीयू, सीटी स्कैन जैसी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराए और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित कर उनकी नियुक्ति सुनिश्चित करे। जब तक जिला अस्पताल मजबूत नहीं होंगे, तब तक प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को स्वस्थ कहना महज एक दावा ही बना रहेगा।

important points 

  • छत्तीसगढ़ के 26 जिला अस्पतालों में से 12 गंभीर अव्यवस्था से जूझ रहे हैं, जहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है।

  • 9 जिला अस्पतालों में आईसीयू नहीं है, जबकि 12 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन जैसी जरूरी जांच सुविधा उपलब्ध नहीं है।

  • हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज, लीवर और किडनी की बीमारियों के इलाज के लिए किसी भी जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का पद नहीं है।

  • गंभीर मरीजों को लंबी दूरी तय कर मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे इलाज में देरी और जान का खतरा बढ़ रहा है।

  • स्वास्थ्य पर फोकस के सरकारी दावों के बावजूद जिला अस्पतालों की जमीनी स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर रही है।

इन जिला अस्पतालों में नहीं आईसीयू 

  • गरियाबंद

  • गोरेला पेंड्रा

  • जांजगीर

  • रायगढ़

  • रायपुर

  • राजनांदगांव

  • सारंगढ़

  • सुकमा

  • सूरजपुर

इन अस्पतालों में नहीं सीटी स्कैन सुविधा 

  • बलरामपुर

  • बिलासपुर

  • गोरेला पेंड्रा

  • गरियाबंद

  • महेंद्रपुर चिरमिरी

  • नारायणपुर

  • मुंगेली

  • रायगढ़

  • राजनांदगांव

  • सारंगढ़

  • सुकमा

  • सूरजपुर

अब आगे क्या

अब छत्तीसगढ़ सरकार के सामने चुनौती केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की है। सबसे पहले सभी जिला अस्पतालों में आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करनी होंगी।

इसके साथ ही हार्ट, ब्रेन, किडनी और लीवर से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद सृजित कर जल्द नियुक्ति जरूरी है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेजों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए जिला अस्पतालों को रेफरल सिस्टम का मजबूत केंद्र बनाना होगा। सरकार स्वास्थ्य बजट बढ़ाने पर भी विचार कर रही है। 

निष्कर्ष 

छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा और उसकी जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है। जिला अस्पताल, जो आम जनता के लिए इलाज की पहली और सबसे अहम कड़ी होते हैं, आज खुद बदहाल स्थिति में हैं।

आईसीयू, सीटी स्कैन जैसी जरूरी सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में गंभीर मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे बड़ा नुकसान ग्रामीण, आदिवासी और आर्थिक रूप से कमजोर तबके को उठाना पड़ रहा है। यदि जिला अस्पतालों की स्थिति नहीं सुधरी, तो प्रदेश की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका गंभीर और दीर्घकालिक असर पड़ेगा।

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