आरक्षक भर्ती रद्द करने की याचिका खारिज, 129 अभ्यर्थियों की जांच करेंगे अफसर
Harrison Masih | Jul 07, 2026, 20:05 IST
आरक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट का फैसला 2026
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरक्षक भर्ती परीक्षा को पूरी तरह रद्द करने की मांग को खारिज कर दिया है। डिवीजन बेंच ने कहा कि कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना उचित नहीं है। कोर्ट ने 129 उम्मीदवारों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरक्षक (कांस्टेबल) भर्ती प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कुछ अभ्यर्थियों की कथित गड़बड़ी के कारण पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना न्यायसंगत नहीं होगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि अनियमितता करने वाले उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें अलग किया जा सकता है, तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले हजारों अभ्यर्थियों को इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
बिलासपुर निवासी विवेक दुबे, मनोहर पटेल, मृत्युंजय श्रीवास और अश्वनी कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरक्षक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि बिलासपुर केंद्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान कई अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि लंबी कूद, गोला फेंक और दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इन्हीं आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पहले दिए गए आदेश को सही माना और कहा कि भर्ती प्रक्रिया में यदि कुछ अभ्यर्थियों द्वारा गड़बड़ी की गई है, तो केवल उन्हीं के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि पूरी भर्ती रद्द करना न केवल अनुचित होगा बल्कि उन उम्मीदवारों के साथ भी अन्याय होगा, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी की है।
हाईकोर्ट ने मामले में महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि 129 संदिग्ध अभ्यर्थियों और संबंधित पत्र में उल्लेखित अन्य उम्मीदवारों की विस्तृत जांच कराई जाए।
कोर्ट ने यह जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच हो सके।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई अभ्यर्थी दोषी पाया जाता है तो उसे पहले अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद यदि आरोप सही साबित होते हैं तो उसकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी।
याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग भी की थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह मामला बड़े स्तर पर सुनियोजित भ्रष्टाचार का प्रतीत नहीं होता। विभाग ने स्वयं अनियमितताओं की पहचान कर जांच शुरू की है। ऐसे में इस स्तर पर CBI जांच की आवश्यकता नहीं है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ की आरक्षक भर्ती प्रक्रिया पर लगा सबसे बड़ा संकट फिलहाल टल गया है। भर्ती प्रक्रिया जारी रहेगी, जबकि केवल संदिग्ध अभ्यर्थियों की जांच होगी। इससे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जो लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे थे।
हाईकोर्ट (CG High Court) ने अपने फैसले में यह सिद्धांत दोहराया कि कुछ लोगों की कथित गलती की सजा पूरी चयन प्रक्रिया या सभी अभ्यर्थियों को नहीं दी जा सकती। अब पूरे मामले में निगाहें वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की जांच रिपोर्ट पर रहेंगी, जिसके आधार पर दोषी पाए जाने वाले उम्मीदवारों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि यदि अनियमितता करने वाले उम्मीदवारों की पहचान कर उन्हें अलग किया जा सकता है, तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले हजारों अभ्यर्थियों को इसका नुकसान नहीं उठाना चाहिए।
क्या था पूरा मामला?
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि बिलासपुर केंद्र में आयोजित शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) के दौरान कई अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि लंबी कूद, गोला फेंक और दौड़ जैसी प्रतियोगिताओं में नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
इन्हीं आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ताओं ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
कोर्ट ने कहा कि पूरी भर्ती रद्द करना न केवल अनुचित होगा बल्कि उन उम्मीदवारों के साथ भी अन्याय होगा, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया ईमानदारी से पूरी की है।
129 संदिग्ध अभ्यर्थियों की होगी जांच
कोर्ट ने यह जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है ताकि निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच हो सके।
दोषी पाए गए तो नियुक्ति होगी रद्द
CBI जांच की मांग भी ठुकराई
कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह मामला बड़े स्तर पर सुनियोजित भ्रष्टाचार का प्रतीत नहीं होता। विभाग ने स्वयं अनियमितताओं की पहचान कर जांच शुरू की है। ऐसे में इस स्तर पर CBI जांच की आवश्यकता नहीं है।
फैसले का असर
निष्कर्ष
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