बृजमोहन या गजेंद्र में कौन है असली,कौन है नकली, बीजेपी के अंदर जंबूरी पर जंग, असली अध्यक्ष को लेकर फंस गया पेंच

छत्तीसगढ़ में जंबूरी को लेकर जंग छिड़ गई है। स्काउट गाइड का राज्य अध्यक्ष कौन है इसको लेकर बीजेपी दो फाड़ हो गई है। सांसद बृजमेाहन अग्रवाल का वैधानिक अध्यक्ष का दावा इसलिए है क्योंकि नियमों संसोधन हुआ था और बृजमोहन को पांच साल के लिए अध्यक्ष बनाया गया था।

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Arun Tiwari
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News in Short :

. बृजमेाहन अग्रवाल का स्काउट गाइड के वैधानिक अध्यक्ष का दावा
. गजेंद्र यादव का मंत्री के नाते पदेन अध्यक्ष का दावा
. राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल यादव ने बृजमेाहन का दावा खारिज किया
. असली-नकली अध्यक्ष पद छिड़ी जंग, मामला हाईकोर्ट पहुंचा
. बृजमोहन को मनाने के लिए डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने की मुलाकात

News in Detail :

जंबूरी पर जंग: 

छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड का असली अध्यक्ष कौन है। यह वो सवाल है जो इस समय छत्तीसगढ़ की राजनीति में उबाल लाए हुए है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल का दावा वैधानिक अध्यक्ष को लेकर है। वहीं गजेंद्र यादव स्कूल शिक्षा मंत्री के नाते पदेन अध्यक्ष बन गए हैं।

छत्तीसगढ़ स्काउट एवं गाइड परिषद को लेकर निर्वाचित अध्यक्ष सांसद बृजमोहन अग्रवाल और पदेन अध्यक्ष बन गए मंत्री गजेंद्र यादव के बीच के विवाद में शुक्रवार को दिल्ली से आए स्काउट एवं गाइड के राष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल जैन ने बृजमोहन अग्रवाल के दावे को खारिज कर दिया। द सूत्र के पास वो दस्तावेज आए हैं जिसमें ये नियम संशोधन है कि स्काउट गाइड के अध्यक्ष कार्यकाल 5 साल रहेगा। इस लिहाज से बृजमोहन अग्रवाल 2029 तक वैधानिक अध्यक्ष के लिए निर्वाचित हैं। 

बृजमेाहन ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप : 

बृजमोहन अग्रवाल ने नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी में सीधे 15 करोड़ के भ्रष्टाचार के आरोप ही नहीं लगाए हैं बल्कि गजेंद्र यादव की नियुक्ति को भी अवैधानिक कहा है। बृजमोहन अग्रवाल ने सीधा आरोप लगाया है कि बालोद में जंबूरी के आयोजन के लिए टेंट से लेकर भोजन व्यवस्था तक के काम हो जाने के बाद टेंडर जारी किए गए और अपने एक चहते ठेकेदार/सप्लायर को ही काम दिलवाया गया।

प्रदेश की भाजपा सरकार भी अपनी ही पार्टी के सांसद के लगाए आरोपों पर चुप है। सूत्र कहते हैं कि बृजमोहन अग्रवाल के आरोपों में एक यह भी है कि राज्य सरकार से राष्ट्रीय जंबूरी के लिए जारी की गई 10 करोड़ रुपयों की राशि स्काउट एवं गाइड के खाते में जमा होने की बजाए आयोजन के जिले बालोद के जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में जमा कर दी गई। पदेन अध्यक्ष गजेंद्र जैन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के दिग्गज पदाधिकारी रह चुके बिसरा राम यादव के पुत्र हैं।

इस नाते गजेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक पार्टी संगठन से जुड़े लोगों का साथ मिल रहा है,ऐसी चर्चा है।लेकिन पहली बार विधायक बने गजेन्द्र यादव का अपना राजनीतिक कद बृजमोहन अग्रवाल के मुकाबले बेहद छोटा है। ऐसे में भाजपा की राजनीति के प्रेक्षक इस बात पर भी हैरान हैं कि पार्टी छत्तीसगढ़ के अपने एक अत्यंत प्रभावशाली नेता की आपत्तियों को दरकिनार कर उनके लिए असुविधाजनक स्थिति ही खड़ी कर रही है।

बृजमोहन को मनाने की कोशिश : 

वहीं बृजमोहन अग्रवाल को मनाने की कोशिशें भी शुरु हो गई हैं। डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात बंद कमरे में लंबी चली। जानकारी तो यहां तक है कि विजय शर्मा ने पहले जंबूरी जाने का दौरा बना लिया था लेकिन इस विवाद के बाद उन्होंने जंबूरी से दूरी बना ली। वहीं गजेंद्र यादव कहते हैं कि बृजमोहन अग्रवाल उनके लिए बड़े भाई के समान हैं। उनसे मिलकर सारी स्थिति साफ की जाएगी। 

Sootr Knowledge

    दस्तावेज के मुताबिक भारत स्काउट एंड गाइड छत्तीसगढ़ ने 8.10.2024 को परिषद की बैठक में सभी सदस्यों की आम सहमति से राज्य के उप नियम में आवश्यक संशोधन करने के लिए प्रस्ताव पारित किया था। संशोधन में यह स्पष्ट किया गया था कि आने वाले 5 वर्षों तक राज्य अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल रहेंगे।

    उपनियम के कंडिका 10 के अनुसार शिक्षा मंत्री  को संरक्षक पद हेतु आमंत्रित किया जाएगा। इस संशोधन के अनुमोदन करने के लिए 21.12.2024 को भारत स्काउट्स एंड गाइड्स छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय मुख्यालय को पत्र लिखा था। जिसके जवाब में 15.04.2025 को एक पत्र के माध्यम से राष्ट्रीय मुख्यालय ने सक्षम अधिकारी द्वारा सभी  संशोधन को स्वीकृति देकर अनुमोदित करने की जानकारी दी थी।

    अब आगे क्या : 

    यह पूरा विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। बृजमोहन अग्रवाल ने गजेंद्र यादव की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चैलेंज किया है। जल्द ही हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा। इसके बाद ही तय हो पाएगा कि आखिर राज्य स्काउड गाइड का असली अध्यक्ष कौन है। बहरहाल बीजेपी तो इस मामले में दो फाड़ हो ही गई है। बालोद में जंबूरी का आयोजन तो चल रही रहा है। इसका उद्घाटन राज्यपाल डेका ने किया। वहीं सीएम विष्णुदेव साय ने इस आयोजन की खूब तारीफ की है।  

    डाक्यूमेंट:

    नियम संशोधन की कॉपी

    निष्कर्ष : 

    यह पूरा विवाद यह बताता है कि किस तरह संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिक उपयोग या दुरुपयोग किया जाता है। ऐसी संस्थाओं में वर्चस्व के लिए एक ही पार्टी में विवाद की नौबत आ जाती है। इसमें मुश्किल ये भी है कि पार्टी को दो फाड़ होना पड़ता है। इसलिए राजनीतिक अहम से दूर होकर ऐसी संस्थाओं को युवाओं के हित में काम करने पर फोकस करना चाहिए। 

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