IAS सोनमणि बोरा: प्रशासनिक कुशलता और नवाचार की मिसाल
Harrison Masih | Apr 28, 2026, 16:06 IST
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आईएएस अधिकारी सोनमणि बोरा का जीवन समर्पण, नवाचार और प्रशासनिक दक्षता का बेहतरीन उदाहरण है। असम के जोरहाट में जन्मे सोनमणि बोरा ने छत्तीसगढ़ में कई प्रमुख जिलों में कलेक्टर के रूप में कार्य करते हुए विकास और जनभागीदारी के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किए।
आईएएस सोनमणि बोरा का जन्म 1 अप्रैल 1976 को असम के जोरहाट में हुआ। उनकी जड़ें विश्व के सबसे बड़े नदी द्वीप माजुली से जुड़ी हैं। एक ऐसे परिवार में पले-बढ़े, जहां साहित्य और शिक्षा का गहरा माहौल था। उनके व्यक्तित्व की नींव बचपन में ही मजबूत हो गई। उनके पिता जादब बोरा एक प्रतिष्ठित पत्रकार, लेखक और शिक्षक थे, जिनकी सोच और वैचारिक समृद्धि का असर सोनमणि बोरा के जीवन पर साफ दिखाई देता है।
वर्तमान में वे प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का भी दायित्व संभाल रहे हैं।
गुवाहाटी में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 1993 में कॉटन स्कूल से कला संकाय में बारहवीं बोर्ड परीक्षा में असम टॉप कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज से स्नातक (1996) और फिर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (1998) किया। वे नेट और जेआरएफ जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में भी सफल रहे, जो उनकी शैक्षणिक गहराई को दर्शाता है।
सोनमणि बोरा ने 1999 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में 20 सितंबर 1999 को सेवा ज्वाइन की। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने रतलाम (तत्कालीन मध्यप्रदेश) में सहायक कलेक्टर के रूप में की। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद उन्होंने इस नए राज्य को अपनी कर्मभूमि बनाया। दुर्ग में एसडीएम के तौर पर कार्य करते हुए उन्होंने प्रशासनिक समझ विकसित की। साजा बेमेतरा में एसडीएम रहते हुए उन्होंने पानी बचाओ अभियान शुरू किया था।
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए उस इलाके के वाटर को रिचार्ज किया। बंद हो चुके हैंडपंप को उन्होंने लगातार मॉनिटरिंग करके फिर जिन्दा किया। इस काम को कई साल बिट गए लेकिन आज भी वहां के लोग याद करते हैं। जांजगीर-चाम्पा जिले में जनहित में ऐसे काम किए कि लोगों का उनसे सीधा जुड़ाव हो गया।
![IAS Sonmani Bora]()
कोटमी सुनार क्रोकोडाइल पार्क सोनमणि बोरा की ही देन है। यह पार्क आज भी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है। जांजगीर चांपा कलेक्टर के रूप में श्रमदान से तालाब बनवाकर वहां क्रोकोडाइल पार्क की स्थापना उनकी एक बड़ी उपलब्धि रही है। सोनमणि बोरा के इस काम को देखते हुए उस समय मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने जिले में ट्रांसफर करवाकर ले गए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि लोग धरना प्रदर्शन पर बैठ गए थे।
कलेक्टर के ट्रांसफर के विरोध में लोगों ने 15 दिन तक शहर बंद रखा था। आख़िरकार उन्हें लोगों से अपील करनी पड़ी तब जाकर शहर खुला। कवर्धा, मुंगेली जैसे कई शहरों को नया रूप देने में सोनमणि बोरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे जब जिस पद पर रहे हैं वहां उन्होंने व्यक्तित्व और कार्य से के जरिए अपनी छाप छोड़ी हैं वे बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ, रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ और रायपुर नगर निगम आयुक्त जैसे अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।
IAS सोनमणि बोरा छत्तीसगढ़ के सरगुजा, जांजगीर-चांपा, कबीरधाम, रायपुर और बिलासपुर जैसे पांच जिलों में कलेक्टर रहे हैं। हर जिले में उन्होंने विकास, नवाचार और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी। बिलासपुर संभाग के कमिश्नर के रूप में भी उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया।
![IAS Sonmani Bora]()
उन्होंने राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। जनसंपर्क निदेशक, राज्यपाल के सचिव, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में संयुक्त सचिव, श्रम आयुक्त और हाउसिंग बोर्ड कमिश्नर जैसे पदों पर उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। 2016 में उन्हें भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के लिए चयनित किया गया और 2021 में भूमि संसाधन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। हालांकि उन्होंने अपना डेपुटेशन समय से पहले समाप्त कर राज्य सेवा में वापसी की।
प्रशासनिक अनुभव के साथ उन्होंने वैश्विक स्तर पर भी खुद को निखारा। 2018-19 में उन्होंने अमेरिका की सिरैक्यूज यूनिवर्सिटी के मैक्सवेल स्कूल से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (EMPA) में मास्टर्स किया। इससे उनकी नीतिगत समझ और अधिक व्यापक हुई।
कलेक्टर कबीरधाम रहते उन्होंने 2006 में जनभागीदारी से मात्र 11 घंटे में 37 लाख से अधिक पौधे लगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसे वृक्षमित्र महाअभियान के नाम से जाना गया। यह अभियान लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। इसके अलावा, नदी संरक्षण, योग दिवस आयोजन और जनजागरूकता अभियानों में भी उन्होंने कई रिकॉर्ड स्थापित किए, जो उनके नएपन की सोच को दर्शाते हैं।
सोनमणि बोरा को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं। जनगणना 2011 में बेहतरीन कार्य के लिए उन्हें राष्ट्रपति रजत पदक मिला। नरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रधानमंत्री द्वारा स्क्रॉल ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। इसके अलावा राष्ट्रीय विकास परिषद, सामाजिक न्याय मंत्रालय और विभिन्न संस्थाओं द्वारा उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय पुरस्कारों से नवाजा गया।
सोनमणि बोरा का विवाह भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा की अधिकारी दर्शनिता बोरा अहलूवालिया से हुआ है। उनकी पत्नी भी प्रशासनिक क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। परिवार के साथ संतुलन बनाते हुए उन्होंने अपने करियर को ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
सोनमणि बोरा का जीवन केवल एक आईएएस अधिकारी की कहानी नहीं, बल्कि समर्पण, नवाचार और जनसेवा की मिसाल है। उन्होंने साबित किया कि अगर सोच में स्पष्टता और काम में ईमानदारी हो, तो प्रशासन के जरिए समाज में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ कैडर
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वर्तमान में वे प्रमुख सचिव के पद पर कार्यरत हैं। वे आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के साथ-साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का भी दायित्व संभाल रहे हैं।
प्रतिभा की पहली चमक
जमीनी प्रशासन से शीर्ष पद तक
वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के जरिए उस इलाके के वाटर को रिचार्ज किया। बंद हो चुके हैंडपंप को उन्होंने लगातार मॉनिटरिंग करके फिर जिन्दा किया। इस काम को कई साल बिट गए लेकिन आज भी वहां के लोग याद करते हैं। जांजगीर-चाम्पा जिले में जनहित में ऐसे काम किए कि लोगों का उनसे सीधा जुड़ाव हो गया।
IAS Sonmani Bora
कोटमी सुनार क्रोकोडाइल पार्क सोनमणि बोरा की ही देन है। यह पार्क आज भी पर्यटकों का आकर्षण का केंद्र है। जांजगीर चांपा कलेक्टर के रूप में श्रमदान से तालाब बनवाकर वहां क्रोकोडाइल पार्क की स्थापना उनकी एक बड़ी उपलब्धि रही है। सोनमणि बोरा के इस काम को देखते हुए उस समय मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने जिले में ट्रांसफर करवाकर ले गए। छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ था कि लोग धरना प्रदर्शन पर बैठ गए थे।
कलेक्टर के ट्रांसफर के विरोध में लोगों ने 15 दिन तक शहर बंद रखा था। आख़िरकार उन्हें लोगों से अपील करनी पड़ी तब जाकर शहर खुला। कवर्धा, मुंगेली जैसे कई शहरों को नया रूप देने में सोनमणि बोरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वे जब जिस पद पर रहे हैं वहां उन्होंने व्यक्तित्व और कार्य से के जरिए अपनी छाप छोड़ी हैं वे बिलासपुर नगर निगम के आयुक्त, जिला पंचायत सीईओ, रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ और रायपुर नगर निगम आयुक्त जैसे अहम पदों पर कार्य कर चुके हैं।
प्रभावशाली कार्यकाल
IAS Sonmani Bora
नीतिगत जिम्मेदारियां
व्यापक दृष्टिकोण
बदलाव की नई इबारत
उपलब्धियों की लंबी सूची
संतुलन और सफलता की कहानी
एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व
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