नागपंचमी पर जशपुर में लगता है नाग दरबार, इंसान पर सवार होकर दर्शन देते हैं नागदेव
Aishwarya Dwivedi | Aug 17, 2026, 13:16 IST
जशपुर-नाग-दरबार-बांकी-श्री-नदी-इतिहास
नागपंचमी पर जशपुर के सिटोंगा में अनोखा नाग दरबार सजता है। यहां बांकी और श्री नदियों को नाग-नागिन मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि नागदेव श्रद्धालुओं पर सवार होते हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर के पास सिटोंगा गांव स्थित है।
- यहां हर साल नागपंचमी पर नाग दरबार सजता है।
- खेतों के बीच बने मंदिर में बांकी और श्री की पूजा होती है।
- बांकी और श्री को नाग-नागिन का रूप माना जाता है।
- मान्यता है कि इसी स्थान से दोनों नदियों का उद्गम हुआ।
नागपंचमी पर अनोखा नाग दरबार
बांकी और श्री नदी की अनोखी कहानी
एक दिन खेत में उन्हें सांप के दो अंडे मिले। भूख के कारण उन्होंने वे अंडे खा लिए। अंडे खाते ही उनका शरीर सर्प रूप में बदलने लगा। डर के मारे वे खेत के पास बने कुंड में छिप गए। जब माता-पिता वहां पहुंचे, तो वे डरकर भागने लगे। बांकी पश्चिम दिशा की ओर भागी। वहीं श्री पूर्व दिशा की ओर भागा।
लोकमान्यता के अनुसार, उसी कुंड से दो नदियों का जन्म हुआ। बांकी के भागने से बांकी नदी बनी। श्री के भागने से श्री नदी का उद्गम हुआ। आज भी लोग इन नदियों को बहुत पवित्र मानते हैं।
नाग दरबार में दिखता है अद्भुत नजारा
यह नजारा देखने में बहुत रहस्यमयी और डरावना लगता है। इसके बाद श्रद्धालुओं को नदी के पास वाले कुंड में ले जाया जाता है। वहां उन्हें स्नान कराया जाता है। फिर उन्हें दूध पिलाया जाता है। दूध पीते ही श्रद्धालु शांत हो जाते हैं।
यह परंपरा वर्षों से बिना किसी बदलाव के चली आ रही है। स्थानीय लोगों की इस मंदिर पर अटूट श्रद्धा है। नागपंचमी पर यहां मेला जैसा माहौल रहता है। प्रकृति और आस्था का यह संगम जशपुर की पहचान बन चुका है।
FAQ
- जशपुर का नाग दरबार किस गांव में लगता है?
उत्तर: जशपुर का प्रसिद्ध नाग दरबार सिटोंगा गांव में लगता है। यह स्थान जशपुरनगर के पास स्थित है। यहां नागपंचमी पर विशेष पूजा होती है। - बांकी और श्री नदियों का उद्गम कैसे माना जाता है?
उत्तर: लोकमान्यता के अनुसार, सर्प रूप में बदले भाई-बहन जिस कुंड में छिपे थे, वहीं से इन नदियों का उद्गम हुआ। बांकी पश्चिम और श्री पूर्व दिशा में भागे थे। - नाग दरबार में श्रद्धालुओं के साथ क्या अनोखी घटना होती है?
उत्तर: माना जाता है कि पूजा के दौरान नागदेव श्रद्धालुओं के शरीर पर आते हैं। कुंड में स्नान कराने और दूध पिलाने के बाद वे शांत होते हैं।
यह खबरें भी पढ़ें...
नागपंचमी पर 28 जुलाई को रात 12 बजे खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट, 24 घंटे होंगे दर्शन
नागपंचमी पर कांग्रेस ने BJP को घेरा, दिग्विजय बोले- आस्तीन के सांपों से बचो, सिंघार ने कह दी इतनी बड़ी बात
365 दिनों में केवल नागपंचमी पर खुलते हैं ये मंदिर, जानें क्या है खासियत
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA