छत्तीसगढ़ में बदल सकता है चुनावी गणित, विधानसभा की 135 सीटों में से 45 महिलाओं के लिए हो सकती हैं आरक्षित
Umeshwari Baghel | Oct 20, 2026, 16:32 IST
छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा बदलाव
Women Reservation Bill : छत्तीसगढ़ की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। परिसीमन के जरिए विधानसभा सीटों की संख्या 90 से बढ़कर 135 होने की संभावना जताई जा रही है। अगर ऐसा होता है और महिला आरक्षण के प्रावधान लागू होते हैं, तो इनमें से 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
इससे भाजपा-कांग्रेस समेत सभी राजनीतिक दलों का चुनावी गणित बदल सकता है। हालांकि, अभी यह संभावित आंकड़ा है। अंतिम फैसला कानूनी प्रावधानों और परिसीमन की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
छत्तीसगढ़ में फिलहाल विधानसभा की 90 सीटें हैं। परिसीमन को लेकर चल रही चर्चाओं में सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की संभावना सामने आई है। अगर इसी आधार पर फैसला होता है, तो प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या 135 तक पहुंच सकती है।
इसका मतलब है कि राज्य में 45 अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्र बन सकते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सभी नए क्षेत्र पूरी तरह अलग बनाए जाएं। परिसीमन के दौरान मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में भी बदलाव हो सकता है।
महिला आरक्षण कानून में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की लगभग एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है।
अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा में सीटों की संख्या 135 होती है, तो इसका एक-तिहाई 45 होगा। यानी प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर 45 विधानसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
अगर प्रदेश में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ती है, तो इसका सीधा असर राजनीतिक दलों की चुनावी तैयारियों पर पड़ेगा। भाजपा और कांग्रेस को नए विधानसभा क्षेत्रों में अपना संगठन मजबूत करना होगा। इसके साथ ही उम्मीदवारों के चयन में भी बदलाव करना पड़ सकता है।
महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होने पर राजनीतिक दलों को उन क्षेत्रों में महिला उम्मीदवार उतारने होंगे। ऐसे में कई मौजूदा नेताओं की सीटों और टिकट की दावेदारी पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, सक्रिय महिला नेताओं और राजनीति में आने की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
परिसीमन लागू होने पर छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में विधानसभा क्षेत्रों का स्वरूप बदल सकता है। रायपुर, दुर्ग और दूसरे शहरी क्षेत्रों में जनसंख्या के आधार पर नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जाने की संभावना पर चर्चा हो सकती है।
वहीं, बस्तर और सरगुजा जैसे इलाकों में भी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं की समीक्षा हो सकती है। हालांकि, किस जिले में कितनी सीटें बढ़ेंगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह परिसीमन के लिए तय होने वाले आधार और प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं बदलने से मौजूदा विधायकों की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। संभव है कि किसी विधायक के मौजूदा क्षेत्र के कुछ हिस्से दूसरे विधानसभा क्षेत्र में शामिल हो जाएं।
वहीं, कुछ क्षेत्रों को मिलाकर या बांटकर नए निर्वाचन क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में नेताओं को अपने जनाधार और चुनावी रणनीति पर दोबारा काम करना पड़ सकता है। महिला आरक्षण लागू होने पर कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के समीकरण भी बदलेंगे।
परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य सुशील त्रिवेदी के मुताबिक, विधानसभा सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी की बात सामने आई है। इसके साथ ही 2011 की जनगणना को आधार बनाने का उल्लेख भी चर्चा में है।
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि विधेयक के प्रावधान तय होने और विधायी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार, परिसीमन किस आधार पर किया जाएगा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या कैसे तय होगी, यह संबंधित प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा।
महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटों का आरक्षण जनगणना के संबंधित आंकड़े प्रकाशित होने के बाद होने वाले परिसीमन से जुड़ा है।
इसलिए केवल सीटों की संख्या बढ़ने से महिला आरक्षण अपने आप लागू नहीं हो जाएगा। इसके लिए जरूरी कानूनी शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी होना भी आवश्यक है।
एक बात यह भी समझना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा 90 विधानसभा सीटों में महिलाओं के लिए अलग से 19 सीटें आरक्षित नहीं हैं।महिला विधायकों की संख्या और महिलाओं के लिए कानूनी रूप से आरक्षित सीटें दो अलग बातें हैं।
छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लेकर अभी कई सवालों के जवाब सामने आने बाकी हैं।
सबसे बड़ा सवाल है कि परिसीमन में किस जनगणना को आधार बनाया जाएगा और सीटों की संख्या बढ़ाने का अंतिम फार्मूला क्या होगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों का निर्धारण किस तरह किया जाएगा, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
फिलहाल 90 से 135 सीटें और उनमें से 45 सीटों पर महिला आरक्षण का आंकड़ा संभावित गणना के आधार पर सामने आया है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ चुनावी समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
FAQ
90 से बढ़कर 135 हो सकती हैं विधानसभा सीटें
इसका मतलब है कि राज्य में 45 अतिरिक्त विधानसभा क्षेत्र बन सकते हैं। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि सभी नए क्षेत्र पूरी तरह अलग बनाए जाएं। परिसीमन के दौरान मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं में भी बदलाव हो सकता है।
महिलाओं के लिए कैसे निकल रहा 45 सीटों का आंकड़ा?
अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा में सीटों की संख्या 135 होती है, तो इसका एक-तिहाई 45 होगा। यानी प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर 45 विधानसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।
इसका गणित इस तरह समझिए।
- वर्तमान विधानसभा सीटें : 90
- संभावित बढ़ोतरी : 45 सीटें
- कुल संभावित सीटें : 135
- एक-तिहाई महिला आरक्षण : 45 सीटें
भाजपा और कांग्रेस को बदलनी पड़ सकती है रणनीति
महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित होने पर राजनीतिक दलों को उन क्षेत्रों में महिला उम्मीदवार उतारने होंगे। ऐसे में कई मौजूदा नेताओं की सीटों और टिकट की दावेदारी पर भी असर पड़ सकता है। वहीं, सक्रिय महिला नेताओं और राजनीति में आने की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।
रायपुर से बस्तर तक बदल सकती हैं विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं
वहीं, बस्तर और सरगुजा जैसे इलाकों में भी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं की समीक्षा हो सकती है। हालांकि, किस जिले में कितनी सीटें बढ़ेंगी, इसे लेकर अभी कोई अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह परिसीमन के लिए तय होने वाले आधार और प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
मौजूदा विधायकों के सामने भी आ सकती है चुनौती
वहीं, कुछ क्षेत्रों को मिलाकर या बांटकर नए निर्वाचन क्षेत्र बनाए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में नेताओं को अपने जनाधार और चुनावी रणनीति पर दोबारा काम करना पड़ सकता है। महिला आरक्षण लागू होने पर कुछ सीटों पर उम्मीदवारों के समीकरण भी बदलेंगे।
परिसीमन आयोग के पूर्व सदस्य ने क्या कहा?
हालांकि, उन्होंने साफ किया कि विधेयक के प्रावधान तय होने और विधायी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उनके अनुसार, परिसीमन किस आधार पर किया जाएगा और विधानसभा क्षेत्रों की संख्या कैसे तय होगी, यह संबंधित प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा।
महिला आरक्षण लागू होने में क्या है कानूनी प्रक्रिया?
इसलिए केवल सीटों की संख्या बढ़ने से महिला आरक्षण अपने आप लागू नहीं हो जाएगा। इसके लिए जरूरी कानूनी शर्तें और प्रक्रियाएं पूरी होना भी आवश्यक है।
एक बात यह भी समझना जरूरी है कि छत्तीसगढ़ की मौजूदा 90 विधानसभा सीटों में महिलाओं के लिए अलग से 19 सीटें आरक्षित नहीं हैं।महिला विधायकों की संख्या और महिलाओं के लिए कानूनी रूप से आरक्षित सीटें दो अलग बातें हैं।
अब आगे क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल है कि परिसीमन में किस जनगणना को आधार बनाया जाएगा और सीटों की संख्या बढ़ाने का अंतिम फार्मूला क्या होगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों का निर्धारण किस तरह किया जाएगा, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
फिलहाल 90 से 135 सीटें और उनमें से 45 सीटों पर महिला आरक्षण का आंकड़ा संभावित गणना के आधार पर सामने आया है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने के साथ चुनावी समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या क्यों बढ़ सकती है?
छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या परिसीमन की प्रक्रिया के तहत 90 से बढ़कर 135 होने की संभावनाएं हैं। इससे राज्य में 45 नए विधानसभा क्षेत्रों का निर्माण हो सकता है। - महिला आरक्षण कानून के तहत कितनी विधानसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं?
अगर छत्तीसगढ़ विधानसभा की सीटें 135 होती हैं, तो एक-तिहाई सीटें यानी 45 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। - कब तक विधानसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण का फैसला होगा?
विधानसभा सीटों के परिसीमन और महिला आरक्षण का अंतिम फैसला कानूनी प्रावधानों और परिसीमन की प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही होगा। अभी यह केवल संभावित आंकड़ा है।
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