छत्तीसगढ़ कर्मचारी संघ की मुख्य सचिव को चिट्ठी, कहा-महिला सशक्तिकरण पर ध्यान दें, व्यवसायिक संस्था की कैंटीन मंजूर नहीं
VINAY VERMA | May 01, 2026, 17:29 IST
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छत्तीसगढ़ मंत्रालय में नई कैंटीन व्यवस्था का विरोध शुरू हो गया है। कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी जाए और व्यवसायिक निजी संस्था की कैंटीन को मंजूरी न दी जाए।
Raipur। द सूत्र के खुलासे के बाद छग मंत्रालयीन कर्मचारी संघ ने कैंटीन की नई व्यवस्था का विरोध करना शुरु कर दिया है। कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखते हुए स्पष्ट किया है
कि महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए। व्यवसायिक निजी संस्था की कैंटीन उन्हें मंजूर नहीं है। संघ ने कहा है कि प्रदेश के कई
कार्यालयों में महिलाओं द्वारा ही कैंटीन चलाया जा रहा है। यहां भी व्यवसायिक निजी संस्था की जगह महिला समूहो द्वारा कैंटीन का संचालन चाहिए।
बता दें कि द सूत्र ने 28 अप्रैल को छग मंत्रालय में 27 रुपए का डोसा मिलेगा 100 रुपए में, सरकार ने खत्म कर दी डेढ़ करोड़ की सब्सिडी शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी।
जिसमें बताया गया कि कर्मचारी संघ तत्कालीन कैंटीन के व्यवस्था को और दुरुस्थ करने की मांग की थी। जिस आधार पर मुख्य सचिव ने इंडियन कॉफी हाउस का टेंडर रिनुअल करने से मना कर दिया।
इतना ही नहंी सब्सिडी भी बंद कर दिया। नया टेंडर कर रायपुर की टिप्सी इवेंट नाम की कंपनी को काम दे दिया गया। खुलासे के बाद कर्मचारी आक्रेाशित हैं। और वे इस व्वयस्था को कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध कर रहे हैं।
छग मंत्रालय कर्मचारी संघ ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कर्मचारियों के हित की मंशा पर सवाल उठाया है। कर्मचारी संघ ने कहा है
कि पूर्व मुख्य सचिव आरपी मंडल के आदेश से मंत्रालय के गेट-डी पर दाल-भात केंद्र खुलवाया गया था जिसे बंद कर दिया गया।
इसके अलावा गढ़कलेवा को भी बिना कर्मचारियों के चर्चा के हटवा दिया गया। संघ ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि कर्मचारियों को मजबूर किया जा रहा है कि कर्मचारियों को महंगे दर पर खाना खाएं, नाश्ता करें।
संघ ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ अधिकारी-कर्मचारियों के नाश्ता-खाने का भुगतान शासन करती है। जबकि कर्मचारियों को खुद ही पैसा देना होता है।
ऐसे में महिला समूहों के उचित रेट वाली कैंटीन का ही संचालन जरुरी है। इसलिए इस ठेका कंपनी के टेंडर को निरस्त कर दिया जाए।
बता दें कि मंत्रालय के इस नए टेंडर से कर्मचारियों को महंगे रेट पर खाने का सामान मिलेगा। पिछले 27 सालों से मंत्रालय में इंडियन कॉफी हॉउस द्वारा कैटीन संचालित की जा रही थी।
जहां बेहद किफायती दर पर नाश्ता और खाना मिलता था। अधिकारियों का तर्क था कि यह सरकार के सब्सिडी के बाद संभव होता था।
संघ ने यही तो बड़ा सवाल पूछा है कि सरकार बड़े अधिकारियों के नाश्ता-खाने का पूरा भुगतान करती है। क्या यह सब्सिडी केवल कर्मचारियेां और छोटे अधिकारियों के लिए किया गया है?
बता दें कि छत्तीसगढ़ मंत्रालय में इंडियन कॉफी हाउस की कैंटीन व्यवस्था 26 साल से जारी थी। जिसमें 27 रूपए का डोसा, 6 रुपए का समोसा, 10 रुपए की कॉफी, 5 रुपए की चाय मिलती थी।
लेकिन शासन ने कॉफी का टेंडर आगे नहीं बढ़ाया। नए टेंडर में 6 कंपनियां आई जिसमें से रायपुर की टिप्सी इवेंट्स को तीन साल के लिए वर्क ऑर्डर दे दिया गया। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था में खाने-पीने के सामान दोगुने से अधिक कीमत पर मिलेंगे।
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में 27 का डोसा मिलेगा 100 रूपए में, सरकार ने खत्म की डेढ़ करोड़ की सब्सिडी
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कि महिला सशक्तिकरण पर ध्यान देना चाहिए। व्यवसायिक निजी संस्था की कैंटीन उन्हें मंजूर नहीं है। संघ ने कहा है कि प्रदेश के कई
कार्यालयों में महिलाओं द्वारा ही कैंटीन चलाया जा रहा है। यहां भी व्यवसायिक निजी संस्था की जगह महिला समूहो द्वारा कैंटीन का संचालन चाहिए।
द सूत्र की खबर का असर
जिसमें बताया गया कि कर्मचारी संघ तत्कालीन कैंटीन के व्यवस्था को और दुरुस्थ करने की मांग की थी। जिस आधार पर मुख्य सचिव ने इंडियन कॉफी हाउस का टेंडर रिनुअल करने से मना कर दिया।
इतना ही नहंी सब्सिडी भी बंद कर दिया। नया टेंडर कर रायपुर की टिप्सी इवेंट नाम की कंपनी को काम दे दिया गया। खुलासे के बाद कर्मचारी आक्रेाशित हैं। और वे इस व्वयस्था को कर्मचारी विरोधी बताते हुए विरोध कर रहे हैं।
संघ के पत्र में उठा मंशा पर सवाल
कि पूर्व मुख्य सचिव आरपी मंडल के आदेश से मंत्रालय के गेट-डी पर दाल-भात केंद्र खुलवाया गया था जिसे बंद कर दिया गया।
इसके अलावा गढ़कलेवा को भी बिना कर्मचारियों के चर्चा के हटवा दिया गया। संघ ने कहा है कि ऐसा लग रहा है कि कर्मचारियों को मजबूर किया जा रहा है कि कर्मचारियों को महंगे दर पर खाना खाएं, नाश्ता करें।
रोक लगाने की मांग
ऐसे में महिला समूहों के उचित रेट वाली कैंटीन का ही संचालन जरुरी है। इसलिए इस ठेका कंपनी के टेंडर को निरस्त कर दिया जाए।
कर्मचारियो पर आर्थिक बोझ
जहां बेहद किफायती दर पर नाश्ता और खाना मिलता था। अधिकारियों का तर्क था कि यह सरकार के सब्सिडी के बाद संभव होता था।
संघ ने यही तो बड़ा सवाल पूछा है कि सरकार बड़े अधिकारियों के नाश्ता-खाने का पूरा भुगतान करती है। क्या यह सब्सिडी केवल कर्मचारियेां और छोटे अधिकारियों के लिए किया गया है?
अभी नहीं मिलेगा 27 रुपए का डोसा
लेकिन शासन ने कॉफी का टेंडर आगे नहीं बढ़ाया। नए टेंडर में 6 कंपनियां आई जिसमें से रायपुर की टिप्सी इवेंट्स को तीन साल के लिए वर्क ऑर्डर दे दिया गया। बताया जा रहा है कि नई व्यवस्था में खाने-पीने के सामान दोगुने से अधिक कीमत पर मिलेंगे।
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