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NEWS IN SHORT
- सरकार दिखा रही गायों को ठेंगा
- छत्तीसगढ़ में 1 लाख 85 हजार गायें बेसहारा
- सरकार के पास सिर्फ तीन गौधाम
- इनमें 620 गायें रखने का इंतजाम
NEWS IN DETAIL
कागज़ों में सिमटी गौधाम योजना :
छत्तीसगढ़ में गौवंश संरक्षण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं। सत्ता में आते ही गौमाता की चिंता करने वाली छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा अब सवालों के घेरे में है। सड़कों पर घूमती बेसहारा गायें, बढ़ते हादसे और खेतों की रखवाली करते किसान इन सबके बीच सरकार की गौधाम योजना कागज़ों से बाहर आती नहीं दिख रही।
राज्य में इस वक्त करीब 1 लाख 84 हजार 993 गौवंश सड़कों पर बेसहारा घूम रहे हैं। राजधानी रायपुर से लेकर छोटे कस्बों तक बेसहारा गायों की भरमार है। हाइवे समेत शहर की सड़कें गायों से भरी पड़ी हैं। सरकार ने इस समस्या के समाधान के तौर पर गौधाम बनाने की घोषणा की थी। लेकिन दो साल बीतने के बाद भी सरकार के पास तीन ही गौधाम हैं।
दो साल में सिर्फ तीन गौधाम :
बीजेपी सरकार बने हुए दो साल बीत गए हैं। लेकिन इन दो सालों में सरकार के पास सिर्फ तीन गौधाम ही संचालित हैं। इन गौधामों में महज 620 गायों को रखने की ही क्षमता है। यानी औसतन एक गौधाम में 200 से भी कम गायें रह रही हैं। सरकार की तरफ से यह भी बताया गया है कि 11 गोठानों को गौधाम में तब्दील करने के लिए रजिस्ट्रेशन किया गया है। इनकी कुल क्षमता करीब 2200 पशु रखने की है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इन दो सालों में इन गौधामों पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया।
बेसहारा गाय-किधर जाए :
छत्तीसगढ़ में बेसहारा गौवंश - 1 लाख 84 हजार 993
वर्तमान में तीन गौधाम ही संचालित
इनकी क्षमता 620 पशु रखने की
11 गोठान को गौधाम के रुप में पंजीकृत किया गया है
इनकी क्षमता 2200 पशु है।
तीन सालों में गौधामों को कोई राशि नहीं दी गई
बेसहारा पशुओं से कोई हादसे नहीं :
पशुपालन मंत्री कहते हैं कि बेसहारा पशुओं से पिछले दो साल में कोई सड़क हादसा नहीं हुआ है। वे यह भी कहते हैं कि इनसे फसलों को भी नुकसान नहीं हो रहा। जमीनी सच्चाई ये है कि रायपुर-बिलासपुर, रायपुर–जगदलपुर और रायपुर–महासमुंद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों के कारण रोजाना हादसे हो रहे हैं। पिछले दो साल में सड़क हादसे में लोगों की जानें गई हैं। इनमें से कई सड़क हादसे बेसहारा पशुओं की वजह से हुए हैं। वहीं हादसों में पशु भी घायल हो रह हैं।
साल 2024 में सड़क हादसे :
सड़कों पर लगभग 14,853 दुर्घटनाएँ हुईं।
इनमें लगभग 6,752 लोग अपनी जान गंवा बैठे।
लगभग 12,573 लोग घायल हुए।
साल 2023 में सड़क हादसे :
सड़कों पर लगभग 13,468 दुर्घटनाएँ हुईं।
इनमें लगभग 6,166 मौतें हुईं।
घायल लोगों की संख्या लगभग 11,723 थी।
गौ संवर्धन बोर्ड का दावा :
गौ संवर्धन बोर्ड कहता है कि राज्य में कई गौशालाएं हैं। इन गौशालों को सरकार की तरफ से मदद दी जा रही है। एक गाय को 35 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से खुराक का पैसा दिया है।
छत्तीसगढ़ में इतनी गौशालाएं :
135 पंजीकृत गौशालाएं
54 अपंजीकृत गौशालाएं
कुल 189 गौशलाएं
साल 2024-25 में 19 करोड़ 22 लाख रुपए दिए गए।
Sootr Knowledge :
गायों का बेसहारा होना सबसे बड़ी समस्या के रुप में सामने आ रहा है। पशुपालक गायों को पालते हैं लेकिन वे जब तक दूध देती हैं तब तक तो उनको अपने पास रखते हैं। जैसे ही वे दूध देना बंद कर देती हैं वैसे ही उनको सड़कों पर छोड़ देते हैं। वहीं बछड़ों का होना भी सड़कों पर गौवंश की संख्या बढ़ा रहा है। बछड़े आगे काम में नहीं आते इसलिए उनको बेसहारा छोड़ दिया जाता है। यही बेसहारा पशु सड़कों पर हादसों का कारण बनते हैं जिनमें उनकी भी मौत होती है और लोग भी मौत का शिकार बनते हैं।
Important Points :
. बेसहारा पशुओं की बढ़ती संख्या
. सरकार के पास गौधामों की भारी कमी
. अधिकांश हादसे पशुओं की वजह से
. हाइवे से लेकर शहर की सड़कों तक पर बेसहारा पशु
आगे क्या :
छत्तीसगढ़ गौधाम योजना (CG Gaudham Scheme) को कागज़ों से बाहर निकालकर ज़मीन पर उतारना अब सरकार की सबसे बड़ी चुनौती है। सरकार को इसके लिए पर्याप्त बजट रखना होगा। सरकार कहती है कि गौधामों की संख्या तेजी से बढ़ाई जाएगी और गौ अभ्यारण्य भी बनाए जाएंगे। इससे गौमाता सड़कों पर नहीं घूमेगी और उसे पर्याप्त खुराक भी मिलेगी।
निष्कर्ष :
प्रदेश में बीजेपी की सरकार खुद को गौवंश हितैषी बताती है। लेकिन आंकड़े इस दावे को नकारते नजर आते हैं। दो सालों में गौधामों की संख्या तो बढ़ी नहीं उल्टे पिछली सरकार में संचालित गौठान बंद कर दिए गए। जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल हो सकती है। सड़कों पर बढ़ती गायें न सिर्फ हादसों का कारण बनेंगी, बल्कि फसलों को भी बड़े पैमाने पर नुकसान होगा।
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