DMF Fund Misuse : 7 करोड़ का सरकारी रिसॉर्ट और कौड़ियों के भाव किराया: बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों के हक पर डाका

Umeshwari Baghel | Apr 29, 2026, 19:47 IST
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लिमदरहा मिडवे रिसॉर्ट का निर्माण डीएमएफ से हुआ था, लेकिन खनन प्रभावितों को कोई लाभ नहीं मिला। रिसॉर्ट का किराया 87 हजार महीने था, जबकि एक कॉटेज का किराया 23,500 प्रतिदिन है। यहां सिर्फ 12-14 स्थानीय लोग काम कर रहे हैं।

NEWS IN SHORT

  • डीएमएफ से रिसॉर्ट का निर्माण खनन प्रभावितों को नहीं मिला फायदा
  • रिसॉर्ट को 87 हजार में किराए पर देना सरकारी धन का दुरुपयोग
  • स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित
  • डीएमएफ के नियमों का उल्लंघन प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
  • विशेषज्ञों ने उठाए सवाल क्या डीएमएफ का उद्देश्य बदल गया है?

NEWS IN DETAIL

कोण्डागांव छत्तीसगढ़ | dmf fund misuse : रायपुर-जगदलपुर नेशनल हाईवे पर स्थित लिमदरहा मिडवे रिसॉर्ट, सरकारी डीएमएफ के दुरुपयोग का उदाहरण बन गया है।

करीब 7 करोड़ की लागत से बने इस रिसॉर्ट को 87 हजार रुपए महीने के किराए पर निजी हाथों में सौंप दिया गया है, जो रोज़ के हिसाब से केवल 2880 बैठता है। जबकि इस रिसॉर्ट में एक ही लग्जरी कॉटेज का किराया 23,500 प्रति दिन है।

स्थानीय लोगों को नहीं मिला फायदा

इस रिसॉर्ट का निर्माण खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय रोजगार सृजन के लिए किया गया था। हालांकि, धरातल पर इसका असर उल्टा पड़ा।

यहां काम करने वाले स्थानीय लोग महज सफाई कार्य तक सीमित हैं, और स्व-सहायता समूहों के लिए बनी दुकानों का जल्द ही बंद हो जाना इसकी विफलता की कहानी बयान करता है।

नियमों की अनदेखी

डीएमएफ के तहत खर्च की जाने वाली राशि का 60% हिस्सा पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे जरूरी क्षेत्रों में लगाना अनिवार्य था, लेकिन रिसॉर्ट का निर्माण इन श्रेणियों में नहीं आता।

इसके अलावा, रिसॉर्ट के संचालन के लिए तीन बार टेंडर फेल हुए थे, और अंत में महज 10.51 लाख का किराया सालाना जमा हो रहा है, जिसका स्थानीय विकास में कोई उपयोग नहीं हो रहा है।

दावे और वास्तविकता में अंतर

स्थानीय रोजगार और स्वरोजगार के दावे किए गए थे, लेकिन रिसॉर्ट में काम करने वाले 12-14 स्थानीय कर्मचारियों के अलावा और कोई बदलाव नहीं आया।

यह डीएमएफ के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है, जिससे खनन प्रभावित क्षेत्र के लोग लाभान्वित होने के बजाय हानि का सामना कर रहे हैं।

प्रशासन का रवैया

डीएमएफ से बने रिसॉर्ट के बारे में जिला प्रशासन से जानकारी लेने के प्रयास किए गए, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इस घटना ने यह सवाल उठाया है कि क्या डीएमएफ का उद्देश्य वास्तव में खनन प्रभावितों की भलाई था या फिर इस पैसे का लाभ रसूखदार व्यक्तियों तक पहुंचाना था।

विशेषज्ञों की राय

रिटायर्ड एडिशनल डायरेक्टर खनिज विभाग, शैलेंद्र कुमार त्रिवेदी ने कहा कि डीएमएफ के प्रावधानों में सुधार की जरूरत थी। रिसॉर्ट खोलना और उसे लीज पर देना गलत है, और ऐसा लगता है कि बड़े लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों का उल्लंघन किया गया है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  1. 7 करोड़ का रिसॉर्ट: डीएमएफ से खनन प्रभावितों के विकास के लिए बना था।
  2. किराया मात्र 87,000: रिसॉर्ट का मासिक किराया बहुत कम, जबकि एक कॉटेज का किराया 23,500 प्रति दिन।
  3. स्थानीय रोजगार का दावा झूठा: महज 12-14 स्थानीय लोग काम कर रहे हैं।
  4. दुकानें बंद: स्व-सहायता समूह की दुकानों को बंद किया गया।
  5. प्रशासन की चुप्पी: डीएमएफ राशि के उपयोग पर प्रशासन से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

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