खाल बनी बंजर जमीन : पीड़ित जागेश्वरी का एम्स रायपुर में दोबारा इलाज शुरू
Aishwarya Dwivedi | Jun 16, 2026, 18:56 IST
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दुर्लभ त्वचा रोग इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स से जूझ रही जागेश्वरी का एम्स रायपुर में फिर इलाज शुरू हुआ। बाल आयोग की पहल से उसे बेहतर चिकित्सा और नई उम्मीद मिली।
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की रहने वाली 14 वर्षीय जागेश्वरी एक बेहद ही दुर्लभ और दर्दनाक त्वचा रोग 'इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स' (Ichthyosis Hystrix) से जूझ रही हैं। इस बीमारी के कारण उनका पूरा शरीर पेड़ की छाल और कांटों जैसी मोटी परतों से ढक गया है। एक लंबे अंतराल और कठिन सामाजिक परिस्थितियों का सामना करने के बाद, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की तत्परता और मानवीय पहल के कारण जागेश्वरी को एक बार फिर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर में भर्ती कराया गया है, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज दोबारा शुरू हो गया है।
जागेश्वरी की माँ सुबी के अनुसार, अप्रैल 2012 में जन्म के महज तीन महीने बाद ही बच्ची के पैरों पर छोटे-छोटे कांटों जैसे उभार दिखने लगे थे। जागरूकता की कमी और बीमारी की सही समझ न होने के कारण, परिवार ने इसे शुरुआत में किसी ऊपरी हवा, तंत्र-मंत्र या बुरी नजर का असर मान लिया। इसके बाद लंबे समय तक झाड़-फूंक और स्थानीय स्तर पर उपचार का दौर चलता रहा, जिससे जागेश्वरी की स्थिति सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती चली गई।
समय के साथ पूरी त्वचा सूखी, बेहद मोटी और सख्त परतों में तब्दील हो गई। इस शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ जागेश्वरी को गहरा मानसिक और सामाजिक दंश भी झेलना पड़ा। जब भी वह बाहर खेलने जाती, आसपास के बच्चे उसकी शारीरिक बनावट को देखकर उसे चिढ़ाते थे। इस व्यवहार से आहत होकर उसने खुद को घर में समेट लिया और लोगों से मिलना-जुलना पूरी तरह बंद कर दिया।
एम्स रायपुर के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मृत्युंजय सिंह ने बताया कि जागेश्वरी का इलाज साल 2019 में भी इस अस्पताल में किया गया था। उस दौरान उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी और वह लगभग एक महीने तक डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में रही। इलाज से उसकी स्थिति में काफी सुधार भी आया था, लेकिन 'इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स' की प्रकृति ऐसी है कि यह समय के साथ दोबारा उग्र रूप ले लेती है।
![क्या है इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स]()
बीमारी की वजह (ऑटोसोमल डोमिनेंट डिसऑर्डर): यह एक जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारी है जो जींस में गड़बड़ी से होती है। माता-पिता में से किसी एक के भी जींस खराब होने पर बच्चे में इसका खतरा रहता है।
केराटिन प्रोटीन की गड़बड़ी: चमड़ी बनने की प्रक्रिया को 'केराटिनाइजेशन' कहते हैं, जिसमें केराटिन प्रोटीन त्वचा को मजबूत और मुलायम रखता है। इस बीमारी में शरीर पर्याप्त केराटिन नहीं बना पाता, जिससे पुरानी मृत चमड़ी समय पर नहीं झड़ती और नई चमड़ी तेजी से बनने लगती है।
शरीर पर असर: त्वचा बेहद रूखी और मोटी हो जाती है, शरीर में दरारें पड़ने लगती हैं, हाथ-पैर मोड़ने में तेज दर्द होता है और जोड़ों में अकड़न आने के कारण कई बार चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है।
कैंसर का खतरा: कुछ गंभीर मामलों में लंबे समय बाद स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि यह हर मामले में जरूरी नहीं है।
भारत का पहला केस: विशेषज्ञों के अनुसार, जागेश्वरी का यह मामला भारत में इस तरह का पहला दर्ज केस है। दुनिया भर में भी इसके ऐसे बेहद कम मामले सामने आए हैं।
> इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे दवाओं से नियंत्रित रखा जाता है। इसमें त्वचा को फटने से बचाने के लिए यूरिया बेस्ड मॉइश्चराइजर, केराटिनाइजेशन को नियंत्रित करने के लिए ओरल ट्रीटमेंट में रेटिनॉइड्स जैसी दवाएं और जोड़ों की अकड़न रोकने के लिए फिजियोथेरेपी बेहद जरूरी होती है।
जागेश्वरी की इस पीड़ादायक स्थिति की जानकारी मिलने पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने तुरंत संज्ञान लिया। सोमवार को आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्वयं एम्स रायपुर पहुंचकर जागेश्वरी और उसके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने डॉक्टरों की टीम से चर्चा कर बच्ची के स्वास्थ्य का हाल जाना और उसे सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
वर्तमान में एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम जागेश्वरी की विस्तृत जांच कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आगामी रिपोर्ट्स और उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए आगे का कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि उसे इस असहनीय दर्द से राहत दिलाई जा सके और वह एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
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अंधविश्वास और सामाजिक दंश का सामना
समय के साथ पूरी त्वचा सूखी, बेहद मोटी और सख्त परतों में तब्दील हो गई। इस शारीरिक पीड़ा के साथ-साथ जागेश्वरी को गहरा मानसिक और सामाजिक दंश भी झेलना पड़ा। जब भी वह बाहर खेलने जाती, आसपास के बच्चे उसकी शारीरिक बनावट को देखकर उसे चिढ़ाते थे। इस व्यवहार से आहत होकर उसने खुद को घर में समेट लिया और लोगों से मिलना-जुलना पूरी तरह बंद कर दिया।
एम्स में पहले भी चला था इलाज
क्या है इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स? (चिकित्सकीय विश्लेषण)
क्या है इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स
बीमारी की वजह (ऑटोसोमल डोमिनेंट डिसऑर्डर): यह एक जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारी है जो जींस में गड़बड़ी से होती है। माता-पिता में से किसी एक के भी जींस खराब होने पर बच्चे में इसका खतरा रहता है।
केराटिन प्रोटीन की गड़बड़ी: चमड़ी बनने की प्रक्रिया को 'केराटिनाइजेशन' कहते हैं, जिसमें केराटिन प्रोटीन त्वचा को मजबूत और मुलायम रखता है। इस बीमारी में शरीर पर्याप्त केराटिन नहीं बना पाता, जिससे पुरानी मृत चमड़ी समय पर नहीं झड़ती और नई चमड़ी तेजी से बनने लगती है।
शरीर पर असर: त्वचा बेहद रूखी और मोटी हो जाती है, शरीर में दरारें पड़ने लगती हैं, हाथ-पैर मोड़ने में तेज दर्द होता है और जोड़ों में अकड़न आने के कारण कई बार चलना-फिरना तक मुश्किल हो जाता है।
कैंसर का खतरा: कुछ गंभीर मामलों में लंबे समय बाद स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि यह हर मामले में जरूरी नहीं है।
भारत का पहला केस: विशेषज्ञों के अनुसार, जागेश्वरी का यह मामला भारत में इस तरह का पहला दर्ज केस है। दुनिया भर में भी इसके ऐसे बेहद कम मामले सामने आए हैं।
इलाज और नियंत्रण की प्रक्रिया:
बाल आयोग की पहल और वर्तमान स्थिति
वर्तमान में एम्स के विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम जागेश्वरी की विस्तृत जांच कर रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आगामी रिपोर्ट्स और उसकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए आगे का कस्टमाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाएगा, ताकि उसे इस असहनीय दर्द से राहत दिलाई जा सके और वह एक बार फिर सामान्य जीवन की ओर लौट सके।
FAQ
- 'इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स' (Ichthyosis Hystrix) किस प्रकार की बीमारी है?
उत्तर: यह एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक त्वचा विकार (Genetic Skin Disorder) है। इसे 'ऑटोसोमल डोमिनेंट डिसऑर्डर' (Autosomal Dominant Disorder) भी कहा जाता है, जो जींस में गड़बड़ी के कारण होता है। - 'इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स' में त्वचा का रंग-रूप कैसा हो जाता है और इसे आम भाषा में क्या कहा जाता है?
उत्तर: इस बीमारी में त्वचा अत्यधिक शुष्क होकर सूखी, सख्त और पेड़ की छाल या कांटों जैसी मोटी परतों में बदलने लगती है। यही कारण है कि इसे आम भाषा में "खाल को बंजर जमीन सा बनाने वाली बीमारी" भी कहा जाता है। - भारत में 'इकथियोसिस हिस्ट्रिक्स' का पहला आधिकारिक तौर पर दर्ज (First Recorded) मामला कहाँ से सामने आया है?
उत्तर: इस बीमारी का भारत में पहला दर्ज मामला छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की 14 वर्षीय बालिका (जागेश्वरी) का है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह देश का ऐसा पहला ज्ञात मामला है।
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