शराब घोटाला मामले में सौम्या चौरसिया को नहीं मिली जमानत, चैतन्य की जमानत का आधार बना मांगी थी राहत

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।

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VINAY VERMA
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  • शराब घोटाला मामले में सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से झटका, अग्रिम जमानत खारिज
  • चैतन्य बघेल की जमानत का हवाला कोर्ट में नहीं आया काम
  • ईओडब्ल्यू–एसीबी ने निभाई अहम भूमिका, कोर्ट में किया कड़ा विरोध
  • 3200 करोड़ से अधिक के घोटाले में अहम भूमिका का आरोप
  • कोयला घोटाला मामले में पहले से आरोपी, मुश्किलें और बढ़ीं

News in Details

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रह चुकीं सौम्या चौरसिया को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से न सिर्फ सौम्या चौरसिया की उम्मीदों पर पानी फिर गया, बल्कि उन पूर्व अधिकारियों और पूर्व आबकारी मंत्री में भी निराशा है, जो इस मामले में राहत की आस लगाए बैठे थे।

चैतन्य की जमानत थी आधार

सौम्या चौरसिया ने अपनी याचिका में चौतन्य बघेल को मिली जमानत को आधार बनाते हुए कोर्ट से जमानत की मांग की थी। हालांकि, एसीबी और ईओडब्ल्यू ने उनकी याचिका का कड़ा विरोध किया। जांच एजेंसियों ने कोर्ट को बताया कि सौम्या चौरसिया की भूमिका घोटाले में अहम रही है और वह जांच को प्रभावित कर सकती हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार

मामले से जुड़े घटनाक्रम के अनुसार, 16 दिसंबर को ईडी ने सौम्या चौरसिया को पूछताछ के लिए तलब किया था। लंबी पूछताछ के बाद उसी शाम उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। अब बुधवार को उन्हें संबंधित कोर्ट में पेश किया जाएगा। जांच एजेंसियों ने शराब घोटाले में गंभीर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लगाया है और इस मामले को राज्य के अब तक के सबसे बड़े घोटालों में से एक बताया है।

3200 करोड़ से अधिक का घोटाला

ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा दर्ज एफआईआर में करीब 3200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख किया गया है। एजेंसियों का दावा है कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह पूरा सिंडिकेट सक्रिय था। जांच में सामने आया है कि आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के तत्कालीन एमडी ए.पी. त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित गठजोड़ के जरिए शराब नीति में हेरफेर कर अवैध कमाई की गई। इसी सिंडिकेट के जरिए शराब की बिक्री, कमीशन और सप्लाई के पूरे तंत्र को नियंत्रित किया गया। पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा भी इस घोटाले के आरोपी हैं, और वे लंबे समय से जेल में हैं। 

कोयला घोटाला मे भी आरोपी हैं सौम्या

सौम्या चौरसिया पहले से ही कोयला घोटाला मामले में भी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं। उस मामले में उन्हें मई महीने में सुप्रीम कोर्ट से सशर्त राहत मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देते समय यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि वे राज्य से बाहर रहेंगी और जांच में पूरा सहयोग करेंगी। उस आदेश के बावजूद अब शराब घोटाला मामले में उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

अन्य नाम आने की चर्चा

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले को जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे शराब घोटाले की जांच को और गति मिलेगी और आने वाले दिनों में कई और बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है। वहीं, राजनीतिक गलियारों में भी इस फैसले के मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर पिछली सरकार के कार्यकाल से जुड़ा हुआ है।

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