छत्तीसगढ़ फार्मेसी काउंसिल में पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति न होने पर IAS अमित कटारिया समेत तीन अफसरों को अवमानना नोटिस

VINAY VERMA | Oct 27, 2026, 21:29 IST
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IAS अमित कटारिया पर अवमानना का शिकंजा<br>
IAS अमित कटारिया पर अवमानना का शिकंजा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव आईएएस अमित कटारिया समेत तीन अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी किया है। मामला फार्मेसी काउंसिल में पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश के बावजूद तय समय में नियुक्ति नहीं हुई। हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को मामले की सुनवाई की।

इसके बाद संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अधिकारियों को तीन सप्ताह में अपना जवाब देना होगा। नोटिस पाने वालों में स्वास्थ्य संचालक संजीव झा भी शामिल हैं। तीसरे अधिकारी फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष अरुण मिश्रा हैं। इन्हें बताना होगा कि अदालत के आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ।

अब सवाल है कि आठ सप्ताह का समय मिलने पर भी नियुक्ति क्यों अटकी?

समझें क्या है पूरा मामला

  • छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति का विवाद चल रहा है।
  • हाईकोर्ट ने 3 मार्च 2026 को तत्कालीन रजिस्ट्रार को हटाने का निर्देश दिया।
  • इसके बाद 15 मई 2026 को पूर्णकालिक रजिस्ट्रार नियुक्त करने का आदेश हुआ।
  • अदालत ने नई नियुक्ति के लिए आठ सप्ताह की समय सीमा दी।
  • आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना याचिका दाखिल की गई।

आईएएस अमित कटारिया को अवमानना नोटिस

छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग अब हाईकोर्ट की अवमानना कार्यवाही का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को कारण बताओ नोटिस मिला है। स्वास्थ्य संचालक संजीव झा और काउंसिल अध्यक्ष अरुण मिश्रा को भी नोटिस मिला है।

अधिकारियों से तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है। उन्हें बताना होगा कि निर्धारित समय में नियुक्ति क्यों नहीं हुई। साथ ही अवमानना कार्यवाही को लेकर अपना पक्ष रखना होगा।

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By VINAY VERMA
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया को समय पर जवाब न देने पर जुर्माना लगाया। इसके परिणामस्वरूप, CMHO डॉ. रामचंद्र ठाकुर को निलंबित कर दिया गया। डॉ. ठाकुर पर यह कार्रवाई गंभीर लापरवाही के कारण की गई। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन माना है। निलंबित होने पर भी डॉ. ठाकुर को जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया को समय पर जवाब न देने पर जुर्माना लगाया। इसके परिणामस्वरूप, CMHO डॉ. रामचंद्र ठाकुर को निलंबित कर दिया गया। डॉ. ठाकुर पर यह कार्रवाई गंभीर लापरवाही के कारण की गई। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम का उल्लंघन माना है। निलंबित होने पर भी डॉ. ठाकुर को जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

यह नोटिस अदालत की अवमानना का अंतिम फैसला नहीं है। अभी किसी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया गया है। अदालत ने सभी संबंधित अधिकारियों को जवाब देने का मौका दिया है।

तीन अधिकारियों से जवाब क्यों मांगा?

हाईकोर्ट ने 15 मई को शासन और काउंसिल को निर्देश दिए थे। आदेश पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति से संबंधित था। निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी आदेश के पालन का मामला लंबित रहा।

इसी आधार पर डॉ. राकेश गुप्ता ने अवमानना याचिका लगाई। याचिका पर सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस दिए गए।

आठ सप्ताह बाद भी रजिस्ट्रार की नियुक्ति नहीं

फार्मेसी काउंसिल रजिस्ट्रार नियुक्ति का विवाद मई 2026 से जारी है। हाईकोर्ट ने 15 मई को नया पूर्णकालिक रजिस्ट्रार नियुक्त करने का निर्देश दिया। इसके लिए शासन और काउंसिल को आठ सप्ताह दिए गए थे।

लेकिन निर्धारित समय में नई नियुक्ति नहीं हो सकी। इसके बाद मामला दोबारा हाईकोर्ट पहुंच गया। इस बार डॉ. राकेश गुप्ता ने अवमानना याचिका दाखिल की।

सोचिए एक बार। हाईकोर्ट ने नियुक्ति के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की थी। फिर भी नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी।

नियुक्ति की समय सीमा कब खत्म हुई?

15 मई के आदेश से आठ सप्ताह की अवधि जुलाई 2026 में पूरी हुई। इसके बावजूद 26 अक्टूबर तक नियुक्ति नहीं होने का मामला अदालत पहुंचा। इस देरी को लेकर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।


नियुक्ति प्रक्रिया किस चरण में अटकी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। विभाग ने क्या प्रयास किए, इसकी जानकारी भी उपलब्ध नहीं है। अब अधिकारियों के जवाब से इन पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

योग्यता नहीं होने पर हटाने का आदेश

छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार का पद पहले भी विवादों में रहा है। तत्कालीन रजिस्ट्रार अश्वनी गुरडेकर की योग्यता को लेकर सवाल उठे थे। यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था।

हाईकोर्ट ने 3 मार्च 2026 को इस विवाद में आदेश दिया। अदालत ने अश्वनी गुरडेकर को रजिस्ट्रार पद से हटाने का निर्देश दिया। आदेश का आधार पद के लिए निर्धारित योग्यता पूरी नहीं होना था।

इसके बाद योग्य व्यक्ति की नियुक्ति का सवाल सामने आया। लेकिन पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति का मामला भी अदालत तक पहुंच गया।

मार्च से अक्टूबर तक क्या हुआ?

3 मार्च 2026 को हाईकोर्ट ने तत्कालीन रजिस्ट्रार को हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद 15 मई को नई नियुक्ति के लिए आठ सप्ताह दिए गए।

निर्धारित अवधि में नियुक्ति नहीं होने पर डॉ. राकेश गुप्ता अदालत पहुंचे। उन्होंने आदेश का पालन नहीं होने का मुद्दा उठाया।

अंततः 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने अवमानना मामले की सुनवाई की। इसी सुनवाई में तीन अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए।


हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला

अब विवाद केवल नियुक्ति में देरी तक सीमित नहीं है। मामला अदालत के स्पष्ट आदेश का पालन नहीं होने से जुड़ गया है।

हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। अधिकारियों को अदालत में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

क्या योग्य उम्मीदवार की उपलब्धता को लेकर कोई समस्या थी? क्या नियुक्ति प्रक्रिया में प्रशासनिक अड़चन आई? इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

विभाग ने अदालत के आदेश पर क्या कार्रवाई की, यह भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में नियुक्ति प्रक्रिया का पूरा ब्योरा नहीं है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का नोटिस, आगे क्या?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का नोटिस जारी होने के बाद अधिकारियों को जवाब देना होगा। न्यायालय ने इसके लिए तीन सप्ताह का समय निर्धारित किया है।

इस मामले को IAS अमित कटारिया को अवमानना नोटिस और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से जुड़े घटनाक्रम के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, अवमानना के आरोप पर अदालत का अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है।


अधिकारियों के जवाब के बाद अदालत आगे की कार्यवाही तय करेगी। पूर्णकालिक रजिस्ट्रार की नियुक्ति का सवाल भी फिलहाल बना हुआ है।
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