डीएमएफ घोटाला: ईडी की रेड में 1 करोड़ से ज्यादा कैश जब्त, बड़े नामों पर खतरा!
Harrison Masih | Jun 17, 2026, 15:23 IST
डीएमएफ घोटाले में ईडी की रेड 2026
छत्तीसगढ़ के DMF घोटाला मामले में ED ने बड़ी कार्रवाई की है। ED की टीमों ने रायपुर सहित 5 जिलों के 9 ठिकानों पर छापेमारी कर 1 करोड़ रुपए से अधिक का कैश, महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
9 ठिकानों पर पड़े छापे
इनमें 4 आवासीय परिसर और 5 कारोबारियों के व्यापारिक ठिकाने शामिल थे। सुरक्षा के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF (CRPF - Central Reserve Police Force) के जवान भी तैनात रहे। सबसे ज्यादा कैश कोरबा और धमतरी के ठिकानों से बरामद हुआ है।
किन-किन के यहां हुई जांच
अंबिकापुर में मानसून एग्रो के प्रमोटर और कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के फर्म पर छापा पड़ा। राकेश गुप्ता कृषि विभाग के बड़े सप्लायर बताए जाते हैं। पूर्व भूपेश सरकार के कार्यकाल में उनके फर्म से हुई सप्लाई की भी जांच हो रही है।
क्या है DMF घोटाला?
EOW यानी आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW - Economic Offences Wing) ने ED की रिपोर्ट के आधार पर धारा 120-बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है।
आरोप है कि कोरबा जिले के DMF फंड में अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं हुईं। ठेकेदारों को अवैध फायदा पहुंचाया गया।
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40 फीसदी तक कमीशन का आरोप
रिश्वत की रकम की एंट्री आवास खर्च यानी अकोमोडेशन के रूप में दिखाई गई थी। ED को आशंका है कि DMF फंड को ठेकेदारों, सप्लायरों और बिचौलियों के जरिए डायवर्ट किया गया।
किन नामों पर ED की नजर
पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई
2024 और 2025 में भी ED ने DMF घोटाले में छत्तीसगढ़ के कई ठिकानों पर छापे मारे थे। उन कार्रवाइयों में करोड़ों रुपए की संपत्तियां अटैच की गई थीं।
आगे क्या होगा
बरामद सबूतों के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। 16 जून की कार्रवाई पर ED की ओर से अभी आधिकारिक बयान नहीं आया है।
FAQ
- DMF घोटाला क्या है?
DMF यानी जिला खनिज न्यास फंड है जो खनन क्षेत्रों के विकास के लिए होता है। इस मामले में कोरबा जिले के DMF फंड में टेंडर आवंटन में अनियमितताओं का आरोप है। EOW ने ED की रिपोर्ट के आधार पर 575 करोड़ रुपए के घोटाले का केस दर्ज किया है। - DMF मामले में अब तक किन पर कार्रवाई हो चुकी है?
पूर्व कोरबा कलेक्टर रानू साहू, पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया और कथित बिचौलिया सूर्यकांत तिवारी पहले जांच में आ चुके हैं। 2024-25 में भी ED ने करोड़ों की संपत्तियां अटैच की थीं। अब राकेश गुप्ता, शाश्वत लुणावत और दीपेश गांधी के ठिकाने भी जांच के दायरे में हैं।
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