बाबा बागेश्वर की कथा को लेकर दो नेताओं में भिड़ंत, अमरजीत सिंह और बसंत अग्रवाल में धक्का मुक्की
Arun Tiwari | Mar 30, 2026, 14:38 IST
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कोरबा में बाबा बागेश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की हनुमंत कथा के आयोजन में विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत और बीजेपी नेता बसंत अग्रवाल के बीच आयोजन को लेकर टकराव हुआ।
Raipur. छत्तीसगढ़ के कोरबा में चल रही बाबा बागेश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में विवाद खड़ा हो गया है। मामला कथा से ज्यादा उनकी सेवा को लेकर है। बाबा बागेश्वर जहां ठहरे हैं मामला उस जगह से जुड़ा हुआ है।
बाबा की कथा के आयोजन को लेकर कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत और बीजेपी नेता बसंत अग्रवाल के भी भिड़ंत हो गई। समर्थकों ने आपस में धक्का मुक्की कर दी। कहा जा रहा है कि आयोजन में प्रमुख भूमिका भगत ने निभाई और ऐन मौके पर मुखिया बसंत अग्रवाल बन गए।
कोरबा में आयोजित हनुमंत कथा जहां एक ओर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर इस आयोजन के भीतर ही विवाद की चिंगारी फूट पड़ी है। आयोजन से जुड़े लोगों के बीच बढ़ती खटपट कटघोरा स्थित अग्रसेन भवन में टकराव के रूप में सामने आई। यहां कथावाचक बाबा बागेश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ठहरे हुए हैं।
यह विवाद अचानक नहीं हुआ बल्कि आयोजन की तैयारियों के दौरान ही अंदरखाने असंतोष पनप रहा था। रविवार रात करीब 9 बजे यह तनाव उस वक्त खुलकर सामने आया जब कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ अग्रसेन भवन पहुंचे। वे धीरेन्द्र शास्त्री से मुलाकात करना चाहते थे। लेकिन वहां मौजूद बसंत अग्रवाल के समर्थकों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले तीखी बहस हुई। जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई थी। विवाद की खबर मिलते ही दोनों पक्षों के समर्थक भी बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए। जिससे माहौल और गरमा गया।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस दौरान बसंत अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे और विवाद में शामिल हो गए। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझाइश के बाद मामला शांत करा लिया गया और पुलिस तक बात नहीं पहुंची।
इस पूरे विवाद के बीच एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सूत्रों के हवाले से आरोप लगाए जा रहे हैं कि बसंत अग्रवाल के माध्यम से कथित तौर पर पैसे लेकर लोगों को अग्रसेन भवन के भीतर प्रवेश दिया जा रहा था। इसके साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि वे आयोजन की व्यवस्थाओं में हस्तक्षेप कर रहे हैं और मूल आयोजकों को दरकिनार करने की कोशिश की जा रही है।
इतना ही नहीं व्यवस्थाओं के नाम पर लाखों रुपये के खर्च का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। जिससे आयोजन समिति के भीतर आर्थिक असहमति और गहराती जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है।
हनुमंत कथा का आयोजन “अपना घर सेवा आश्रम” के बैनर तले किया जा रहा है। इस आयोजन में अमरजीत सिंह की अहम भूमिका बताई जा रही है। जबकि डॉ. पवन सिंह कार्यक्रम सचिव के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राणा मुखर्जी समेत पूरी टीम लंबे समय से इस आयोजन की तैयारियों में जुटी हुई थी। बताया जा रहा है कि अंतिम चरण में बसंत अग्रवाल की बढ़ती सक्रियता के बाद से ही आयोजकों के बीच असंतोष बढ़ने लगा था। अब यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है और आयोजन समिति के भीतर दरार साफ नजर आने लगी है।
कोरबा शहर में पिछले कुछ दिनों से बड़े पैमाने पर लगे बैनर, पोस्टर और फ्लेक्स भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन प्रचार सामग्रियों में बसंत अग्रवाल की सक्रियता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उन्होंने कथित तौर पर आयोजन के लिए फंडिंग की है और कथावाचक के करीबी माने जाते हैं।
कुछ लोग इसे अपनी छवि निर्माण और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं। बड़े नेताओं के साथ तस्वीरों वाले फ्लेक्स और प्रचार सामग्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल अग्रसेन भवन में हुआ विवाद शांत हो गया है, लेकिन जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं उससे साफ है कि मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।
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बाबा की कथा के आयोजन को लेकर कांग्रेस के पूर्व मंत्री अमरजीत सिंह भगत और बीजेपी नेता बसंत अग्रवाल के भी भिड़ंत हो गई। समर्थकों ने आपस में धक्का मुक्की कर दी। कहा जा रहा है कि आयोजन में प्रमुख भूमिका भगत ने निभाई और ऐन मौके पर मुखिया बसंत अग्रवाल बन गए।
हनुमंत कथा में घमासान:
यह विवाद अचानक नहीं हुआ बल्कि आयोजन की तैयारियों के दौरान ही अंदरखाने असंतोष पनप रहा था। रविवार रात करीब 9 बजे यह तनाव उस वक्त खुलकर सामने आया जब कार्यक्रम संयोजक अमरजीत सिंह अपने समर्थकों के साथ अग्रसेन भवन पहुंचे। वे धीरेन्द्र शास्त्री से मुलाकात करना चाहते थे। लेकिन वहां मौजूद बसंत अग्रवाल के समर्थकों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया।
दोनों पक्षों में धक्का मुक्की :
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि इस दौरान बसंत अग्रवाल भी मौके पर पहुंचे और विवाद में शामिल हो गए। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझाइश के बाद मामला शांत करा लिया गया और पुलिस तक बात नहीं पहुंची।
पैसों के लेन-देन पर आरोप :
इतना ही नहीं व्यवस्थाओं के नाम पर लाखों रुपये के खर्च का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। जिससे आयोजन समिति के भीतर आर्थिक असहमति और गहराती जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है।
मुख्य आयोजकों में दखल से बढ़ी नाराजगी :
प्रचार-प्रसार को लेकर भी सवाल :
कुछ लोग इसे अपनी छवि निर्माण और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं। बड़े नेताओं के साथ तस्वीरों वाले फ्लेक्स और प्रचार सामग्री को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल अग्रसेन भवन में हुआ विवाद शांत हो गया है, लेकिन जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं उससे साफ है कि मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।
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