स्कूली बच्चों को रोजाना पौने सात रुपए का खाना, गाय से भी कम है छात्रों की खुराक
Arun Tiwari | Sept 17, 2026, 17:30 IST
छत्तीसगढ़ में कुपोषण
छत्तीसगढ़ में मिडडे मील के लिए प्राइमरी बच्चों पर रोजाना 6.78 रुपए खर्च होते हैं। जानिए 26 लाख बच्चों के भोजन, मेन्यू और कुपोषण के आंकड़ों की पूरी तस्वीर।
छत्तीसगढ़ के स्कूली बच्चे रोजाना पौने सात रुपए का खाना खाते हैं। छात्रों को सरकार स्कूल में मिडडे मील के नाम पर पौने सात रुपए की थाली परोसती है। इस पौष्टिक भोजन में दाल,चावल,सब्जी सब कुछ आ जाता है। सोचिए आखिर पौने सात रुपए में क्या आएगा और बच्चों को कितना पोषण मिलेगा।
बच्चों की खुराक की कीमत गाय से भी कम है। साढ़े 17 रुपए गाय को एक समय की खुराक के लिए मिलते हैं। ऐसे में मिडडे मील के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी ही लगती है। सरकार कहती है कि इसका फंड बढ़ाने के बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। बच्चों का पोषण हमारी पहली प्राथमिकता में शामिल है।
मिडडे मील में 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार का और 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार का होता है। छत्तीसगढ़ में सालाना 600 करोड़ रुपए मिडडे मील पर खर्च होते हैं। इसमें 320 करोड़ रुपए केंद्र सरकार और 280 करोड़ रुपए राज्य सरकार के हिस्से में आते हैं। प्रदेश में 26 लाख से ज्यादा प्रायमरी और मिडिल स्कूल के बच्चे हैं जिनको मिडडे मील दिया जाता है।
बच्चों को रोजाना के हिसाब से मेन्यू निर्धारित किया गया है। मेन्यू में पोषण के हिसाब से दाल,चावल,हरी सब्जी,सलाद और सोयाबीन जैसे प्रोटीन युक्त भोजन दिया जाता है। सवाल यह है कि यदि यह मेन्यु तो पौने सात रुपए में यह कैसे पूरा होगा। कागज में मेन्यू तो अच्छा लगता है लेकिन यह थाली में नजर नहीं आता।
प्रायमरी स्कूल के बच्चे 15 लाख 72 हजार
मिडिल स्कूल के बच्चे 10 लाख 39 हजार
कुल बच्चे 26 लाख 11 हजार 898
मिडडे मील पर सरकार का बजट करीब 600 करोड़
प्रायमरी स्कूल के बच्चे के हिस्से में 6.78 रुपए
मिडिल स्कूल के बच्चे के हिस्से में 10.17 रुपए
![छत्तीसगढ़ में मिडडे मील]()
सोमवार को चावल,मिक्स दाल, सब्जी आलू मटर या सोयाबड़ी आलू
मंगलवार को चावल, मिक्स दाल,हरी सब्जी,लौकी,पत्ता गोभी,टमाटर,चना दाल,पापड़
बुधवार को चावल,सांभर दाल, अचार, पापड़
गुरुवार को वेज पुलाव,टमाटर की चटनी,पापड़
शुक्रवार को चावल, मिक्स दाल,सब्जी राजमा,चना,आलू
शनिवार को खीर,वेज पुलाव,टमाटर की चटनी फ्राई
छत्तीसगढ़ में बच्चों के कुपोषण को लेकर NFHS-6 की रिपोर्ट कहती है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों में कम वजन (Underweight) और दुबलापन (Wasting) की समस्या गंभीर बनी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि छह महीने से दो साल की उम्र के बच्चों को पर्याप्त और विविध आहार मिलने का अनुपात काफी कम है। ये आंकड़े राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) में सामने आए हैं।
NFHS-6 के मुताबिक छत्तीसगढ़ में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग 27.5% है। NFHS-5 की तुलना में इसमें 7.1 प्रतिशत अंक की कमी आई है। स्टंटिंग का मतलब उम्र के हिसाब से बच्चे की लंबाई कम होना है और यह लंबे समय तक पोषण की कमी का संकेत माना जाता है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू कम वजन और वेस्टिंग के आंकड़ों से सामने आता है।
राज्य में पांच साल से कम उम्र के 34.7% बच्चे अंडरवेट हैं। यानी करीब हर तीन में से एक बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन का है। NFHS-5 की तुलना में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत अंक बढ़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर अंडरवेट बच्चों का अनुपात 31.8% है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
इसी तरह Wasting यानी लंबाई के अनुपात में कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 21.1% है। NFHS-5 की तुलना में इसमें 2.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय औसत 19% है। गंभीर वेस्टिंग का आंकड़ा राज्य में 6.7% है।
कुपोषण की जड़ केवल बीमारी या वजन की समस्या नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों को मिलने वाला भोजन भी महत्वपूर्ण है। NFHS-6 के मुताबिक छत्तीसगढ़ में 6 से 23 महीने की उम्र के केवल 12.4% बच्चों को पर्याप्त आहार मिल रहा है।
राष्ट्रीय औसत 15.3% है। स्तनपान करने वाले 6-23 महीने के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का अनुपात 12.6%, जबकि स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में यह सिर्फ 9.3% है। हालांकि NFHS-5 की तुलना में कुल पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों के अनुपात में 3.3 प्रतिशत अंक का सुधार दर्ज हुआ है।
यानी शुरुआती उम्र में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती अभी भी बड़ी है। यही वह उम्र है जब बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पोषण बेहद महत्वपूर्ण होता है।
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बच्चों की खुराक की कीमत गाय से भी कम है। साढ़े 17 रुपए गाय को एक समय की खुराक के लिए मिलते हैं। ऐसे में मिडडे मील के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी ही लगती है। सरकार कहती है कि इसका फंड बढ़ाने के बारे में गंभीरता से विचार किया जा रहा है। बच्चों का पोषण हमारी पहली प्राथमिकता में शामिल है।
छत्तीसगढ़ में 600 करोड़ का मिडडे मील :
बच्चों को रोजाना के हिसाब से मेन्यू निर्धारित किया गया है। मेन्यू में पोषण के हिसाब से दाल,चावल,हरी सब्जी,सलाद और सोयाबीन जैसे प्रोटीन युक्त भोजन दिया जाता है। सवाल यह है कि यदि यह मेन्यु तो पौने सात रुपए में यह कैसे पूरा होगा। कागज में मेन्यू तो अच्छा लगता है लेकिन यह थाली में नजर नहीं आता।
यह है स्थिति :
मिडिल स्कूल के बच्चे 10 लाख 39 हजार
कुल बच्चे 26 लाख 11 हजार 898
मिडडे मील पर सरकार का बजट करीब 600 करोड़
प्रायमरी स्कूल के बच्चे के हिस्से में 6.78 रुपए
मिडिल स्कूल के बच्चे के हिस्से में 10.17 रुपए
छत्तीसगढ़ में मिडडे मील
यह है मेन्यू :
मंगलवार को चावल, मिक्स दाल,हरी सब्जी,लौकी,पत्ता गोभी,टमाटर,चना दाल,पापड़
बुधवार को चावल,सांभर दाल, अचार, पापड़
गुरुवार को वेज पुलाव,टमाटर की चटनी,पापड़
शुक्रवार को चावल, मिक्स दाल,सब्जी राजमा,चना,आलू
शनिवार को खीर,वेज पुलाव,टमाटर की चटनी फ्राई
छत्तीसगढ़ में कुपोषण की तस्वीर:
NFHS-6 के मुताबिक छत्तीसगढ़ में पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग 27.5% है। NFHS-5 की तुलना में इसमें 7.1 प्रतिशत अंक की कमी आई है। स्टंटिंग का मतलब उम्र के हिसाब से बच्चे की लंबाई कम होना है और यह लंबे समय तक पोषण की कमी का संकेत माना जाता है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू कम वजन और वेस्टिंग के आंकड़ों से सामने आता है।
राज्य में पांच साल से कम उम्र के 34.7% बच्चे अंडरवेट हैं। यानी करीब हर तीन में से एक बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से कम वजन का है। NFHS-5 की तुलना में यह आंकड़ा 3.4 प्रतिशत अंक बढ़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर अंडरवेट बच्चों का अनुपात 31.8% है। इस लिहाज से छत्तीसगढ़ का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
इसी तरह Wasting यानी लंबाई के अनुपात में कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 21.1% है। NFHS-5 की तुलना में इसमें 2.2 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय औसत 19% है। गंभीर वेस्टिंग का आंकड़ा राज्य में 6.7% है।
सबसे कमजोर कड़ी: 6 से 23 महीने के बच्चों का आहार
राष्ट्रीय औसत 15.3% है। स्तनपान करने वाले 6-23 महीने के बच्चों में पर्याप्त आहार पाने वालों का अनुपात 12.6%, जबकि स्तनपान नहीं करने वाले बच्चों में यह सिर्फ 9.3% है। हालांकि NFHS-5 की तुलना में कुल पर्याप्त आहार पाने वाले बच्चों के अनुपात में 3.3 प्रतिशत अंक का सुधार दर्ज हुआ है।
यानी शुरुआती उम्र में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की चुनौती अभी भी बड़ी है। यही वह उम्र है जब बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए पोषण बेहद महत्वपूर्ण होता है।
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