नर्सिंग शिक्षा पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी, छत्तीसगढ़ में पढ़ाई ठप होने के कगार पर

VINAY VERMA | Apr 24, 2026, 10:31 IST
Share
health-department-silence-nursing-education
health-department-silence-nursing-education

छत्तीसगढ़ में नर्सिंग शिक्षा संकट में है। सरकार ने पिछले 5 महीनों से संविदा शिक्षकों को वेतन नहीं दिया। निजी कॉलेजों की संख्या बढ़ रही है, जिससे सरकारी कॉलेज कमजोर हो सकते हैं।

छत्तीसगढ़ में नर्सिंग शिक्षा का पूरा सिस्टम इस समय गहरे संकट में है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अगर जल्द फैसला नहीं हुआ तो पढ़ाई पूरी तरह ठप हो सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सरकार पिछले पांच महीनों से नर्सिंग कॉलेजों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को वेतन न देना। इससे न सिर्फ शिक्षकों में नाराजगी है, बल्कि छात्रों का भविष्य भी अधर में लटक गया है।

व्यवस्था संविदा फैकल्टी के भरोसे

प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेज पूरी तरह संविदा फैकल्टी के भरोसे चल रहे हैं। इसमें प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और डेेमोस्ट्रेटर शामिल हैं। पिछले 15 सालों से यही व्यवस्था जारी है। हर साल बिना किसी नए आवेदन के इन शिक्षकों की संविदा सेवा स्वतः एक साल के लिए बढ़ा दी जाती थी। उनका सेवा सत्र जनवरी से दिसंबर तक चलता था और दिसंबर में ही उन्हें अगले साल के लिए एक्सटेंशन लेटर मिल जाता था। लेकिन इस बार पूरा सिस्टम ही बदल गया है।

शिक्षकों को वेतन दिया गया

दिसंबर गुजर गया, लेकिन न तो संविदा विस्तार का कोई आदेश जारी हुआ और न ही शिक्षकों को वेतन दिया गया। इससे स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। संविदा फैकल्टी लगातार मंत्रालय स्तर पर संपर्क कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। सबसे हैरानी की बात यह है कि न तो उनकी सेवा समाप्त की गई है और न ही उन्हें काम जारी रखने का लिखित आदेश दिया गया है।

असमंजस में पूरा सिस्टम

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है। क्या सरकार चुपचाप इनकी सेवाएं खत्म करना चाहती है? अगर ऐसा है तो स्पष्ट आदेश क्यों नहीं दिया जा रहा? और अगर सेवाएं जारी रखनी हैं तो वेतन और एक्सटेंशन लेटर क्यों नहीं दिए जा रहे? यह असमंजस अब पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहा है।

सरकारी नर्सिंग संस्थानों की संख्या 11

प्रदेश में कुल 11 सरकारी नर्सिंग कॉलेज और जीएनएम संस्थान हैं, जहां लगभग 60 संविदा शिक्षक कार्यरत हैं। रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, सरगुजा, बस्तर, बिलासपुर, रायगढ़ और कवर्धा में सरकारी नर्सिंग कॉलेज संचालित हैं। जहां बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई चल रही है। वहीं कांकेर, महासमुंद और दंतेवाड़ा में जीएनएम कॉलेज हैं। इन सभी संस्थानों में पढ़ाई का भार इन्हीं संविदा शिक्षकों पर है।

निजी कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ रही

दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में निजी नर्सिंग कॉलेजों की संख्या 110 तक पहुंच चुकी है। यहां बीएससी, एमएससी नर्सिंग और जीएनएम जैसे कोर्स संचालित हो रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने बड़ा आरोप लगाया है कि सरकार जानबूझकर सरकारी नर्सिंग कॉलेजों को कमजोर कर रही है ताकि निजी संस्थानों को बढ़ावा मिल सके।

छात्रों को हो रहा नुकसान

अगर यह स्थिति जारी रही तो सबसे ज्यादा नुकसान छात्रों को होगा। सरकारी कॉलेज कमजोर होंगे तो छात्रों को मजबूरी में निजी कॉलेजों का रुख करना पड़ेगा, जहां फीस कई गुना ज्यादा है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों की पहुंच नर्सिंग शिक्षा से दूर हो सकती है।

असर सीधा स्वास्थ्य व्यवस्था पर

यह मामला सिर्फ वेतन या संविदा का नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम से जुड़ा है। नर्सिंग शिक्षा कमजोर होने का सीधा असर आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ेगा। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार कब तक चुप रहेगी और इस संकट का समाधान कब निकालेगी।

अमानवीय खेल चल रहा

स्वास्थ्य कर्मचारी संगठन विभाग ने निष्क्रियता से आक्रोशित है। प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के महामंत्री पीसी जेम्स का कहना है कि विभाग लगभग 15 सालों से संविदा रुप से नर्सिंग शिक्षकों की सेवाएं ले रहा है। लेकिन इस साल से उनकी स्थिति क्लियर नहीं है। उन्हें 5 माह से वेतन नहीं दिया जा रहा, क्या यह अमानवीय नहीं है? विभाग को कर्मचारियों और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द फैसला लेना चाहिए।

यह खबरें भी पढ़ें...

Madhya Pradesh में 25 नवंबर से हड़ताल पर स्वास्थ्य कर्मचारी | होगी बड़ी मुसीबत

गुना में स्वास्थ्य कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर की जातिसूचक पोस्ट, नाराज कर्मचारियों ने पुलिस को सौंपा ज्ञापन

8वीं के छात्र ने बताया 49+2 = 60, जवाब सुन शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पकड़ा माथा

इंदौर में स्कूल शिक्षा विभाग में 2.47 करोड़ का घोटाला, अतिथि शिक्षक भी शामिल

Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • संविदा शिक्षक
  • जीएनएम
  • बीएससी
  • सरकारी नर्सिंग कॉलेज
  • नर्सिंग शिक्षा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा