हमलों का मास्टरमाइंड मल्लेश एके-47 लेकर बीएसएफ कैंप पहुंचा सरेंडर करने

कांकेर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। डीवीसीएम रैंक का माओवादी नेता मल्लेश ने छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप में अपनी AK-47 रायफल के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। उसने ग्रामीणों के साथ कैंप पहुंचकर मुख्यधारा में लौटने की घोषणा की।

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Rajesh Lahoti
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Kanker. नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। डीवीसीएम रैंक का माओवादी नेता मल्लेश हथियारों के साथ सीधे बीएसएफ कैंप पहुंच गया और सुरक्षा बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। मल्लेश ने छोटेबेठिया स्थित बीएसएफ कैंप में अपनी AK-47 रायफल के साथ हथियार डालते हुए मुख्यधारा में शामिल होने की घोषणा की।

माओवादी मल्लेश ने ग्रामीणों के साथ कैंप पहुंचकर समर्पण किया। बताया जा रहा है कि उसने बीएसएफ अधिकारियों के सामने हथियार डालकर नक्सल संगठन से पूरी तरह अलग होने की बात कही। समर्पण की प्रक्रिया बीएसएफ सेक्टर मुख्यालय की जी ब्रांच की मौजूदगी में पूरी हुई।

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बीएसएफ कैंप में सीधे पहुंचा माओवादी नेता

जानकारी के अनुसार मल्लेश ने बीएसएफ  के छोटेबेठिया कैंप में पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। इस दौरान 94वीं वाहिनी के कमांडेंट राघवेंद्र सिंह भी मौजूद रहे। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार मल्लेश डीवीसीएम (डिविजनल कमेटी मेंबर) स्तर का सक्रिय माओवादी था और संगठन के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुका था।

Surrender
मल्लेश की AK-47 रायफल

सूत्रों के मुताबिक मल्लेश लंबे समय से संगठन की गतिविधियों से असंतुष्ट था और क्षेत्र में बढ़ते दबाव के कारण उसने हथियार छोड़ने का फैसला किया।

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ग्रामीणों के साथ पहुंचा, भरोसे का मामला 

मल्लेश का ग्रामीणों के साथ कैंप पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए खास संकेत माना जा रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि स्थानीय स्तर पर माओवादी संगठन की पकड़ कमजोर हो रही है और ग्रामीण अब मुख्यधारा की ओर लौटने लगे हैं।

पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका

बताया जा रहा है कि इस आत्मसमर्पण के पीछे स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की लगातार समझाइश और संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद मल्लेश ने हथियार छोड़ने का फैसला किया।

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संगठन को बड़ा झटका

डीवीसीएम स्तर के माओवादी का एके-47 के साथ आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समर्पण से माओवादी संगठन की आंतरिक स्थिति और कमजोर होगी और अन्य नक्सलियों पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार मल्लेश से पूछताछ के बाद संगठन की गतिविधियों से जुड़ी अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है, जो भविष्य की नक्सल विरोधी कार्रवाई में उपयोगी साबित हो सकती है।

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