सड़कों पर उतरे छत्तीसगढ़ के किसान : धान के 1700 करोड़ रुपए बकाए को लेकर मंत्रालय घेराव की कोशिश, पुलिस ने रास्ते में रोका
Umeshwari Baghel | Oct 27, 2026, 19:52 IST
रायपुर में किसानों का बड़ा प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आज मंगलवार को सैकड़ों किसान सड़कों पर उतर आए। किसान अपनी मांगों को लेकर मंत्रालय का घेराव करने निकले थे। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। रायपुर में किसानों का प्रदर्शन करीब एक घंटे तक चला। किसानों ने पुलिस के जरिए संबंधित अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने के बाद सभी वापस लौट गए। इस आंदोलन में धान के बकाया भुगतान से लेकर खाद तक के मुद्दे उठे। किसानों ने चूना पत्थर की खदानों और सिंचाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन में धान खरीदी का बकाया भुगतान प्रमुख मुद्दा रहा। किसानों ने वर्ष 2022-23 की धान खरीदी का बकाया मांगा। उनका दावा है कि 1700 करोड़ रुपए का भुगतान अभी बाकी है।
भारतीय किसान संघ प्रदर्शन में शामिल किसानों ने सरकार की घोषणाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि घोषित राशि का पूरा भुगतान नहीं हुआ। केंद्र की ओर से बढ़ाई गई समर्थन मूल्य की राशि भी देने की मांग उठी।
भारतीय किसान संघ के धमतरी जिला अध्यक्ष लालाराम चंद्राकर ने भुगतान का मुद्दा उठाया। उन्होंने सरकार की घोषणा के बावजूद पूरा पैसा नहीं मिलने का आरोप लगाया।
सरकार की घोषणा के बाद भी किसानों को पूरा भुगतान नहीं मिला है। केंद्र सरकार की ओर से बढ़ाई गई समर्थन मूल्य की राशि भी किसानों को दी जानी चाहिए।
– लालाराम चंद्राकर, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, धमतरी
किसानों का सवाल है कि लंबित भुगतान कब तक मिलेगा? आंदोलन में उन्होंने बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग रखी।
मंत्रालय घेराव रायपुर में मंगलवार के प्रदर्शन का प्रमुख घटनाक्रम रहा। तूता धरना स्थल पर जुटे किसानों ने अन्नदाता गर्जना रैली निकाली। इसके बाद वे मंत्रालय की ओर बढ़ने लगे।
पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की थी। किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। कुछ देर किसान बैरिकेडिंग के पास ही डटे रहे।
कुरुद से पहुंचे किसान राज कुमार सिन्हा ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों के मौके पर नहीं आने का मुद्दा भी उठाया।
अधिकारी नहीं आए, तो हमें प्रदर्शन करने से रोका गया। हमें अपना रास्ता तय करने देना चाहिए। हमारी मांगों को भी तुरंत पूरा किया जाना चाहिए।
– राज कुमार सिन्हा, किसान, कुरुद
इसके बाद किसानों ने पुलिस को संबंधित अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने पर प्रदर्शन समाप्त हुआ।
किसानों की 10 सूत्रीय मांगें केवल धान के भुगतान तक सीमित नहीं रहीं। इनमें रासायनिक खाद की जगह गौवर्धन खाद को बढ़ावा देना भी शामिल था।
किसानों ने रासायनिक खाद पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि जैविक विकल्पों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार गौवर्धन खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दे।
प्रदर्शन में शामिल महिला किसान अदिति ने गौवंदन योजना लागू करने की मांग की। उन्होंने तीन साल पुराने धान भुगतान का मुद्दा भी उठाया।
किसान नवीन शेष ने गोवंश के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की। उन्होंने धान खरीदी के दौरान टोकन मिलने की परेशानी भी बताई।
सोचिए एक बार। किसान एक ही आंदोलन में भुगतान, खाद और पशुओं की व्यवस्था मांग रहे हैं। इससे उनकी खेती से जुड़ी अलग-अलग समस्याएं सामने आती हैं।
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के किसान भी रायपुर के आंदोलन में शामिल हुए। वहां से पहुंचीं महिला किसान लुकेश्वरी जंघेल ने खदानों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में चूना पत्थर की खदान का विरोध हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे 10 सूत्रीय मांगों वाले प्रदर्शन में शामिल हुईं।
एक महिला किसान ने सड़क निर्माण के नाम पर नहर तोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने इस कार्रवाई का विरोध किया और इसे रोकने की मांग की।
प्रदर्शन में सिंचाई परियोजनाओं से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। किसानों ने सरकार से इन मुद्दों पर ध्यान देने को कहा।
नया रायपुर के प्रभावित किसानों ने भी भारतीय किसान संघ के आंदोलन का समर्थन किया। किसान नेता रूपन चंद्राकर ने अपनी समस्याएं संघ के सामने रखीं।
उन्होंने नया रायपुर से जुड़ी समस्याओं और मुआवजे के मुद्दे पर बातचीत की। रूपन के मुताबिक, संघ ने उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
रायपुर किसान आंदोलन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। इस प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन 2026 से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है।
किसानों के मुताबिक, उन्होंने 16 सितंबर को भी ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद 8 अक्टूबर को कवर्धा में ट्रैक्टर रैली निकाली गई।
किसानों का कहना है कि सरकार उनकी बात सुन रही है। हालांकि, वे बाकी मांगों पर भी जल्द विचार चाहते हैं।
अब बड़ा सवाल लंबित भुगतान और बाकी मांगों पर कार्रवाई का है। मंगलवार को किसानों को केवल विचार करने का आश्वासन मिला। प्रदर्शन के बाद सभी किसान तूता धरना स्थल से लौट गए।
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी किसानों की आय से सीधे जुड़ा मुद्दा है। वर्ष 2022-23 के भुगतान को लेकर किसानों ने 1700 करोड़ रुपए बकाया होने का दावा किया है। यदि भुगतान लंबित है, तो इसका असर किसानों की आर्थिक जरूरतों पर पड़ सकता है। आंदोलन में सिंचाई, खाद, गोवंश और मुआवजे जैसे मुद्दे भी उठे। यह प्रदर्शन किसानों की समस्याओं को सामने लाता है। साथ ही शांतिपूर्ण विरोध और सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाने के लोकतांत्रिक अधिकार की अहमियत भी दिखाता है।
समझें क्या है पूरा मामला
- 27 अक्टूबर 2026 को रायपुर के तूता धरना स्थल पर किसान जुटे।
- भारतीय किसान संघ ने मंत्रालय घेराव के लिए रैली निकाली।
- पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
- किसानों ने धान खरीदी के 1700 करोड़ रुपए बकाए की मांग की।
- करीब एक घंटे बाद किसान ज्ञापन सौंपकर वापस लौट गए।
धान के 1700 करोड़ रुपए मांगे
भारतीय किसान संघ प्रदर्शन में शामिल किसानों ने सरकार की घोषणाओं पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि घोषित राशि का पूरा भुगतान नहीं हुआ। केंद्र की ओर से बढ़ाई गई समर्थन मूल्य की राशि भी देने की मांग उठी।
सरकार की घोषणा पर किसानों ने उठाए सवाल
सरकार की घोषणा के बाद भी किसानों को पूरा भुगतान नहीं मिला है। केंद्र सरकार की ओर से बढ़ाई गई समर्थन मूल्य की राशि भी किसानों को दी जानी चाहिए।
– लालाराम चंद्राकर, जिला अध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, धमतरी
किसानों का सवाल है कि लंबित भुगतान कब तक मिलेगा? आंदोलन में उन्होंने बकाया राशि तत्काल जारी करने की मांग रखी।
मंत्रालय घेराव से पहले रोका
पुलिस ने पहले से बैरिकेडिंग लगाकर सुरक्षा व्यवस्था की थी। किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया। कुछ देर किसान बैरिकेडिंग के पास ही डटे रहे।
किसानों ने रास्ता रोकने पर जताई नाराजगी
अधिकारी नहीं आए, तो हमें प्रदर्शन करने से रोका गया। हमें अपना रास्ता तय करने देना चाहिए। हमारी मांगों को भी तुरंत पूरा किया जाना चाहिए।
– राज कुमार सिन्हा, किसान, कुरुद
इसके बाद किसानों ने पुलिस को संबंधित अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपा। मांगों पर विचार करने का आश्वासन मिलने पर प्रदर्शन समाप्त हुआ।
गौवर्धन खाद को बढ़ावा देने की मांग
किसानों ने रासायनिक खाद पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि जैविक विकल्पों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वे चाहते हैं कि सरकार गौवर्धन खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दे।
खाद और गोवंश पर भी उठाए सवाल
किसान नवीन शेष ने गोवंश के लिए उचित व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की। उन्होंने धान खरीदी के दौरान टोकन मिलने की परेशानी भी बताई।
सोचिए एक बार। किसान एक ही आंदोलन में भुगतान, खाद और पशुओं की व्यवस्था मांग रहे हैं। इससे उनकी खेती से जुड़ी अलग-अलग समस्याएं सामने आती हैं।
चूना पत्थर की खदान का विरोध
उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र में चूना पत्थर की खदान का विरोध हो रहा है। इसी मुद्दे को लेकर वे 10 सूत्रीय मांगों वाले प्रदर्शन में शामिल हुईं।
नहर तोड़ने का भी लगाया आरोप
प्रदर्शन में सिंचाई परियोजनाओं से जुड़ी समस्याएं भी सामने आईं। किसानों ने सरकार से इन मुद्दों पर ध्यान देने को कहा।
नया रायपुर के किसान भी पहुंचे
उन्होंने नया रायपुर से जुड़ी समस्याओं और मुआवजे के मुद्दे पर बातचीत की। रूपन के मुताबिक, संघ ने उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
रायपुर किसान आंदोलन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों के किसानों ने अपनी समस्याएं रखीं। इस प्रदर्शन को छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन 2026 से जुड़े प्रमुख घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है।
पहले भी उठा चुके हैं मांगें
किसानों का कहना है कि सरकार उनकी बात सुन रही है। हालांकि, वे बाकी मांगों पर भी जल्द विचार चाहते हैं।
अब बड़ा सवाल लंबित भुगतान और बाकी मांगों पर कार्रवाई का है। मंगलवार को किसानों को केवल विचार करने का आश्वासन मिला। प्रदर्शन के बाद सभी किसान तूता धरना स्थल से लौट गए।
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