छत्तीसगढ़ मंत्रालय में 27 का डोसा मिलेगा 100 रूपए में, सरकार ने खत्म की डेढ़ करोड़ की सब्सिडी
VINAY VERMA | Apr 28, 2026, 12:56 IST
ministry-indian-coffee-house-agreement-terminated
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में 26 साल से जारी इंडियन कॉफी हाउस की कैंटीन व्यवस्था समाप्त हो गई है। अब 27 रूपए का डोसा लगभग 100 रूपए का मिलेगा, इसके अलावा सभी खाने-पीने के सामान दोगुने से अधिक कीमत पर मिलेगा।
छत्तीसगढ़ मंत्रालय में अब 27 रूपए का डोसा लगभग 100 रूपए का मिलेगा, इसके अलावा सभी खाने-पीने के सामान दोगुने से अधिक कीमत पर मिलेगा। सरकार की यह व्यवस्था 1 मई से लागू हो जाएगी। इसके पीछे का कारण सरकार ने इंडियन कॉफी हाउस का एग्रीमेंट बढ़ाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही मंत्रालय की कैंटीन से ICH पैकअप हो गया है। सिर्फ कैंटीन ही नहीं, अब मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव की पर्सनल पेंट्री तक उसकी सप्लाई बंद हो जाएगी। इसके साथ ही सवाल यह उठ रहा है कि यह बदलाव सुधार है या कर्मचारियों पर नया बोझ?
मंत्रालय की कैंटीन पर इंडियन कॉफी हाउस का टेंडर करीब ढाई दशक से ज्यादा समय तक रहा। 2012 में जब नया मंत्रालय बना, तब भी एग्रीमेंट आगे बढ़ा दिया गया। हर तीन साल में रिन्यूअल होता रहा। लेकिन अब 1 मई से रायपुर की “टिप्सी इवेंट्स” कंपनी मंत्रालय स्टाफ और विजिटर्स को नाश्ता-खाना परोसेगी। यह काम उसे तीसरे टेंडर में मिला। इस बार कुल 6 कंपनियों ने भाग लिया।
पुरानी व्यवस्था में इंडियन कॉफी हाउस को कई तरह की सरकारी रियायतें मिल रही थीं। कैंटीन के लिए एरिया फ्री, बिजली फ्री। बदले में कर्मचारियों को आधे से भी कम कीमत पर नाश्ता-खाना मिलता था। लेकिन यह ‘सस्ता खाना’ पूरी तरह मुफ्त नहीं था। सरकार हर महीने औसतन 10 से 12 लाख रुपए का भुगतान करती थी। यह राशि मीटिंग्स, कॉन्फ्रेंस और सरकारी आयोजनों के चाय-नाश्ते और खाने के बिल के रूप में जाती थी। यानी सब्सिडी सीधे सिस्टम को सपोर्ट कर रही थी।
इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है, दरअसल छत्तीसगढ़ मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने इंडियन कॉफी हाउस के खिलाफ मुख्य सचिव से शिकायत की। आरोप लगे कि व्यवस्था ठीक नहीं है, गुणवत्ता गिर रही है और नियमों का पालन नहीं हो रहा। संघ की घोषणा पत्र में भी उचित कीमत पर नया ओपन टेंडर करवाने का वादा शामिल था। मुख्य सचिव ने भी सख्ती दिखाई और इंडियन कॉफी हाउस को व्यवस्था सुधारने की हिदायत दी।
कुछ ही दिनों बाद मंत्रालय कैंटीन के लिए नया टेंडर निकाल दिया गया। और सबसे बड़ा फैसला कि सरकार ने सब्सिडी देने का नियम ही खत्म कर दिया। नए नियमों के तहत इंडियन कॉफी हाउस ने टेंडर में हिस्सा ही नहीं लिया।
सरकार के अधिकारी इस फैसले को “व्यवस्था में सुधार” बता रहे हैं। उनका तर्क है कि जब केंद्र सरकार ने संसद में सब्सिडी रेट पर भोजन की व्यवस्था खत्म कर दी, तो राज्य सरकार क्यों पीछे रहे? यानी केंद्र की तर्ज पर राज्य ने भी सब्सिडी मॉडल को अलविदा कह दिया।
मंत्रालय के अधिकारी और बड़े अफसरों के खाने-पीने का भुगतान तो शासन करेगा। उनके लिए यह बदलाव महज ‘प्रक्रियात्मक’ है। असली असर किस पर पड़ेगा? मंत्रालय के कर्मचारियों और रोज आने वाले विजिटर्स पर। अब उन्हें बाजार दर पर नाश्ता-खाना लेना होगा।
टिप्सी इवेंट्स के सामने भी चुनौती कम नहीं है। बिना किसी सब्सिडी के उसे न सिर्फ गुणवत्ता बनाए रखनी होगी, बल्कि कीमतों को भी संतुलित रखना होगा। पूरे घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प मोड़ यह है कि जिस कर्मचारी संघ ने शिकायत कर व्यवस्था सुधारने की मांग की थी, उसका दांव उल्टा पड़ गया। न सिर्फ इंडियन कॉफी हाउस बाहर हो गया, बल्कि कर्मचारियों को मिलने वाली सब्सिडी भी खत्म हो गई।
12वीं पास युवाओं के लिए मंत्रालयों में नौकरी, SSC Stenographer Vacancy में करें आवेदन
CG News: छत्तीसगढ़ मंत्रालय में नौकरी का सपना दिखा बाप-बेटे ने 12 लोगों को लगाया चूना, खरीदे प्लाट
IAS अफसर ने गृह मंत्रालय को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने पलटा CAT का फैसला, AGMUT कैडर में अब कौन है असली प्राधिकरण?
नीतीश कुमार; कॉफी हाउस से राज्यसभा तक, एक इंजीनियर के बिहार निर्माता बनने की पूरी कहानी
करीब ढाई दशक से काम
सरकारी रियायतें मिल रही थीं
फिर अचानक यह पूरा ढांचा क्यों हिला?
पूरा सिस्टम ही बदल गया
सरकारी तर्कः व्यवस्था में सुधार
लेकिन इस तर्क में एक बड़ा सवाल
नई कंपनी के सामने चुनौतियां
ये खबरें भी पढ़ें...
CG News: छत्तीसगढ़ मंत्रालय में नौकरी का सपना दिखा बाप-बेटे ने 12 लोगों को लगाया चूना, खरीदे प्लाट
IAS अफसर ने गृह मंत्रालय को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने पलटा CAT का फैसला, AGMUT कैडर में अब कौन है असली प्राधिकरण?
नीतीश कुमार; कॉफी हाउस से राज्यसभा तक, एक इंजीनियर के बिहार निर्माता बनने की पूरी कहानी
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari