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NEWS IN SHORT
. धान खरीदी की अंतिम तारीख 31 जनवरी
. धान खरीदी के तीन दिन शेष
. तीन लाख किसान धान नहीं बेच पाए
. टारगेट से 30 लाख मीट्रिक टन धान अभी कम
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को लेकर सरकार भले ही रिकॉर्ड का दावा कर रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे अलग तस्वीर दिखा रही है।
प्रदेश में अब भी करीब तीन लाख पंजीकृत किसान ऐसे हैं, जिनका धान खरीदा नहीं जा सका है। जबकि धान खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी तय है और अब गिनती के दिन ही शेष बचे हैं।
प्रदेश में 15 नवंबर से 2740 उपार्जन केंद्रों के जरिए धान खरीदी चल रही है। विपणन वर्ष 2025-26 के लिए धान बेचने को 26.49 लाख से अधिक किसानों ने पंजीयन कराया है।
इनमें से करीब 23.48 लाख किसानों ने धान बेच दिया है। इस तरह करीब 3 लाख किसान ऐसे हैं, जिनका धान अभी तक नहीं बिक पाया है।
धान की बंपर पैदावार :
इस साल कुल 28.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल हुई है। 3 दिनों में 1.5 लाख किसान और धान बेच सकते हैं।
खाद्य विभाग के मुताबिक आगामी तीन दिनों में लगभग 1.5 लाख और किसान धान विक्रय के लिए उपार्जन केंद्रों पर पहुंच सकते हैं।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम कहते हैं कि किसानों को असुविधा न हो, इसके लिए टोकन जारी किए जा रहे हैं। किसानों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है।
कृषि विभाग के मुताबिक अब तक 7.70 लाख से अधिक टोकन जारी किए जा चुके हैं और प्रतिदिन औसतन 22 हजार टोकन जारी हो रहे हैं। इसके बावजूद अंतिम दिनों में खरीदी पूरी हो पाएगी या नहीं, इस पर असमंजस बना हुआ है।
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इन जिलों में बफर स्टॉक लिमिट से ज्यादा :
बस्तर के 79 खरीदी केंद्र हैं, सभी में लिमिट बफर स्टॉक से ज्यादा है। इसी तरह दंतेवाड़ा के सभी 15 केंद्र, बीजापुर के 30 में से 26 केंद्र, कांकेर के 149 में से 134, कोंडागांव के 67 में से 65, नारायणपुर के 17 में से 16, सुकमा के 25 में से 24, बालोद के 143 में से 117, राजनांदगांव के 96 में से 86, मोहला-मानपुर के सभी 27 केंद्रों में धान बफर स्टॉक से ज्यादा है।
फैक्ट फिगर :
कुल पंजीकृत किसान : करीब 27 लाख
इतने किसानों ने बेचा : 24 लाख
कुल खरीदी : 129 लाख टन
कितना भुगतान : 29,597 करोड़ रुपए
कुल खरीदी केंद्र : 2740
Sootr Knowledge:
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी (paddy procurement) की जा रही है। यह खरीदी 15 नवंबर से शुरु हुई है जो 31 जनवरी तक चलेगी। यहां 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जा रहा है।
यहां किसान ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराता है। पटवारी, कृषि विभाग जमीन का सत्यापन करते हैं। हर किसान को उसकी समिति से जोड़ा जाता है। टोकन कटता है और उसी टोकन से धान बेचा जाता है
Imprtent Points :
- 27 लाख पंजीकृत किसानों में से करीब 3 लाख किसान अब तक धान नहीं बेच पाए, जबकि खरीदी की अंतिम तिथि 31 जनवरी है।
- अब तक 24 लाख किसानों से 129 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है और 29,597 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।
- प्रदेश में 2740 उपार्जन केंद्रों और टोकन सिस्टम के बावजूद अंतिम दिनों में अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
- धान खरीदी की समय-सीमा बढ़ाने की मांग तेज, कृषि मंत्री ने मुख्यमंत्री से चर्चा की, लेकिन अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं।
- समयावधि नहीं बढ़ी तो हजारों किसानों का धान एमएसपी से बाहर होने और इसे मजबूरी में कम दाम पर बेचने का खतरा।
अब आगे क्या :
31 जनवरी की डेडलाइन नज़दीक आते ही उपार्जन केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ेगी होगी। टोकन होने के बावजूद कई केंद्रों पर अव्यवस्था हो सकती है।
यदि अंतिम 2–3 दिनों में बड़ी संख्या में किसान धान नहीं बेच पाए, तो सरकार तारीख बढ़ा सकती है। सरकार ने किसानों से धान का एक एक दाना खरीदने का वादा किया है।
निष्कर्ष :
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के आंकड़े भले ही रिकॉर्ड बनाए जा रहे हों, लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि करीब तीन लाख पंजीकृत किसान अब भी सरकारी व्यवस्था से बाहर खड़े हैं।
टोकन सिस्टम, उपार्जन केंद्रों की संख्या और भुगतान के दावे किसानों की समस्या पूरी तरह हल नहीं कर पाए हैं। वहीं इससे नाराज किसान आंदोलन करने पर आमादा हैं।
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