हसदेव जंगल: राजनीति के आगे विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव भी बेबस
Rajesh Lahoti | May 29, 2026, 16:09 IST
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हसदेव अरण्य को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव फिर तेज हो गया है। 26 जुलाई 2022 को विधानसभा में सभी कोल ब्लॉक्स रद्द करने का सर्वसम्मति संकल्प पारित हुआ था, लेकिन इसके बावजूद पेड़ कटाई और खनन नहीं रुका।
Raipur. छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर हसदेव अरण्य को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक्स रद्द करने का सर्वसम्मति से प्रस्ताव (संकल्प) पास हुआ था। उस समय कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार थी और भाजपा विपक्ष में रहते हुए भी इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन कर रही थी। इसके बावजूद ना तो कोल ब्लॉक्स रद्द हुए और ना ही पेड़ कटाई रुक पाई है।
केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक को मंजूरी मिलते ही एक बार फिर पेड़ कटाई को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है। जब कांग्रेस सरकार थी तो बीजेपी ने उस पर अडानी से मिलने और पेड़ कटाई को लेकर आरोप लगाए थे और अब कांग्रेस इसी तरह का आरोप बीजेपी पर लगा रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक्स रद्द करने का दोनों प्रमुख दलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया था।
यह एक प्राइवेट मेंबर रेजोल्यूशन था, जिसमें विधानसभा ने केंद्र सरकार से अपील की कि हसदेव अरण्य के सभी आवंटित कोल ब्लॉक्स परसा, पीइकेबी, केते एक्सटेंशन और अन्य को रद्द कर दिए जाएं। इसका उद्देश्य था घने जंगलों, हाथियों के गलियारे, आदिवासी इलाके और जैव विविधता को बचाना। बीजेपी और कांग्रेस दोनों पार्टियों के विधायकों ने इसे सर्वसम्मति से पास किया, जिसका मतलब था कि राजनीतिक सहमति के साथ जंगल को बचाया जाएं। विधानसभा ने केंद्र को पत्र भी भेजा, लेकिन केंद्र की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सत्ता बदलते ही कहानी फिर पलट गई। वर्तमान भाजपा सरकार अब केते एक्सटेंशन कोल की अनुशंसा केंद्र को भेज चुकी है। इस प्रक्रिया में लगभग 7 लाख पेड़ काटे जाने वाले हैं। पीइकेबी कोल ब्लॉक (फेज-1) में 2012 से अब तक 98,000 से ज्यादा पेड़ आधिकारिक रूप से काटे गए। हंसदेव अरण्य से जुड़े कार्यकर्ताओं का आरोप है कि असल संख्या इससे कहीं ज्यादा है। काटे गए पेड़ों की संख्या करीब 3.5 लाख से ऊपर है। अब नए ब्लॉक में 7 लाख अतिरिक्त पेड़ काटने की तैयारी है, जिससे कुल नुकसान 10 लाख से ज्यादा पेड़ों का हो सकता है।
2022 में जब बीजेपी विपक्ष में थी तब बीजेपी नेताओं ने भूपेश बघेल सरकार पर अडानी को फायदा पहुंचाने और बलपूर्वक पेड़ कटाई का आरोप लगाया था। उस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह लिखा गया था-भूपेश बघेल ने हसदेव अडानी को देकर राहुल गांधी-सोनिया गांधी की चिंता कम कर दी। भाजपा ने आधिकारिक बयान में पूछा था-हसदेव में पेड़ों का कत्लेआम क्यों ? कांग्रेस अब विपक्ष में तो यही सवाल वो अब बीजेपी से पूछ रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि एक पेड़ मां के नाम मुहिम का मजाक उड़ाया जा रहा है। 2022 का सर्वसम्मति संकल्प भुलाकर अब अडानी के लिए जंगल उजाड़ रहे हैं।
हालत यह है कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर अडानी को फेवर करने का आरोप लगा रही हैं, जबकि हसदेव अरण्य मध्य भारत का फेफड़ा है। जंगल कटने से आदिवासी विस्थापित हो रहे हैं, हाथी गलियारा खत्म हो रहा है और पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है।
विधानसभा से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा में हसदेव अरण्य के सभी कोल ब्लॉक्स रद्द करने वाला अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पास हुआ था। यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यह केंद्र सरकार के लिए सिर्फ अनुशंसा या अपील की तरह है। राज्य विधानसभा केंद्र को सुझाव दे सकती है, लेकिन केंद्र को इसे मानना अनिवार्य नहीं। कोयला ब्लॉक्स का आवंटन, वन स्वीकृति और खनन की मंजूरी केंद्र सरकार (कोयला मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय) के अधीन आती है। राज्य सरकार की विधानसभा का संकल्प इन पर सीधा असर नहीं डालता।
संकल्प पास होने के बाद विधानसभा ने केंद्र को पत्र भी भेजा था, लेकिन केंद्र ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस सरकार के समय भी संकल्प पास होने के बावजूद पीइकेबी फेज-2 और परसा ब्लॉक में पेड़ कटाई और खनन जारी था। यह संकल्प राजनीतिक और नैतिक दबाव पैदा करता है, लेकिन कानूनी रूप से रोक नहीं लगाता।
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