छत्तीसगढ़ शिक्षक भर्ती परीक्षा पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, दिव्यांग आरक्षण को लेकर उठे सवाल

Harrison Masih | Oct 09, 2026, 14:34 IST
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शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक
शिक्षक भर्ती पर हाईकोर्ट की रोक

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलने से जुड़ा है।

इस मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश कृष्णराम महापात्र की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रूंगटा ने दलील दी कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को इसका लाभ नहीं दिया जा रहा है। याचिका में इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए भर्ती की शर्तों और आरक्षण रोस्टर को चुनौती दी गई है।


क्या है पूरा मामला?

छत्तीसगढ़ में सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती के विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस व्यवस्था में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को उचित अवसर नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि आरक्षण का प्रावधान होने के बावजूद इस श्रेणी के उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो रहे हैं।

याचिकाकर्ताओं ने इसी मुद्दे को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उनका तर्क है कि भर्ती विज्ञापन में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित पदों की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे पात्र उम्मीदवारों को भी नियमानुसार अवसर मिल सके।

Chhattisgarh High Court decision the sootr
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, सहायक प्राध्यापक भर्ती में दिव्यांग आरक्षण का अधिकार सरकार के पास
02 Sept 2025 ,
By Krishna Kumar Sikander
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक भर्ती में दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि यह तय करना सरकार या नियुक्ति प्राधिकारी का अधिकार है
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सहायक प्राध्यापक भर्ती में दृष्टिहीन और कम दृष्टि वाले अभ्यर्थियों के लिए आरक्षण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु ने कहा कि यह तय करना सरकार या नियुक्ति प्राधिकारी का अधिकार है

भर्ती विज्ञापन और आरक्षण रोस्टर को दी गई चुनौती

याचिका में भर्ती विज्ञापन की शर्तों और आरक्षण रोस्टर पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, विज्ञापन में दिव्यांगों की कुछ श्रेणियों के लिए आरक्षित पदों का प्रावधान है, लेकिन पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है।

अधिवक्ता रूंगटा ने अदालत में सामान्य प्रशासन विभाग और समाज कल्याण विभाग के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। उन्होंने दलील दी कि मौजूदा व्यवस्था के कारण पूर्ण दृष्टिबाधित उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के अवसर से वंचित हो रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इसे दिव्यांग अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मामला बताया है।

अब इस मामले में राज्य सरकार का जवाब महत्वपूर्ण होगा। सरकार की ओर से अदालत में भर्ती विज्ञापन, आरक्षण व्यवस्था और रोस्टर से संबंधित पक्ष रखा जाएगा। इसके बाद मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत इस विवाद पर विचार करेगी।


हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है और उससे जवाब मांगा है। साथ ही, भर्ती परीक्षा पर रोक लगा दी गई है। इस आदेश के बाद सहायक शिक्षक और शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की नजर मामले की अगली सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश पर रहेगी।

हालांकि, रोक किन पदों पर लागू होगी और भर्ती प्रक्रिया के किस चरण तक इसका असर रहेगा, इसकी स्पष्ट जानकारी के लिए हाई कोर्ट का विस्तृत आदेश देखना जरूरी है। इसलिए अभ्यर्थियों को फिलहाल आदेश के दायरे को लेकर किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

अभ्यर्थियों पर क्या पड़ेगा असर?

हाई कोर्ट की रोक से भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा की आगे की स्थिति पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक दायरा अदालत के आदेश में दी गई शर्तों पर निर्भर करेगा। जब तक आधिकारिक निर्देश स्पष्ट नहीं होते, तब तक परीक्षा की तारीख, भर्ती प्रक्रिया या अन्य गतिविधियों में बदलाव को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आधिकारिक आदेश और संबंधित भर्ती विभाग की अधिसूचनाओं पर नजर रखें। परीक्षा की नई तारीख या भर्ती से संबंधित किसी भी बदलाव की जानकारी केवल आधिकारिक सूचना के आधार पर ही मानें।


आरक्षण के मुद्दे पर आगे क्या होगा?

इस मामले में अब राज्य सरकार को हाई कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखना होगा। याचिका का मुख्य मुद्दा यह है कि भर्ती विज्ञापन और आरक्षण रोस्टर में पूर्ण दृष्टिबाधित अभ्यर्थियों के लिए व्यवस्था नियमों के अनुरूप है या नहीं।

अदालत में आगे होने वाली सुनवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल, अभ्यर्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे हाई कोर्ट के आदेश और विभाग की आधिकारिक घोषणाओं को नियमित रूप से जांचते रहें।
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