बिलासपुर हाईकोर्ट : जिंदा कोटवार को मृत घोषित करने वाला आदेश निरस्त
Aishwarya Dwivedi | Jul 20, 2026, 15:32 IST
जशपुर: मृत कोटवार को बर्खास्त करने के मामले में हाईकोर्ट का आदेश
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर कोटवार पद से हटाने का आदेश निरस्त कर दिया है। अदालत ने सरगुजा कमिश्नर को मामले की पुनः सुनवाई का निर्देश दिया।
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ में सरकारी लापरवाही का एक अजीब मामला सामने आया है।
- जशपुर के कोटवार को कागजों में मृत घोषित कर दिया गया।
- इसके बाद कमिश्नर कोर्ट ने उनकी नियुक्ति निरस्त कर दी।
- पीड़ित कोटवार ने बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- हाईकोर्ट ने अब कमिश्नर कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया है।
कागजों में मृत, नौकरी गई
कोटवार नियुक्ति का पूरा विवाद
इसके बाद मामला सरगुजा कमिश्नर कोर्ट पहुंचा। वहां सुबोध तिर्की ने दूसरी अपील दाखिल की। कमिश्नर ने 18 जून 2018 को फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि मरियानुस एक्का अब जीवित नहीं हैं। इस आधार पर नियुक्ति रद्द कर दी गई।
हाईकोर्ट में दी गई चुनौती
उसने खुद यह याचिका दायर की है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की बेंच ने सुनवाई की। अदालत ने मामले की गंभीरता को समझा। राज्य सरकार को जांच के आदेश दिए गए। सरकार से पूछा गया कि याचिकाकर्ता जीवित है या नहीं।
सरकार ने माना- कोटवार जीवित है
हाईकोर्ट ने मामले को वापस कमिश्नर कोर्ट भेज दिया। अब वहां गुण-दोष के आधार पर सुनवाई होगी। कानून के अनुसार फैसला लिया जाएगा। कोर्ट ने सभी पक्षों को 19 अगस्त 2026 को कमिश्नर कोर्ट में उपस्थित होने को कहा है।
FAQ
- बिलासपुर हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
उत्तर: बिलासपुर हाईकोर्ट ने सरगुजा कमिश्नर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें जीवित कोटवार को कागजों में मृत घोषित कर पद से हटा दिया गया था। कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है। - छत्तीसगढ़ में कोटवार की नियुक्ति का अधिकार किसके पास होता है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (CG Land Revenue Code) के नियमों के तहत कोटवार की नियुक्ति और उससे जुड़े शुरुआती विवादों का निपटारा तहसीलदार या उप-विभागीय अधिकारी (SDM) स्तर पर किया जाता है। इसके खिलाफ प्रथम या द्वितीय अपील कमिश्नर और हाईकोर्ट में की जा सकती है। - कोटवार किसे कहते हैं और इनके क्या कार्य होते हैं?
उत्तर: कोटवार ग्रामीण भारत (विशेषकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़) में राजस्व प्रशासन का एक जमीनी स्तर का कर्मचारी होता है। इसका मुख्य कार्य गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद करना, सरकारी सूचनाएं ग्रामीणों तक पहुंचाना, जमीन से जुड़े सर्वे में सहयोग करना और गांव में जन्म-मृत्यु का रिकॉर्ड रखना होता है।
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