कांग्रेस जिला अध्यक्षों का रैंकिंग टेस्ट, पास हुए तो टिकिट चयन में मौका
Arun Tiwari | Aug 08, 2026, 12:50 IST
कांग्रेस ज़िला अध्यक्षों की रैंकिंग परीक्षा
छत्तीसगढ़ कांग्रेस जिला अध्यक्षों के छह महीने के कामकाज का मूल्यांकन सितंबर से शुरू होगा। बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रत्याशी चयन में अहमियत मिलेगी, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों पर कार्रवाई संभव है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन सृजन की प्रक्रिया के तहत नियुक्त किए गए जिला कांग्रेस अध्यक्षों के कामकाज का अब बारीकी से आकलन किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व ने जिला अध्यक्षों के प्रदर्शन को परखने के लिए छह महीने की अवधि तय की है। इस दौरान संगठनात्मक गतिविधियों, पार्टी कार्यक्रमों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर किए गए आंदोलनों समेत कई बिंदुओं के आधार पर जिला अध्यक्षों की कार्यप्रणाली की समीक्षा होगी। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग तय किए जाने की तैयारी है।
संगठन सृजन के बाद कांग्रेस अब जिला स्तर पर संगठन को सक्रिय और मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसके लिए प्रदेश के सभी जिलों में पार्टी की गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाएगी। समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि जिला कांग्रेस कमेटियां पार्टी की विभिन्न समितियों और वरिष्ठ नेताओं के साथ किस तरह तालमेल बनाकर काम कर रही हैं।
जिला कांग्रेस अध्यक्षों के छह महीने के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए दिल्ली से संगठन सृजन प्रभारी और नेशनल कनेक्ट सेंटर के चेयरमैन भी छत्तीसगढ़ का दौरा करेंगे। इस दौरान वे अलग-अलग जिलों में जाकर संगठन के कामकाज की जानकारी लेंगे। जिला अध्यक्षों के प्रदर्शन के आधार पर उनकी रैंकिंग तय की जाएगी।
संगठन सृजन के बाद प्रदेश में जिला कांग्रेस अध्यक्षों की पहली बड़ी समीक्षा सितंबर महीने में होने के संकेत हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में कुछ निर्धारित बिंदुओं के आधार पर संगठन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिला कांग्रेस कमेटियों के कामकाज की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
राष्ट्रीय नेतृत्व का फोकस केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं है। संगठन सृजन के तहत ब्लॉक, वार्ड और बूथ स्तर तक पार्टी की गतिविधियों को सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। समीक्षा में यह देखा जाएगा कि निचले स्तर पर पार्टी की समितियां वास्तव में सक्रिय हैं या केवल कागजों तक सीमित हैं।
![कांग्रेस जिला अध्यक्षों का रैंकिंग टेस्ट]()
यदि किसी जिले में कांग्रेस की समितियां अपेक्षित तरीके से काम नहीं कर रही हैं तो उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठेंगे। पार्टी यह भी देखेगी कि जिम्मेदार पदाधिकारियों ने संगठन को मजबूत करने के लिए क्या प्रयास किए और उन्हें कितना परिणाम मिला। पदाधिकारियों की सक्रियता, संगठनात्मक बैठकों, स्थानीय मुद्दों पर पार्टी की भूमिका और जनसरोकार से जुड़े आंदोलनों को भी समीक्षा का हिस्सा बनाया जा सकता है।
जिला कांग्रेस अध्यक्षों के लिए यह समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले पदाधिकारियों को संगठन में आगे भी जिम्मेदारी मिलने की संभावना रहेगी। वहीं, कमजोर प्रदर्शन करने वालों को अपनी कार्यशैली सुधारने का अवसर दिया जा सकता है या छुट्टी की का सकती है।
पार्टी के स्तर पर जिला अध्यक्षों के प्रदर्शन को अलग-अलग श्रेणियों में देखने की तैयारी है। यदि किसी जिला अध्यक्ष का प्रदर्शन कमजोर पाया जाता है तो उसे तत्काल पद से हटाने के बजाय पहले अपना काम सुधारने का मौका दिया जाएगा। हालांकि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले जिला अध्यक्षों को रेड जोन में रखा जा सकता है।
निर्धारित समय सीमा के बाद संबंधित जिलों की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही जिला अध्यक्षों को लेकर कोई बड़ा निर्णय लिए जाने की संभावना है। इसके विपरीत बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिला अध्यक्षों की सराहना भी की जाएगी। इससे जिला स्तर पर संगठन को सक्रिय रखने के साथ पदाधिकारियों के बीच बेहतर प्रदर्शन की प्रतिस्पर्धा पैदा करने की कोशिश होगी।
जिला कांग्रेस अध्यक्षों की भूमिका केवल संगठन तक सीमित नहीं रहने वाली है। आगामी चुनावों में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। प्रशिक्षण सम्मेलन के दौरान राष्ट्रीय नेताओं ने स्पष्ट किया था कि भविष्य में किसी भी स्तर के चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में जिला कांग्रेस अध्यक्षों की भूमिका अहम होगी।
इसी उद्देश्य से जिला अध्यक्षों को कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इससे उन्हें अपने-अपने जिलों में पार्टी की जमीनी स्थिति की जानकारी रखने के साथ संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय समीकरणों को समझने का अवसर मिलेगा। हालांकि इससे पहले अहमदाबाद सम्मेलन में जिला कांग्रेस कमेटियों को अधिक अधिकार देकर उन्हें ताकतवर बनाने पर भी जोर दिया गया था।
फिलहाल जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है। अब संगठन सृजन के बाद कांग्रेस नेतृत्व यह देखने में जुटा है कि जिला स्तर पर संगठन कितना सक्रिय हुआ है और कौन-कौन से पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं।
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परफॉर्मेंस पर रैंकिंग:
छह महीने के कामकाज पर नजर:
सितंबर से टेस्ट:
बूथ तक कामकाज पर नज़र:
कांग्रेस जिला अध्यक्षों का रैंकिंग टेस्ट
कमजोर समितियों पर होगी नजर:
कमज़ोर की छुट्टी:
रेड जोन में आए तो चेतावनी:
दूसरी समीक्षा में बड़े फैसले:
प्रत्याशी चयन में भी होगी भूमिका:
इसी उद्देश्य से जिला अध्यक्षों को कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। इससे उन्हें अपने-अपने जिलों में पार्टी की जमीनी स्थिति की जानकारी रखने के साथ संभावित उम्मीदवारों और स्थानीय समीकरणों को समझने का अवसर मिलेगा। हालांकि इससे पहले अहमदाबाद सम्मेलन में जिला कांग्रेस कमेटियों को अधिक अधिकार देकर उन्हें ताकतवर बनाने पर भी जोर दिया गया था।
फिलहाल जमीनी स्तर पर इसका असर बहुत स्पष्ट नजर नहीं आ रहा है। अब संगठन सृजन के बाद कांग्रेस नेतृत्व यह देखने में जुटा है कि जिला स्तर पर संगठन कितना सक्रिय हुआ है और कौन-कौन से पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं।
FAQ
- जिला कांग्रेस अध्यक्षों का रैंकिंग टेस्ट क्या है?
यह छत्तीसगढ़ कांग्रेस द्वारा जिला अध्यक्षों के कामकाज का मूल्यांकन करने की एक प्रक्रिया है। इसमें पिछले छह महीने के दौरान आयोजित बैठकों, पार्टी कार्यक्रमों, बूथ स्तर की सक्रियता और जनहित के आंदोलनों के प्रदर्शन के आधार पर अध्यक्षों को रैंकिंग दी जाएगी। - रैंकिंग टेस्ट में पास होने वाले जिला अध्यक्षों को क्या फायदा मिलेगा?
बेहतर प्रदर्शन और अच्छी रैंकिंग हासिल करने वाले जिला अध्यक्षों को आगामी चुनावों में विधानसभा या अन्य स्थानीय चुनावों के लिए प्रत्याशी (टिकट) चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका और प्राथमिकता दी जाएगी। - कमजोर प्रदर्शन करने वाले (रेड जोन) जिला अध्यक्षों पर क्या कार्रवाई होगी?
खराब प्रदर्शन करने वाले अध्यक्षों को तुरंत नहीं हटाया जाएगा। उन्हें पहले काम सुधारने का मौका मिलेगा और 'रेड जोन' में रखा जाएगा। इसके बाद भी स्थिति न सुधरने पर उन्हें पद से हटाया जा सकता है।
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