90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सस्पेंशन समाप्त! छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
VINAY VERMA | Jun 16, 2026, 10:19 IST
निलंबन पर CG हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने शासकीय कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी को निलंबन के 90 दिनों के भीतर चार्जशीट नहीं दी जाती और न ही निलंबन अवधि बढ़ाने का वैध आदेश जारी होता है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शासकीय कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सरकारी कर्मचारी को निलंबित करने के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) नहीं दिया जाता और न ही निलंबन अवधि बढ़ाने का वैधानिक आदेश जारी किया जाता है, तो ऐसा निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा। इस फैसले को प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामला उत्तर बस्तर कांकेर निवासी एम.के. खरे से जुड़ा है। खरे लोक निर्माण विभाग में पदस्थ थे। राज्य शासन ने उन्हें 9 जनवरी 2026 को निलंबित कर दिया था। निलंबन के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू तो हुई, लेकिन तय समय-सीमा के भीतर न तो आरोप पत्र सौंपा गया और न ही निलंबन अवधि बढ़ाने का कोई आदेश जारी किया गया। इसके बाद खरे ने हाईकोर्ट की शरण ली।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(5)(ए) के तहत किसी भी निलंबित कर्मचारी को 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र देना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं होता तो निलंबन स्वतः प्रभावहीन हो जाता है। याचिका में कहा गया कि विभाग ने नियमों का पालन नहीं किया और कर्मचारी को अनिश्चितकाल तक निलंबन की स्थिति में रखा गया।
जस्टिस बी.डी. गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि विभाग निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका। रिकॉर्ड में ऐसा कोई आदेश भी नहीं था। जिससे, यह साबित हो सके कि निलंबन अवधि को नियमों के अनुरूप आगे बढ़ाया गया था। अदालत ने माना कि विभागीय कार्रवाई नियमों के अनुरूप नहीं हुई।
हाईकोर्ट (CG High Court) ने याचिका स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब 90 दिनों की अवधि के भीतर चार्जशीट नहीं दी गई और निलंबन विस्तार का आदेश भी जारी नहीं हुआ, तब निलंबन को जारी नहीं रखा जा सकता। इस आदेश के साथ ही एम.के. खरे की सेवा बहाली का रास्ता साफ हो गया है।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला सभी विभागों के लिए चेतावनी की तरह है। अब किसी कर्मचारी को लंबे समय तक बिना आरोप पत्र के निलंबित रखना आसान नहीं होगा। विभागों को नियमों के तहत तय समय-सीमा का पालन करना होगा, अन्यथा ऐसे निलंबन न्यायिक समीक्षा में टिक नहीं पाएंगे।
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निलंबित अधिकारी की याचिका पर फैसला
याचिका में नियमों के उल्लंघन का हवाला
कोर्ट ने कार्रवाई को माना अवैध
निलंबन आदेश निरस्त, बहाली का रास्ता साफ
सरकारी विभागों के लिए भी बड़ा संदेश
FAQ
- क्या चार्जशीट न मिलने पर निलंबन खत्म हो जाता है?
हाँ, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के अनुसार यदि 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र जारी नहीं होता और न ही निलंबन बढ़ाने का आदेश दिया जाता है, तो निलंबन प्रभावहीन माना जा सकता है। - छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम क्या हैं?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 ऐसे नियमों का समूह है जो राज्य सरकार के कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों, आचरण, अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन, पदोन्नति और सेवा समाप्ति से जुड़े मामलों को नियंत्रित करता है।
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