छत्तीसगढ़ में बिजली चोरी पर बड़ी कार्रवाई, 187 ठिकानों पर जांच में 96 जगह गड़बड़ी, अब होगी कानूनी कार्रवाई
Umeshwari Baghel | Oct 11, 2026, 10:47 IST
महासमुंद-गरियाबंद में बिजली विभाग की बड़ी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ के महासमुंद और गरियाबंद जिले में बिजली चोरी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया है। बिजली कंपनी की 27 टीमों ने 187 घरों और अन्य परिसरों की जांच की। इस दौरान 96 जगहों पर अवैध तरीके से बिजली इस्तेमाल करने का मामला सामने आया। कई लोगों ने बिल नहीं चुकाने के कारण कटे कनेक्शन दोबारा जोड़ लिए थे।
कुछ जगहों पर सीधे बिजली के तारों से कनेक्शन लेकर सप्लाई चालू कर ली गई थी। अब कंपनी दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
छत्तीसगढ़ में बिजली बिलनहीं चुकाने और अवैध कनेक्शन के जरिए बिजली इस्तेमाल करने वालों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने महासमुंद और गरियाबंद जिले में विशेष जांच अभियान चलाया।
इस कार्रवाई के लिए बिजली कंपनी ने 27 अलग-अलग टीमें बनाई थीं। इनमें करीब 55 सहायक और कनिष्ठ अभियंता शामिल थे। इनके साथ बिजली लाइन पर काम करने वाले कर्मचारी भी मौजूद रहे।
जांच टीमों ने दोनों जिलों में कुल 187 परिसरों का निरीक्षण किया। इस दौरान 96 स्थानों पर नियमों के खिलाफ बिजली इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। यानी जांच किए गए आधे से ज्यादा परिसरों में गड़बड़ी मिली।
बिजली कंपनी के मुताबिक, जांच के दौरान सबसे ज्यादा ध्यान उन उपभोक्ताओं पर दिया गया, जिनके कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके थे। इन उपभोक्ताओं पर बिजली बिल की रकम बकाया थी।
कई उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर से बिजली सप्लाई रिमोट सिस्टम के जरिए बंद की गई थी। वहीं कुछ स्थानों पर विभाग ने लाइन से कनेक्शन काट दिया था। इसके बावजूद कई परिसरों में बिजली का इस्तेमाल जारी मिला। जांच के दौरान पता चला कि कुछ लोगों ने बिना बकाया रकम चुकाए खुद ही बिजली की सप्लाई शुरू कर ली थी।
जांच में बिजली चोरी के अलग-अलग तरीके सामने आए। कुछ परिसरों में मीटर को बायपास करके बिजली इस्तेमाल की जा रही थी। इसका मतलब है कि बिजली की सप्लाई ऐसे रास्ते से ली जा रही थी, जिससे मीटर में वास्तविक खपत दर्ज नहीं हो रही थी।
वहीं कुछ जगहों पर बिजली की एलटी लाइन से सीधे तार जोड़ दिए गए थे। इसे आम भाषा में हुकिंग कहा जाता है। इस तरीके से बिना वैध कनेक्शन के बिजली इस्तेमाल की जा रही थी।
बिजली कंपनी की टीमों ने इन गड़बड़ियों को मौके पर दर्ज किया। अधिकारियों ने पंचनामा तैयार किया और कार्रवाई के लिए जरूरी सबूत भी जुटाए।
जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद बिजली कंपनी ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। संबंधित मामलों में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 और 138 के तहत कार्रवाई की जा रही है। धारा 135 बिजली चोरी से जुड़े मामलों में लागू होती है। वहीं धारा 138 बिजली मीटर और विद्युत उपकरणों के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ जैसे मामलों से संबंधित है।
बिजली कंपनी अब संबंधित मामलों को विशेष न्यायालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटी है। जिन लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उन्हें कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सभी 96 मामलों में एफआईआर दर्ज होने की अलग से पुष्टि नहीं हुई है। अभी विभाग ने कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी है।
इस अभियान के दौरान केवल बिजली चोरी के मामले ही सामने नहीं आए। कई उपभोक्ताओं ने अपना बकाया बिजली बिल जमा करने की पहल भी की। जांच टीमों के पहुंचने पर कुछ लोगों ने मौके पर ही बिल का भुगतान किया। वहीं कई घरेलू बीपीएल और कृषि पंप उपभोक्ताओं ने मुख्यमंत्री समाधान योजना के तहत पंजीयन कराया।
इस योजना के जरिए पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के निपटारे की सुविधा दी जा रही है। बिजली कंपनी का उद्देश्य है कि उपभोक्ता नियमों के अनुसार अपना बकाया चुकाएं और वैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल करें।
बिजली विभागने उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि बिल बकाया होने के कारण कनेक्शन काटा गया है, तो उसे खुद से जोड़ने की कोशिश न करें। कंपनी ने कहा है कि बिजली की लाइन से सीधे तार जोड़ना या मीटर के साथ छेड़छाड़ करना कानून का उल्लंघन है।
ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बकाया बिल का भुगतान करें। बिजली कनेक्शन दोबारा चालू कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाएं।
महासमुंद और गरियाबंद में हुई यह कार्रवाई बिजली कंपनी के बड़े जांच अभियान का हिस्सा है। कंपनी ने साफ किया है कि बिजली चोरी रोकने और बकाया बिल की वसूली के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह विशेष अभियान 31 मार्च 2027 तक चलाया जाएगा। इस दौरान बकायादारों और पहले से काटे जा चुके बिजली कनेक्शनों की जांच की जाएगी। बिजली चोरी के मामले मिलने पर संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
FAQ
27 टीमों ने एक साथ की जांच
इस कार्रवाई के लिए बिजली कंपनी ने 27 अलग-अलग टीमें बनाई थीं। इनमें करीब 55 सहायक और कनिष्ठ अभियंता शामिल थे। इनके साथ बिजली लाइन पर काम करने वाले कर्मचारी भी मौजूद रहे।
जांच टीमों ने दोनों जिलों में कुल 187 परिसरों का निरीक्षण किया। इस दौरान 96 स्थानों पर नियमों के खिलाफ बिजली इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। यानी जांच किए गए आधे से ज्यादा परिसरों में गड़बड़ी मिली।
बिजली बिल नहीं भरा, फिर भी जला रहे थे बिजली
कई उपभोक्ताओं के स्मार्ट मीटर से बिजली सप्लाई रिमोट सिस्टम के जरिए बंद की गई थी। वहीं कुछ स्थानों पर विभाग ने लाइन से कनेक्शन काट दिया था। इसके बावजूद कई परिसरों में बिजली का इस्तेमाल जारी मिला। जांच के दौरान पता चला कि कुछ लोगों ने बिना बकाया रकम चुकाए खुद ही बिजली की सप्लाई शुरू कर ली थी।
कहीं मीटर बायपास, तो कहीं तार लगाकर बिजली चोरी
वहीं कुछ जगहों पर बिजली की एलटी लाइन से सीधे तार जोड़ दिए गए थे। इसे आम भाषा में हुकिंग कहा जाता है। इस तरीके से बिना वैध कनेक्शन के बिजली इस्तेमाल की जा रही थी।
बिजली कंपनी की टीमों ने इन गड़बड़ियों को मौके पर दर्ज किया। अधिकारियों ने पंचनामा तैयार किया और कार्रवाई के लिए जरूरी सबूत भी जुटाए।
बिजली चोरी करने वालों पर दर्ज होंगे मामले
बिजली कंपनी अब संबंधित मामलों को विशेष न्यायालय तक पहुंचाने की प्रक्रिया में जुटी है। जिन लोगों के खिलाफ बिजली चोरी के पर्याप्त सबूत मिलेंगे, उन्हें कानून के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, सभी 96 मामलों में एफआईआर दर्ज होने की अलग से पुष्टि नहीं हुई है। अभी विभाग ने कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी है।
छापेमारी के दौरान कई लोगों ने जमा किए बिजली बिल
इस योजना के जरिए पात्र उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के निपटारे की सुविधा दी जा रही है। बिजली कंपनी का उद्देश्य है कि उपभोक्ता नियमों के अनुसार अपना बकाया चुकाएं और वैध तरीके से बिजली का इस्तेमाल करें।
कटा हुआ कनेक्शन खुद जोड़ना पड़ सकता है भारी
ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे अपने बकाया बिल का भुगतान करें। बिजली कनेक्शन दोबारा चालू कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनाएं।
31 मार्च तक जारी रहेगा जांच अभियान
विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, यह विशेष अभियान 31 मार्च 2027 तक चलाया जाएगा। इस दौरान बकायादारों और पहले से काटे जा चुके बिजली कनेक्शनों की जांच की जाएगी। बिजली चोरी के मामले मिलने पर संबंधित उपभोक्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई कब शुरू हुई?
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने महासमुंद और गरियाबंद जिले में विशेष जांच अभियान के तहत बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई हाल ही में शुरू की है, और यह अभियान 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगा। - बिजली विभाग द्वारा की गई जांच में क्या पाया गया?
जांच के दौरान 187 परिसरों का निरीक्षण किया गया, जिसमें 96 स्थानों पर नियमों के खिलाफ बिजली इस्तेमाल करने की गड़बड़ी पाई गई, जिसमें अवैध कनेक्शन और मीटर बायपास शामिल थे। - अगर किसी उपभोक्ता का कनेक्शन कट गया है, तो वह फिर से बिजली कनेक्शन कैसे प्राप्त कर सकता है?
बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं को चेतावनी दी है कि कटे हुए कनेक्शन को खुद से जोड़ने की कोशिश न करें। उन्हें अपने बकाया बिल का भुगतान करना होगा और इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी।
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