Dongargarh में जैन मुनि आचार्य Vidyasagar की विनयांजलि सभा आज

जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के देवलोक गमन के बाद आज देशभर में विनयांजलि सभा आयोजित किया जा रहा है । विनयांजलि सभा में शामिल होने श्रद्धालु चंद्रगिरी जैन तीर्थ पहुंच रहे हैं। 

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Sandeep Kumar
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विनयांजलि सभा

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RAIPUR. राजनांदगांव के डोंगरगढ़ (  Dongargarh )  में आज यानी 25 फरवरी को चंद्रगिरी पर्वत समेत देशभर में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज (  Acharya Shri Vidyasagar Maharaj ) के सम्मान में विनयांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। विनयांजलि के लिए यहां चंद्रगिरी तीर्थ पर तैयारियां पूरी कर ली गई है। दरअसल जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर जी  महाराज 18 फरवरी को ब्रह्मलीन हो गए थे, उन्होंने विधिवत सल्लेखना धारण कर डोंगरगढ़ (  Dongargarh ) के चंद्रगिरी जैन तीर्थ (  Chandragiri Jain Shrine ) में देह त्यागा था। इसके बाद उनके अनुयायियों ( Followers ) ने यहीं पर आचार्य श्री का अंतिम संस्कार किया ।

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आचार्य Vidyasagar  की विनयांजलि सभा

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आज आचार्य मुनि श्री विद्यासागर ( Vidyasagar ) जी महाराज की विनयांजलि सभा आयोजित की गई है । इस विशेष आयोजन में जैन मुनि आचार्य श्री समय सागर जी महाराज मौजूद रहेंगे। जैन धर्म के कई उपासक और गुरु भी इस विनयांजलि सभा का हिस्सा बनेंगे। हजारों की संख्या में जैन धर्म के उपासक और श्रद्धालु दूर दूर से चंद्रगिरी तीर्थ में पहुंच रहे हैं और विद्यासागर जी महाराज के अस्थि कलश और समाधि स्थल का दर्शन कर रहे हैं। इस सभा में आचार्य विद्यासागर जी महाराज को याद किया जाएगा, और उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। आचार्य मुनि श्री विद्यासागर जी महाराज के उत्ताराधिकारी के तौर पर जैन मुनि श्री समय सागर जी महाराज इस सभा में रहेंगे।

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विदेशों से भी पहुंच रहे आचार्य के अनुयायी

डोंगरगढ़ चंद्रगिरी पर्वत पर कई देशों से जैन धर्म के अनुयायी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. देश के कई हिस्सों से भी जैन धर्म के अनुयायी यहां पहुंचकर आचार्य श्री को नमन कर रहे हैं । डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी पर्वत पर विनयांजलि सभा को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है। 

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अजमेर में मिली थी आचार्य जी को दीक्षा

आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा को कर्नाटक के बेलगांम जिले के सद्लगा ग्राम में हुआ था, उन्हें आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को राजस्थान के अजमेर में आचार्य पद की दीक्षा दी थी।आचार्य बनने के बाद विद्यासागर जी ने 8 मार्च 1980 को छतरपुर में मुनि श्री समय सागर महाराज को पहली दीक्षा दी। इसके बाद सागर जिले में योग सागर और नियम सागर महाराज को दीक्षित किया। समय सागर और योग सागर उनके गृहस्थ जीवन के भाई हैं। उनकी दो बहनें शांता और सुवर्णा भी दीक्षा ले चुकी हैं।

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