आरती स्पंज ने बिना खनन के बता दिया 4 लाख टन लोहा उत्पादन,25 लाख में मान गई सरकार
Arun Tiwari | Jul 20, 2026, 15:54 IST
अलनार खदान विवाद 2026
छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा की अलनार लौह अयस्क खदान को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आरोप है कि पिछले 9 वर्षों से खनन नहीं होने के बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में 4.87 लाख टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया, और सरकार को रॉयल्टी भी जमा कराई गई।
छत्तीसगढ़ में एक ऐसा कारनामा हुआ है जिससे सुनकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। क्या आपको लगता है कि बिना खदान को खोदे लाखों टन मटेरियल निकल सकता है।
आप कहेंगे शायद नहीं लेकिन छत्तीसगढ़ में ये मुमकिन है। दंतेवाड़ा के अलनार में लोह अयस्क की खदान है। यह खदान आरती स्पंज एवं पॉवर के पास है। इस खदान में 9 साल से माइनिंग नहीं हुई और लेकिन कागज पर लोहा निकल गया।
सरकार को बता दिया कि चार लाख लोहे का उत्पादन किया गया है। इसके ऐवज में सरकार को 25 लाख रुपए का राजस्व भी दे दिया गया। अब इसकी जांच कलेक्टर कर रहे हैं कि बिना खदान खोदे लोहे का उत्पादन कैसे हो जाता है।
बस्तर जिले की अलनार लौह अयस्क खदान को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। बस्तरिया राज मोर्चा ने दावा किया है कि जिस खदान में 9 साल से खनन हुआ ही नहीं वहां सरकारी रिकॉर्ड में लाखों टन लौह अयस्क उत्पादन दिखा दिया गया है।
संगठन ने इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन के अनुसार अलनार क्षेत्र में स्थित लौह अयस्क खदान का लीज क्षेत्र लगभग 31.56 हेक्टेयर है।
दावा किया गया है कि लंबे समय तक खदान में न तो खनन कार्य हुआ और न ही लोह अयस्क निकाला गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में साल 2018 से 2025 के बीच करीब 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है।
सरकार कहती है कि जिला दंतेवाड़ा के अलनार में आरती स्पंज एंड पॉवर लिमिटेड को लोह अयस्क की खदान आवंटित की गई है। वन कक्ष क्रमांक 1688 और 1689 के कुल रकबा 31.55 हेक्टेयर में लोह अयस्क का खनिज पट्टा दिया गया है।
यह खदान 7 जनवरी 2017 से 6 जनवरी 2067 तक 50 साल की लीज पर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस खदान से जून 2026 तक 4 लाख 87 हजार 312 टन लोह अयस्क का उत्पादन किया गया है।
इसके लिए सरकार को 25 लाख 15 हजार 886 का राजस्व भी प्राप्त हुआ है। यानी 9 साल में खदान में खनन ही नहीं हुआ और सरकार को बता दिया गया कि 4 लाख टन से ज्यादा लोहा निकाला गया है।
इसके ऐवज में 25 लाख रेवेन्यु आया तो सरकार ने मान भी लिया। जब इसकी 2 शिकायतें पहुंची तो जिला स्तर पर जांच कमेटी बना दी गई जो यह जांच कर रही है कि बिना खदान खोदे लोहा कैसे निकाला जाता है।
बस्तरिया राज मोर्चा की जिला संयोजक विमला सोरी का कहना है कि जिस खदान से लाखों टन लौह अयस्क निकाले जाने का दावा किया गया है, वहां तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं नहीं है।
संगठन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में खनिज निकाला गया होता तो भारी वाहनों की आवाजाही, परिवहन मार्ग और अन्य प्रमाण दिखाई देते। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे प्रमाण नहीं मिल रहे हैं।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि लाखों टन लौह अयस्क का उत्खनन हुआ, तो उसके परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
स्थानीय लोगों और संगठन के कार्यकर्ताओं का दावा है कि खदान क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से किसी बड़े खनन अभियान जैसी गतिविधियां नहीं देखी गईं।
उनका कहना है कि रिकॉर्ड में दिखाए गए उत्पादन के अनुरूप न तो मशीनरी की मौजूदगी नजर आई और न ही परिवहन व्यवस्था का कोई ठोस प्रमाण सामने आया। यही कारण है कि उत्पादन के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मोर्चा का आरोप है कि यदि खनन कार्य नहीं हुआ और फिर भी उत्पादन दर्ज किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का मामला है।
बस्तरिया राज मोर्चा ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
संगठन का कहना है कि उत्पादन के आंकड़ों, परिवहन चालानों, रॉयल्टी भुगतान, बिक्री विवरण और खनन अनुमति से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यह मामला केवल खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध की श्रेणी में भी आता है।
अलनार की लौह अयस्क की यह खदान छत्तीसगढ़ के मेसर्स आरती स्पंज एवं पावर के पास है। इस कंपनी के संचालक बीजेपी से जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बीजेपी से जुड़े इन रसूखदारों के खिलाफ इस फर्जीवाड़े पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
नियमानुसार दो साल तक खनन होने पर खदान की स्वीकृति रद्द कर दी जाती है लेकिन यहां तो मामला 9 साल का है। एसडीएम राजीव कुजूर का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी।
बस्तर मोर्चा ने शिकायत की है उसके अनुसार सभी पहलुओं पर जांच होगी। हम समय-समय पर भौतिक सत्यापन करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह कैसा सत्यापन है जिसमें खदान चल नही रही और उत्पादन हो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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आप कहेंगे शायद नहीं लेकिन छत्तीसगढ़ में ये मुमकिन है। दंतेवाड़ा के अलनार में लोह अयस्क की खदान है। यह खदान आरती स्पंज एवं पॉवर के पास है। इस खदान में 9 साल से माइनिंग नहीं हुई और लेकिन कागज पर लोहा निकल गया।
सरकार को बता दिया कि चार लाख लोहे का उत्पादन किया गया है। इसके ऐवज में सरकार को 25 लाख रुपए का राजस्व भी दे दिया गया। अब इसकी जांच कलेक्टर कर रहे हैं कि बिना खदान खोदे लोहे का उत्पादन कैसे हो जाता है।
बिना खनन उत्पादन :
संगठन ने इसे गंभीर आर्थिक अनियमितता बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। संगठन के अनुसार अलनार क्षेत्र में स्थित लौह अयस्क खदान का लीज क्षेत्र लगभग 31.56 हेक्टेयर है।
दावा किया गया है कि लंबे समय तक खदान में न तो खनन कार्य हुआ और न ही लोह अयस्क निकाला गया। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में साल 2018 से 2025 के बीच करीब 2 लाख 72 हजार 181 टन लौह अयस्क उत्पादन दर्ज किया गया है।
25 लाख में मानी सरकार :
यह खदान 7 जनवरी 2017 से 6 जनवरी 2067 तक 50 साल की लीज पर दी गई है। सरकार का कहना है कि इस खदान से जून 2026 तक 4 लाख 87 हजार 312 टन लोह अयस्क का उत्पादन किया गया है।
इसके लिए सरकार को 25 लाख 15 हजार 886 का राजस्व भी प्राप्त हुआ है। यानी 9 साल में खदान में खनन ही नहीं हुआ और सरकार को बता दिया गया कि 4 लाख टन से ज्यादा लोहा निकाला गया है।
इसके ऐवज में 25 लाख रेवेन्यु आया तो सरकार ने मान भी लिया। जब इसकी 2 शिकायतें पहुंची तो जिला स्तर पर जांच कमेटी बना दी गई जो यह जांच कर रही है कि बिना खदान खोदे लोहा कैसे निकाला जाता है।
खनन नहीं, फिर उत्पादन कैसे :
संगठन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि यदि वास्तव में इतनी बड़ी मात्रा में खनिज निकाला गया होता तो भारी वाहनों की आवाजाही, परिवहन मार्ग और अन्य प्रमाण दिखाई देते। लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे प्रमाण नहीं मिल रहे हैं।
संगठन ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि लाखों टन लौह अयस्क का उत्खनन हुआ, तो उसके परिवहन, भंडारण और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
रिकॉर्ड में उत्पादन :
उनका कहना है कि रिकॉर्ड में दिखाए गए उत्पादन के अनुरूप न तो मशीनरी की मौजूदगी नजर आई और न ही परिवहन व्यवस्था का कोई ठोस प्रमाण सामने आया। यही कारण है कि उत्पादन के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मोर्चा का आरोप है कि यदि खनन कार्य नहीं हुआ और फिर भी उत्पादन दर्ज किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का मामला नहीं बल्कि सरकारी रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी का मामला है।
एफआईआर की मांग :
संगठन का कहना है कि उत्पादन के आंकड़ों, परिवहन चालानों, रॉयल्टी भुगतान, बिक्री विवरण और खनन अनुमति से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यह मामला केवल खनन नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी अभिलेखों में फर्जीवाड़े और आर्थिक अपराध की श्रेणी में भी आता है।
विवाद का बीजेपी कनेक्शन :
नियमानुसार दो साल तक खनन होने पर खदान की स्वीकृति रद्द कर दी जाती है लेकिन यहां तो मामला 9 साल का है। एसडीएम राजीव कुजूर का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी।
बस्तर मोर्चा ने शिकायत की है उसके अनुसार सभी पहलुओं पर जांच होगी। हम समय-समय पर भौतिक सत्यापन करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यह कैसा सत्यापन है जिसमें खदान चल नही रही और उत्पादन हो रहा है और कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
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