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News in Short :
. 9 जनवरी से शुरु हुआ आयोजन 13 जनवरी को खत्म
. छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में हुआ आयोजन
. आयोजन पर लगे भ्रष्टाचार और वैधानिकता के आरोप
. बृजमोहन अग्रवाल ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
. कांग्रेस ने ईओडब्ल्यू के स्पेशल कोर्ट में लगाई याचिका
. दोनों कोर्ट ने स्वीकार की याचिका,सरकार को नोटिस
News in Detail :
ऐसे शुरु हुआ विवाद :
जंबूरी के आयोजन के पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने वैधानिक अध्यक्ष के नाते स्काउट गाइड काउंसिल की बैठक ली। इस बैठक में घोषित किया गया कि जंबूरी स्थगित की जाती है। काउंसिल ने इसके कई कारण गिनाए। कहा गया कि काउंसिल की अनुमति और सहमति के बिना रायपुर की जगह बालोद में जंबूरी का आयोजन तय किया गया।
टेंडर में भ्रष्टाचार किया जा रहा है। राज्य सरकार ने 10 करोड़ रुपए स्काउट गाइड के खाते में भेजने की जगह जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में भेजे। इस तरह 15 करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। वहीं राज्य सरकार ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को स्काउट गाइड का अध्यक्ष घोषित कर दिया। स्काउट गाइड के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी बृजमोहन के दावे को खारिज करते हुए गजेंद्र यादव को ही राज्य का अध्यक्ष बताया।
इस तरह जंबूरी का आयोजन शुरु हो गया। बृजमोहन अपने वैधानिक अध्यक्ष के दावे पर कायम रहे। उन्होंने गजेंद्र यादव की नियुक्ति को चुनौती और भ्रष्टाचार को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने याचिका एडमिट करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर दिया।
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टेंडर में इस तरह हुआ काम :
- टेंट लगाया गया - 1 करोड़ 75 लाख 78 हजार 600 रुपए
- टॉयलेट - 1 करोड़ 68 लाख 60 हजार रुपए
- आम आदमी और खिलाड़ियों के लिए टॉयलेट - 88 लाख रुपए
- नहाने के लिए बाथरुम पुरषों के लिए - 18 लाख रुपए
- नहाने के लिए बाथरुम महिलाओं के लिए - 36 लाख रुपए
- यूरिनल ब्लॉक - 13 लाख रुपए
- वीआईपी टॉयलेट - 9 लाख 60 हजार रुपए
- वीवीआईपी टॉयलेट - 4 लाख रुपए
कांग्रेस ने की भ्रष्टाचार की शिकायत :
जंबूरी के मुद्दे की लड़ाई में कांग्रेस भी मैदान में आ गई। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री सुबोध हरितवाल ने सक्षम विशेष न्यायालय एसीबी/ईओडब्ल्यू के सामने जंबूरी 2026 में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए याचिका दायर की। इस याचिका को कोर्ट ने स्वीकार करते हुए 20 जनवरी 2026 को सुनवाई के लिए मौका दिया है।
याचिका में मंत्री गजेंद्र यादव, शामिल व्यापारी, अधिकारी के खिलाफ दायर की गई है। सुबोध हरितवाल ने कहा कि जंबूरी आयोजन का टेंडर 03 जनवरी को सुबह 12 बजे जेम पोर्टल पर खुलना था, लेकिन इससे पहले ही आयोजन स्थल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज बालोद में एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया।
मौके पर भारत किराया भंडार के ट्रक, सामग्री और श्रमिकों की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि काम पूरी तैयारी के साथ शुरू हो चुका है। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी ही नहीं हुई थी, तो कंपनी को किसके आदेश पर काम शुरू करने की छूट मिली। यह भी सवाल उठ रहा है कि जेम पोर्टल जैसी ऑनलाइन और कथित तौर पर पारदर्शी प्रणाली के बावजूद टेंडर की जानकारी पहले ही कैसे लीक हो गई।
क्या टेंडर खुलने से पहले ही मंत्री गजेंद्र यादव और अधिकारियों ने कंपनी को यह भरोसा दे दिया था कि काम उसी को मिलेगा। यदि ऐसा है, तो फिर नियमों का पालन करते हुए टेंडर खुलने का इंतजार करने वाले अन्य निविदाकर्ताओं का क्या कसूर था और उनके साथ हुए संभावित नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
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मंत्री पर उठाए सवाल :
एक तरफ जंबूरी पर जंग छिड़ी हुई थी तो दूसरी तरफ बालोद में जंबूरी का आयोजन भी शुरु हो गया। 9 जनवरी से शुरु हुआ ये आयोजन 13 जनवरी को खत्म भी हो गया। लेकिन विवाद की आग और बढ़ती जा रही है। इस विवाद में बीजेपी भी दो खेमों में बंट गई है। बृजमोहन की नाराजगी पर गजेंद्र यादव ने कहा कि वे बड़े भाई हैं उनको मना लेंगे। लेकिन इस विवाद के बारे में गजेंद्र यादव बात को टालते रहे। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी किसी को भुगतान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इन बातों को छोड़िए और आयोजन का आनंद उठाइए।
Sootr Knowledge :
भारत स्काउट एंड गाइड वो संवैधानिक संस्था होती है जो युवाओं को आगे बढ़ने का बेहतर मौका उपलब्ध कराती है। जंबूरी भी एक ऐसा आयोजन है जो नेशनल लेवल पर हर बार अलग अलग राज्यों में होता है। इसमें देशभर के युवा भाग लेते हैं और खेल के कौशल और अपनी प्रतिभा दिखाते हैं। आमतौर पर स्कूल शिक्षा मंत्री को इस संस्था के राज्य के पदेन अध्यक्ष का दायित्व मिलता है। हालांकि इस बार के विवाद में यह दावा किया गया था कि अध्यक्ष के कार्यकाल का पांच साल किया गया है। बृजमोहन अग्रवाल ने इसी नियम को अपनी वैधानिकता का आधार बनाया है।
डाक्यूमेंट :
द सूत्र ने जिन बिंदुओं को इस खबर में उठाया है उसके सारे दस्तावेज मौजूद हैं। द सूत्र के पास टेंडर की कॉपी और क्या काम कितने का और अन्य दस्तावेज भी हैं।
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Important Points :
. आयोजन खत्म लेकिन विवाद बढ़ा
. अपने अपने दावे पर कायम बृजमोहन और गजेंद्र
. भ्रष्टाचार के घेरे में आया आयोजन
. वैधानिकता पर भी उठे सवाल
अब आगे क्या :
अब इस विवाद की गेंद दो कोर्ट के पाले में चली गई है। 20 जनवरी को ईओडब्ल्यू कोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगी। यह याचिका कांग्रेस ने लगाई है। वहीं 12 फरवरी को हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। बृजमोहन की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है। यानी इस विवाद की आग को अब अदालतों के फैसलों का पानी ही पड़ेगा तभी यह शांत हो पाएगी।
निष्कर्ष :
यह पूरा विवाद यह बताता है कि किस तरह संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग या दुरुपयोग किया जाता है। ऐसी संस्थाओं में वर्चस्व के लिए एक ही पार्टी में विवाद की नौबत आ जाती है। इसमें मुश्किल ये भी है कि पार्टी को दो फाड़ होना पड़ता है। इसलिए राजनीतिक अहम से दूर होकर ऐसी संस्थाओं को युवाओं के हित में काम करने पर फोकस करना चाहिए।
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