छत्तीसगढ़ नान घोटाला: 4 साल बाद हाईकोर्ट ने सुनाया ये फैसला, जनहित याचिकाएं खारिज
Harrison Masih | Oct 10, 2025, 16:10 IST
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 के चर्चित नान घोटाले की सीबीआई जांच की मांग वाली सभी जनहित याचिकाओं को निरस्त कर दिया। 10 साल पुराने मामले में अब जांच एजेंसी बदलने की मांग को उचित नहीं माना गया।
Raipur. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 में सामने आए चर्चित नान घोटाले (CG NAN Scam) से संबंधित सीबीआई जांच की मांग वाली सभी जनहित याचिकाओं को निराकृत कर दिया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि यह मामला 10 साल से अधिक पुराना है और अब जांच एजेंसी बदलने की मांग उचित नहीं है।
शुक्रवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस पीपी साहू की विशेष डिवीजन बेंच में 8 याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिकाओं के कारण पिछले लगभग 4 साल से इन याचिकाओं की सुनवाई नहीं हो पा रही थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने देखा कि केवल दो जनहित याचिकाओं के अधिवक्ता या याचिकाकर्ता ही अदालत में उपस्थित थे, बाकी की तरफ से कोई उपस्थित नहीं हुआ।
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क्या है
नान घोटाला छत्तीसगढ़ के PDS (जन वितरण प्रणाली) और राशन वितरण में हुई अनियमितताओं से जुड़ा था। एसीबी की चार्जशीट के अनुसार, नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) जिम्मेदार था कि राज्य में राशन और अन्य आवश्यक सामान का प्रोक्योरमेंट और वितरण करे। 55 लाख परिवारों के लिए 70 लाख राशन कार्ड बनाए गए, जिससे हजारों करोड़ रुपए का राशन अफरा-तफरी हुआ। आदिवासी इलाकों में सप्लाई किए गए आयोडाइज्ड नमक में कांच के टुकड़े पाए गए।
एसीबी ने 27 जिला प्रबंधकों और कई उच्च पदस्थ अधिकारियों को अभियुक्त नहीं बनाया। कई लोक सेवकों से पूछताछ नहीं की गई, जबकि उनके पास घोटाले के पुख्ता सबूत मौजूद थे। मुख्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी में भी विलंब हुआ।
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2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद एसआईटी जांच हुई। भाजपा नेता धरमलाल कौशिक और विक्रम उसेंडी ने सीबीआई जांच के खिलाफ विरोध जताया। सुप्रीम कोर्ट में ईडी की याचिकाओं के निराकरण के बाद ही हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई का रास्ता साफ हुआ।
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मामले में अब विचारण अंतिम चरण में है। जिन व्यक्तियों का चालान हुआ है या विचारण चल रहा है, उनके खिलाफ कोई रोक नहीं है। बेंच ने कहा कि अब जांच एजेंसी बदलने की मांग उचित नहीं है, और मामले को स्थानीय न्यायालय में धारा 319 के तहत आवेदन देकर आगे बढ़ाया जा सकता है। यह रिपोर्ट छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया के बीच नान घोटाले के लंबे और जटिल इतिहास को विस्तार से दर्शाती है।
सुनवाई का विवरण
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मुख्य फैसले और आदेश
भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक द्वारा लगाई गई एसआईटी जांच के खिलाफ याचिका को हाईकोर्ट ने वापस लेने की अनुमति दी। बेंच ने कहा कि जिन लोगों के खिलाफ एसीबी ने चालान पेश नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए विचारण न्यायालय में धारा 319 का आवेदन किया जा सकता है। सभी जनहित याचिकाएं खारिज कर दी गईं क्योंकि मामला अब अंतिम चरण में है और जांच एजेंसी बदलना उचित नहीं माना गया।
क्या है नान घोटाला ?
जांच में अनियमितताएं
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इस मामले को 3 पॉइंट्स में समझें
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राजनीतिक विरोध और सुप्रीम कोर्ट की रोक
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अगले कदम
FAQ
- हाईकोर्ट ने नान घोटाले की CBI जांच याचिकाओं को क्यों खारिज किया?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 2015 के नान घोटाले की जनहित याचिकाओं को खारिज किया क्योंकि मामला 10 साल से अधिक पुराना है और अब जांच एजेंसी बदलना उचित नहीं माना गया। - नान घोटाला क्या है ?
नान घोटाला छत्तीसगढ़ के PDS (जन वितरण प्रणाली) और राशन वितरण में हुई अनियमितताओं से जुड़ा था। आरोप हैं कि 55 लाख परिवारों के लिए 70 लाख राशन कार्ड बनाए गए, और आदिवासी इलाकों में घटिया क्वालिटी का आयोडाइज्ड नमक सप्लाई किया गया।
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