औद्योगिक भांग की नियंत्रित शोधात्मक खेती को लेकर लगी याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

Pravesh Shukla | Aug 09, 2025, 08:43 IST
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औद्योगिक भांग की नियंत्रित शोधात्मक खेती की अनुमति को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता।

बिलासपुर। औद्योगिक भांग की नियंत्रित शोधात्मक खेती की अनुमति को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता। मामले में पहले दिए गए फैसले में कोई त्रुटि नहीं है, जिसे सुधारने की जरूरत हो। इस मामले की मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की खंडपीठ में सुनवाई हुई।

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'रिसर्च के लिए करना चाहते हैं खेती'

याचिकाकर्ता बिलासपुर के तिलक नगर निवासी डॉ. सचिन अशोक काले ने कोर्ट में खुद पेश होकर कहा कि वह अपने खेत में नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय स्थानों जैसे कृषि कॉलेज की भूमि या फिर दूर-दराज वाले क्षेत्र में रिसर्च के लिए भांग की खेती करना चाहते हैं। उनका कहना था कि इसका मकसद भांग का सेवन या धूम्रपान वैध करना नहीं है, बल्कि औद्योगिक और औषधीय संभावनाओं को परखना है।

मिल सकता है बेहतर विकल्प

यचिकाकर्ता ने दावा किया कि अगर यह रिसर्च सफल होती है तो छत्तीसगढ़ की खेती को एक बेहतर विकल्प मिल सकता है। राज्य की ओर से सरकारी वकील ने तर्क दिया कि इससे पहले भी यह मामला जनहित याचिका के रूप में दायर किया गया था, लेकिन पूरी सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया था।

दूसरे कानूनी रास्ते तलाशें याचिकाकर्ता:कोर्ट

कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने फैसले में कहा कि पुनर्विचार याचिका केवल उन्हीं मामलों में स्वीकार की जा सकती है, जहां पहले के आदेश में कोई साफ-सुथरी गलती हो। यहां ऐसा कोई मसला नहीं है। पुनर्विचार का दायरा बेहद सीमित होता है और इसके जरिए कोर्ट खुद अपने ही आदेश की दोबारा सुनवाई नहीं कर सकता। अगर याचिकाकर्ता को फैसले से आपत्ति है, तो इसके लिए दूसरे कानूनी रास्ते मौजूद हैं।

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सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने निर्णयों का हवाला दिया, जिसमें साफ कहा गया है कि पुनर्विचार याचिका का मतलब अपील नहीं है। इसमें केवल वही गलती सुधारी जा सकती है, जो रिकार्ड पर साफ तौर पर नजर आए।

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पांच प्वॉइंट में समझें पूरी खबर

  • कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने औद्योगिक भांग की शोधात्मक खेती के लिए दायर पुनर्विचार याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मामला जनहित याचिका के दायरे में नहीं आता और पहले के फैसले में कोई गलती नहीं है।
  • याचिकाकर्ता का तर्क
    बिलासपुर निवासी डॉ. सचिन अशोक काले ने खुद कोर्ट में पेश होकर कहा कि वे भांग की खेती अपने खेत में नहीं, बल्कि सरकार द्वारा तय स्थानों जैसे कृषि कॉलेज की जमीन पर रिसर्च के लिए करना चाहते हैं, जिसका उद्देश्य सेवन नहीं, बल्कि औद्योगिक और औषधीय उपयोगों की जांच करना है।
  • सरकार का पक्ष और पिछला फैसला
    राज्य सरकार के वकील ने कहा कि यह मामला पहले भी जनहित याचिका के रूप में दायर हो चुका है और कोर्ट उसे पहले ही खारिज कर चुका है।
  • कोर्ट का तर्क और सीमा
    कोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार याचिका केवल तब स्वीकार की जा सकती है जब पहले के फैसले में कोई स्पष्ट गलती हो। पुनर्विचार का दायरा सीमित होता है, यह अपील का माध्यम नहीं है।
  • वैकल्पिक कानूनी रास्तों की सलाह
    कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि अगर उन्हें पहले के फैसले से आपत्ति है तो वे सुप्रीम कोर्ट या किसी अन्य उचित कानूनी माध्यम से राहत की कोशिश कर सकते हैं, लेकिन पुनर्विचार याचिका का आधार उचित नहीं है।
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याचिका पुनर्विचार लायक नहीं: हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि यह याचिका पुनर्विचार के लायक नहीं है। इस वजह से इसे खारिज किया जाता है। कोर्ट ने अंत में यह भी कहा कि, भांग की रिसर्च खेती को लेकर पुनर्विचार याचिका में कोई तथ्य या कानूनी चूक नहीं है। पहले दिए गए फैसले में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं है।

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Chhattisgarh High Court decision

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