3 हजार करोड़ का बिजली बिल बकाया, सरकारी दफ्तरों के कनेक्शन कटे

Harrison Masih | Aug 31, 2026, 10:34 IST
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सरकारी दफ्तरों पर बिजली बिल बकाया
सरकारी दफ्तरों पर बिजली बिल बकाया

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर 3 हजार 35 करोड़ रुपए से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है। प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू होने के बाद CSPDCL ने वसूली तेज कर दी है और 39 सरकारी संस्थानों के कनेक्शन काटे गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में 1 अगस्त 2026 से प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू होने के बाद पावर वितरण कंपनी ने बकाया वसूली की कार्रवाई तेज कर दी है। सरकारी विभागों पर जून 2026 तक कुल 3 हजार 35 करोड़ 37 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है।

इसमें से करीब 85 प्रतिशत यानी 2 हजार 582 करोड़ 74 लाख रुपए अकेले नगरीय प्रशासन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर बकाया है। वसूली के लिए कंपनी ने पानी के टैंकों, स्ट्रीट लाइट और पुलिस थानों से जुड़ी बिजली सुविधाओं के कनेक्शन काटने शुरू कर दिए हैं।

रायपुर समेत प्रदेश भर के दफ्तरों में बकाया चुकाने का दबाव बनाया गया है। इसमें हाईकोर्ट को भी कुछ बकाया चुकाने के लिए कहा गया था।

कोंडागांव में 39 दफ्तरों के कनेक्शन कटे

कोंडागांव जिले में सरकारी विभागों ने बिजली बिल का लगातार भुगतान नहीं किया, जिसके बाद बिजली विभाग ने शासकीय कार्यालयों और अन्य संस्थानों के कुल 7 करोड़ 33 लाख 82 हजार रुपए के बकाया बिजली बिल को लेकर सख्त कार्रवाई की।

सबसे ज्यादा बकाया अकेले नगर पालिका कोंडागांव पर है, जो करीब 5.2 करोड़ रुपए है। भुगतान न होने पर पुलिस, कोर्ट सहित जल संसाधन, राजस्व, वन, परिवहन, कृषि, न्यायालय, शिक्षा, आदिम जाति विभाग, पंचायत विभाग समेत कई शासकीय कार्यालयों के 39 संस्थानों के कनेक्शन काट दिए गए।

फिलहाल जनसुविधा को देखते हुए पंप हाउस और स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन चालू रखे गए हैं।

पंप हाउस और स्ट्रीट लाइट चालू रहेंगे

बिजली विभाग कोंडागांव के ईई (Executive Engineer) गोपेश्वर बोर्ड के मुताबिक जिले में फिलहाल लोगों की सुविधाओं को देखते हुए पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने पंप हाउस और स्ट्रीट लाइट के कनेक्शन चालू रखे गए हैं।

उनके मुताबिक बकाया राशि नहीं मिलने पर नियमानुसार आगे भी कार्रवाई होगी।

सबसे ज्यादा 1525 करोड़ नगरीय निकायों पर बकाया

पावर कंपनी ने प्रदेश के 65 उपभोक्ताओं के कनेक्शनों के लिए स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला किया है। विभागवार आंकड़ों के मुताबिक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के 19,060 कनेक्शनों पर सबसे ज्यादा 1525.18 करोड़ रुपए बकाया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 57,075 कनेक्शनों पर 1 हजार 57करोड़ 56 लाख रुपए, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के 482 कनेक्शनों पर 1 हजार 11 करोड़ 42 लाख रुपए और स्कूल शिक्षा विभाग के 36,304 कनेक्शनों पर करीब 84 करोड़ रुपए बकाया है।

इसके अलावा जल संसाधन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा महिला एवं बाल विकास विभाग सहित बाकी 32 विभागों पर भी करोड़ों रुपए का बकाया है। कुल मिलाकर प्रदेश भर में 1,57,341 कनेक्शनों पर 3 हजार 35 करोड़ 37 लाख रुपए बकाया है।

पुराने बकाया का चार किश्तों में भुगतान

नगरीय निकाय विभाग के सचिव ने सभी निकायों को चार समान किश्तों में बकाया चुकाने के निर्देश दिए हैं। प्रीपेड मीटर वाले उपभोक्ताओं का बकाया भुगतान भी इसी तरह समान किश्तों में किया जाएगा।

निर्देश में यह भी कहा गया है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों का वेतन समय पर मिले, इसके लिए बकाया चुकाना जरूरी बताया गया है।

क्या है नियम

सरकारी विभाग और स्थानीय निकाय भी आम उपभोक्ता की तरह ही बिजली कंपनी के उपभोक्ता माने जाते हैं। समय पर बिल न भरने पर विद्युत अधिनियम-2003 की धारा 56 और छत्तीसगढ़ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड के अध्याय-8 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

नियत तारीख तक पूरा बिल जमा नहीं करने पर 15 दिन का नोटिस देकर कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जा सकती है। इसके बाद अलग से किसी आदेश की जरूरत नहीं होती।

एमडी बोले, हर महीने देना होगा ब्यौरा

CSPDCL (Chhattisgarh State Power Distribution Company Limited) के एमडी भीम सिंह कंवर के मुताबिक नगरीय निकाय विभाग ने सभी निकायों से बकाया चार समान किश्तों में चुकाने और प्रीपेड बिजली व्यवस्था का पालन करने के लिए कहा है।

उनके मुताबिक सर्विसकर्मियों को भी बकाया चुकाने के लिए कहा गया है। हर महीने की 5 तारीख तक बकाया राशि, कनेक्शन भुगतान और निर्देशों के पालन का ब्यौरा देना जरूरी होगा।

सीएम बोले, निजीकरण की मंशा नहीं

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश में बिजली के निजीकरण को लेकर चल रही खबरों को खारिज किया है। उनके मुताबिक राज्य सरकार का बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है।

उनका आरोप है कि कांग्रेस जनता के बीच भ्रम और अफवाहें फैला रही है। उनके मुताबिक बिजली वितरण से जुड़े स्टाफ की चिंता निर्मूल है, कोई भी कर्मचारी नहीं हटाया जाएगा और सबकी सेवाएं सुरक्षित रहेंगी।

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