दूसरी पत्नी के बेटे को भी अनुकंपा नियुक्ति का हक, लेकिन हाईकोर्ट ने रखी ये शर्त

Harrison Masih | Aug 13, 2026, 14:49 IST
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अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का फैसला
अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का फैसला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया। दूसरी पत्नी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति का हकदार हो सकता है। लेकिन इसके लिए एक शर्त भी है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा है कि अगर किसी कर्मचारी की दो शादियां हुई हैं और दोनों पत्नियों से संतान हैं, तो नियमों के तहत दूसरी पत्नी से जन्मे बेटे को भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य माना जा सकता है। हालांकि, अगर एक ही श्रेणी में दो बेटे दावेदार हैं, तो प्राथमिकता उम्र में बड़े बेटे को दी जाएगी।

यह मामला मुंगेली जिले के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, धरमपुरा में पदस्थ पीएन के पद पर कार्यरत ईश्वर सिंह क्षत्रिय की मृत्यु के बाद सामने आया। ईश्वर सिंह का 29 सितंबर 2016 को सेवा के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन के बाद उनके परिवार में अनुकंपा नियुक्ति को लेकर विवाद शुरू हुआ।

मृत कर्मचारी ने की थी दो शादियां

ईश्वर सिंह क्षत्रिय ने दो शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी उषा बाई से एक बेटा जितेंद्र सिंह था, जिसकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है। वहीं दूसरी पत्नी मिलाडोकिन बाई से बेटा राजकुमार है।

पिता की मृत्यु के बाद दोनों बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। दोनों का दावा सामने आने के बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि आखिर नियुक्ति का अधिकार किस बेटे को मिलेगा।

दूसरी पत्नी के बेटे के दावे पर क्या कहा कोर्ट ने?

मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि दूसरी शादी से जन्मा बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए जायज और पात्र दावेदार हो सकता है।

हालांकि, एक ही श्रेणी में दो दावेदार होने की स्थिति में दोनों को समान प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। ऐसी स्थिति में उम्र में बड़े भाई को पहले मौका दिया जाएगा।

यानी दूसरी पत्नी से जन्मे बेटे को सिर्फ इस आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के अधिकार से बाहर नहीं किया जा सकता कि वह दूसरी शादी से जन्मा है।

प्राथमिकता बड़े भाई को मिलेगी

हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार के वर्ष 2013 के नियम और उसके संशोधित स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ही श्रेणी में दो दावेदार होने पर प्राथमिकता का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।

कोर्ट ने ऐसे मामले में पटना हाईकोर्ट के एक पुराने फैसले और बिहार सरकार के मामले का हवाला दिया। उसमें भी दो भाई पात्र होने की स्थिति में ज्येष्ठता यानी उम्र में बड़े भाई को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि बड़ा भाई पात्र है और वह अनुकंपा लेने से इनकार करता है या इसके लिए अयोग्य पाया जाता है, तभी छोटे भाई के दावे पर विचार किया जा सकता है।

पिता की मौत के बाद दोनों ने किया था आवेदन

ईश्वर सिंह क्षत्रिय की सेवा के दौरान मृत्यु के बाद उनके दोनों बेटों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। मामला सामने आने के बाद दोनों के दावे की स्थिति को लेकर विवाद हुआ।

हाईकोर्ट के फैसले का मुख्य बिंदु यह है कि दूसरी पत्नी से जन्मे बेटे को केवल उसके माता-पिता के वैवाहिक संबंध के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। पात्रता पूरी होने पर उसका दावा भी नियमों के तहत देखा जाएगा।

वहीं, जब एक ही श्रेणी में बड़े और छोटे दोनों भाई पात्र हों, तो पहले बड़े भाई के दावे पर विचार किया जाएगा। बड़े भाई के अयोग्य होने या नियुक्ति लेने से इनकार करने की स्थिति में छोटे भाई को मौका मिल सकता है।

FAQ

  1. क्या दूसरी पत्नी के बेटे को अनुकंपा नियुक्ति मिल सकती है?
    हां, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के इस फैसले के अनुसार दूसरी पत्नी से जन्मा बेटा भी नियमों के तहत अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र हो सकता है।


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