12 हजार मनरेगा कर्मचारी हड़ताल पर जाने को तैयार, 1 जुलाई तक का अल्टीमेटम
VINAY VERMA | Jun 24, 2026, 14:17 IST
मनरेगा कर्मचारियों की हड़ताल की चेतावनी
छत्तीसगढ़ में नियमितीकरण की मांग को लेकर 12 हजार मनरेगा कर्मचारी 1 जुलाई के अल्टीमेटम के साथ हड़ताल पर जाने की तैयारी में हैं, जिससे बड़ा आंदोलन खड़ा हो सकता है।
RAIPUR : छत्तीसगढ़ में एक बार फिर नियमितीकरण और सेवा सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। इस बार मोर्चा संभाला है मनरेगा कर्मचारियों ने। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ का कहना है कि वादे के तहत 20 महीने पहले फाइल चली लेकिन सरकार उसे दबाकर बैठी है।
महासंघ ने सरकार को 1 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के करीब 12 हजार कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। महासंघ ने मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मनरेगा आयुक्त और सभी कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की औपचारिक चेतावनी दे दी है।
महासंघ के अनुसार 1 जुलाई तक सकारात्मक घोषणा नहीं होने पर 2 से 3 जुलाई तक प्रदेश के सभी जिलों में जनपद और जिला स्तर पर तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 4 जुलाई को राजधानी रायपुर में विशाल रैली और धरना प्रदर्शन आयोजित होगा। संगठन का दावा है कि इस आंदोलन में प्रदेशभर के लगभग 12 हजार मनरेगा और वीबीजी रामजी कर्मचारी शामिल होंगे।
महासंघ का आरोप है कि मनरेगा कर्मचारियों ने पिछले दो दशकों में ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके काम के आधार पर छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर एक दर्जन से अधिक पुरस्कार भी मिले हैं।
इसके बावजूद कर्मचारी आज भी अस्थायी व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। न नौकरी की सुरक्षा है, न सामाजिक सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। कर्मचारियों का कहना है कि पुरस्कार सरकार को मिले, लेकिन संघर्ष और असुरक्षा उनके हिस्से आई।
कर्मचारियों ने सरकार को उसके पुराने वादे भी याद दिलाए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति बनाई गई थी। समिति को 15 दिन में रिपोर्ट देने का जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि 22 महीने बीत जाने के बाद भी समिति की रिपोर्ट के आधार पर कोई ठोस नीति लागू नहीं की गई। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
महासंघ की सबसे बड़ी मांग सभी मनरेगा और वीबीजी रामजी कर्मचारियों का नियमितीकरण है। जब तक नियमितीकरण नहीं होता, तब तक मानव संसाधन नीति के माध्यम से सेवा और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की गई है। इसके अलावा ग्राम रोजगार सहायकों को मानदेय व्यवस्था से बाहर निकालकर संविदा पद पर समायोजित करने और उनका ग्रेड पे निर्धारित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
महासंघ ने अपने ज्ञापन में दिसंबर 2025 में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक का भी उल्लेख किया है। संगठन का कहना है कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्यों को मनरेगा कर्मियों की नौकरी सुरक्षा और सेवा शर्तों को लेकर सकारात्मक पहल करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में अब तक कोई ठोस फैसला नहीं हुआ है।
मनरेगा कर्मचारियों ने साफ संकेत दे दिया है कि इस बार वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे। 20 साल से योजनाओं का बोझ उठाने वाले कर्मचारी अब लिखित नीति और सेवा सुरक्षा चाहते हैं। 1 जुलाई तक फैसला नहीं हुआ तो जुलाई की शुरुआत सरकार और पंचायत विभाग के लिए एक बड़े कर्मचारी आंदोलन के रूप में सामने आ सकती है।
आधार, LPG, रेलवे से मनरेगा तक, 1 जूलाई से होंगे बड़े बदलाव, जेब पर पड़ेगा असर
मनरेगा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार करेगी नियमित
मां मनरेगा मजदूर, यूट्यूब से की पढाई और क्रैक किया UPSC, आईएएस सोहनलाल की कहानी
एमपी में मनरेगा घोटाला, मौके पर सन्नाटा, कागजों पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूर
महासंघ ने सरकार को 1 जुलाई तक का अल्टीमेटम देते हुए साफ कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर के करीब 12 हजार कर्मचारी हड़ताल पर चले जाएंगे। महासंघ ने मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, मनरेगा आयुक्त और सभी कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की औपचारिक चेतावनी दे दी है।
राजधानी में शक्ति प्रदर्शन
20 साल सेवा, नौकरी की गारंटी नहीं
इसके बावजूद कर्मचारी आज भी अस्थायी व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। न नौकरी की सुरक्षा है, न सामाजिक सुरक्षा और न ही भविष्य की कोई गारंटी। कर्मचारियों का कहना है कि पुरस्कार सरकार को मिले, लेकिन संघर्ष और असुरक्षा उनके हिस्से आई।
22 महीने से फाइलें चल रहीं
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
केंद्र के निर्देश का भी हवाला
अब सरकार के पाले में गेंद
FAQ
- छत्तीसगढ़ में मनरेगा कर्मचारी वर्तमान में किस मुख्य मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?
उत्तर: मनरेगा कर्मचारियों की मुख्य मांग सभी मनरेगा और वीबीजी रामजी कर्मचारियों का नियमितीकरण (Regularization) है। इसके साथ ही वे सेवा सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और ग्राम रोजगार सहायकों को संविदा पद पर समायोजित कर ग्रेड पे निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। - मनरेगा (MNREGA) का पूर्ण रूप क्या है और यह योजना कब शुरू हुई थी?
मनरेगा का पूर्ण रूप 'महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम' (Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) है। इसे शुरुआत में 'नरेगा' (NREGA) के रूप में 2 फरवरी 2006 को लागू किया गया था, और 2 अक्टूबर 2009 को इसका नाम बदलकर 'मनरेगा' कर दिया गया। - मनरेगा योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कितने दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है?
उत्तर: इस योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार के अकुशल श्रम करने के इच्छुक वयस्क सदस्यों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के गारंटीकृत मजदूरी रोजगार का कानूनी प्रावधान है
ये खबरें भी पढ़ें...
मनरेगा कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी, सरकार करेगी नियमित
मां मनरेगा मजदूर, यूट्यूब से की पढाई और क्रैक किया UPSC, आईएएस सोहनलाल की कहानी
एमपी में मनरेगा घोटाला, मौके पर सन्नाटा, कागजों पर काम कर रहे सैकड़ों मजदूर
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari