छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, सहायक प्राध्यापक भर्ती में दिव्यांग आरक्षण का अधिकार सरकार के पास
Krishna Kumar Sikander | Sept 02, 2025, 13:24 IST
Chhattisgarh High Court decision the sootr
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक भर्ती में दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि यह तय करना सरकार या नियुक्ति प्राधिकारी का अधिकार है
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक भर्ती में दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की मांग को लेकर दायर एक याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार या नियुक्ति प्राधिकारी को यह तय करने का पूर्ण अधिकार है कि किन पदों पर किस श्रेणी के दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए आरक्षण दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि नियोक्ता ही यह बेहतर ढंग से तय कर सकता है कि किसी पद की प्रकृति के लिए कौन सी दिव्यांग श्रेणी उपयुक्त है। साथ ही, चयन प्रक्रिया पूरी होने और असफल होने के बाद कोई अभ्यर्थी आरक्षण या रोस्टर को चुनौती नहीं दे सकता।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली या मुआवजा तय करने का कोई फार्मूला नहीं
मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (PSC) द्वारा 2019 में सहायक प्राध्यापक के 1384 पदों के लिए शुरू की गई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। इनमें वाणिज्य विषय के 184 पद शामिल थे। रायगढ़ निवासी सरोज क्षेमनिधि ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए 2% आरक्षण की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 14 मार्च 2019 को ऑनलाइन आवेदन जमा किया और नवंबर 2020 में लिखित परीक्षा पास की। इसके बाद साक्षात्कार में भी हिस्सा लिया, लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं हुआ। याचिका में दावा किया गया कि PSC ने वाणिज्य विषय में दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया।
यह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वाणिज्य के बैकलॉग पदों पर दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि श्रेणी के लिए आरक्षण लागू कर शुद्धिपत्र जारी किया जाए और इन पदों को भरने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बदले नियम... अब स्पीड पोस्ट से भेजे जाएंगे नोटिस और दस्तावेज
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का सख्त रुख: छात्राओं से बैड-टच करने वाले शिक्षक की अपील खारिज
राज्य सरकार और PSC की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि वाणिज्य और विज्ञान संकाय में कार्य की प्रकृति को देखते हुए दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षण देना संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि कला संकाय में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान पहले से मौजूद है, जबकि वाणिज्य विषय में एक हाथ और एक पैर की अक्षमता वाले दिव्यांगों के लिए आरक्षण लागू किया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि नियुक्ति प्राधिकारी को यह तय करने का अधिकार है कि कौन सी दिव्यांग श्रेणी किसी खास पद के लिए उपयुक्त है।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की एनटीपीसी सीपत के खिलाफ याचिका, याचिकाकर्ता पर 50 हजार का जुर्माना, सुरक्षा निधि जब्त
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति और पदों के लिए उपयुक्तता तय करना राज्य सरकार और नियुक्ति प्राधिकारी का विशेषाधिकार है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद रोस्टर या आरक्षण को चुनौती देना उचित नहीं है। इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि छत्तीसगढ़ में दिव्यांग आरक्षण के संबंध में नीति निर्धारण का अधिकार राज्य सरकार के पास रहेगा। यह निर्णय भविष्य में अन्य भर्ती प्रक्रियाओं में भी दिशानिर्देशक हो सकता है। हालांकि, यह फैसला उन दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए निराशाजनक हो सकता है, जो वाणिज्य जैसे विषयों में आरक्षण की उम्मीद कर रहे थे।
thesootr links
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट फैसला | सहायक प्राध्यापक भर्ती छत्तीसगढ़ | दृष्टिहीन आरक्षण | रमेश सिन्हा बीडी गुरु
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली या मुआवजा तय करने का कोई फार्मूला नहीं
याचिका में दृष्टिहीन उम्मीदवारों के लिए आरक्षण की मांग
याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने 14 मार्च 2019 को ऑनलाइन आवेदन जमा किया और नवंबर 2020 में लिखित परीक्षा पास की। इसके बाद साक्षात्कार में भी हिस्सा लिया, लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम शामिल नहीं हुआ। याचिका में दावा किया गया कि PSC ने वाणिज्य विषय में दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं किया।
यह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि वाणिज्य के बैकलॉग पदों पर दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि श्रेणी के लिए आरक्षण लागू कर शुद्धिपत्र जारी किया जाए और इन पदों को भरने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बदले नियम... अब स्पीड पोस्ट से भेजे जाएंगे नोटिस और दस्तावेज
वकील ने छोड़ा साथ, याचिकाकर्ता ने खुद की पैरवी सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने केस से अपना नाम वापस ले लिया, जिसके बाद सरोज क्षेमनिधि ने खुद अपनी पैरवी की। उन्होंने तर्क दिया कि 1384 पदों में से 2% आरक्षण दृष्टिहीन और अल्प दृष्टि वाले उम्मीदवारों के लिए सुनिश्चित किया जाना चाहिए था। उन्होंने PSC के 23 फरवरी 2019 के संशोधन आदेश को भी चुनौती दी, जिसमें शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवारों के लिए पदों की संख्या में बदलाव किया गया था।
कार्य की प्रकृति के आधार पर आरक्षण
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की एनटीपीसी सीपत के खिलाफ याचिका, याचिकाकर्ता पर 50 हजार का जुर्माना, सुरक्षा निधि जब्त
सरकार को नीति निर्धारण का अधिकार
फैसले का प्रभाव
thesootr links
- मध्य प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃 🤝💬👩👦👨👩👧👧
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट फैसला | सहायक प्राध्यापक भर्ती छत्तीसगढ़ | दृष्टिहीन आरक्षण | रमेश सिन्हा बीडी गुरु
MPPSC असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती 2022: हाईकोर्ट ने एप्लाइड डिग्री को माना वैध, नियुक्ति का रास्ता साफ
By Neel Tiwari
कांग्रेस समाज में फूट डालकर सत्ता की लूट करना चाहती है, सुधांशु बोले, भूपेश बघेल को पंजाब से भगाकर गुवाहाटी में पटका
By Arun Tiwari
मंत्रालय से बाहर फिर हो सकती है मोहन कैबिनेट की बैठक, गांधी सागर में 17 नवंबर की तारीख प्रस्तावित
By Amresh Kushwaha
अफसरों की गलती से मध्यप्रदेश के युवाओं की नौकरी पर संकट! कहीं मान्य, कहीं अमान्य जाति प्रमाणपत्र, आखिर जिम्मेदार कौन?
By Atul Dwivedi
शिखर अग्रवाल मामले में गहलोत की CBI-ED जांच की मांग, CM भजनलाल से पूछा- चुप क्यों हैं?
By Mukesh Sharma
बीजेपी विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा का निधन, हैदराबाद में चल रहा था इलाज, लंबे समय से थे बीमार
By Harrison Masih
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में EWS आरक्षण पर HC सख्त, केंद्र से MP सरकार तक पर लटकी अवमानना की तलवार
By Neel Tiwari