संघ सिर्फ हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भले के लिए करता है काम, छत्तीसगढ़ दौरे पर बोले मोहन भागवत
Harrison Masih | Oct 23, 2026, 12:54 IST
बिलासपुर में RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया। कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में उन्होंने संघ और स्वयंसेवकों के संबंध को समझाया। भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है। उन्होंने संघ की तुलना समुद्र से की।
उनके मुताबिक, समुद्र की पहचान उसकी बूंदों से होती है। इसी तरह सदस्यों से संघ की पहचान बनती है।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना है। इसलिए स्वयंसेवकों को संगठित और सजग रहकर राष्ट्रहित में काम करना चाहिए।
मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि संघ केवल हिंदुओं के भले के लिए काम करता है। लेकिन संघ का उद्देश्य पूरे राष्ट्र का भला करना है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि संघ का काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है। संघ शुद्ध सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर हिंदू समाज और राष्ट्र को एकजुट करना चाहता है।
भागवत ने कहा कि सामाजिक एकता के लिए स्वयंसेवकों को लगातार प्रयास करना चाहिए। राष्ट्रहित के लिए काम करते समय प्रेम, सद्भाव और संगठन की भावना जरूरी है।
बौद्धिक वर्ग में भागवत ने RSS के इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1925 में स्थापना के बाद शुरुआत में संघ की उपेक्षा हुई। इसके बाद विरोध हुआ और अब संघ की जय-जयकार हो रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में स्वयंसेवकों को और सतर्क होकर काम करना चाहिए। शताब्दी वर्ष के दौरान पिछले एक साल में किए गए कार्यों को आगे भी जारी रखना होगा।
भागवत ने स्वयंसेवकों को लोगों से संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि पहले किसी अनजान व्यक्ति को परिचित बनाएं। फिर उससे दोस्ती करें और दोस्त बनने के बाद उसे स्वयंसेवक बनाने का प्रयास करें।
मोहन भागवत ने पानी का उदाहरण देकर संघ की संरचना समझाई। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु से पानी बनता है। इसी तरह स्वयंसेवकों से मिलकर संघ बनता है।
उन्होंने स्वयंसेवकों से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझने की अपील की। भागवत ने उनके व्यक्तित्व को आदर्श बताया।
RSS प्रमुख ने लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आंदोलन का मकसद केवल राजनीतिक हित साधना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए।
उनके मुताबिक, आंदोलन हमेशा समाधान निकालने के उद्देश्य से होने चाहिए। सभी गतिविधियां संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर की जानी चाहिए।
भागवत ने कहा कि संघ के शताब्दी वर्षमें हुए कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखना होगा। संपर्क बढ़ाने और शाखाओं का विस्तार करने पर लगातार काम करना चाहिए।
उन्होंने संघ के तीन आधार बताए। इनमें शाखा, कुटुंब और अपनत्व शामिल हैं। इन तीनों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत है।
भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के सभी आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जरूरत पड़ने पर संघ उन्हें विचारों और मार्गदर्शन में सहयोग देता है।
बौद्धिक वर्ग से पहले संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें मुख्य शिक्षक, कार्यवाह, नगर, उपनगर और विभाग कार्यकारिणी के कामों की समीक्षा की गई।
बैठक में बताया गया कि शताब्दी वर्ष के दौरान एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। इसके बाद शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर 5500 हो गई है।
रायपुर के कार्यकर्ताओं ने रात में शाखा शुरू करने के प्रयोग की जानकारी भी दी। यह शाखा पावभाजी बेचने वालों के लिए शुरू की गई थी। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं खोलने की जानकारी दी।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दो सत्रों में बैठकें आयोजित होंगी। पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों और युवा वर्ग को संघ से जोड़ने के प्रयासों पर चर्चा होगी।
बैठक में RSS और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव को लेकर रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। दूसरे सत्र में संघ के पदाधिकारियों के साथ भाजपा संगठन के पदाधिकारी, नेता और मंत्री भी शामिल हो सकते हैं।
इन बैठकों में आगामी वर्ष की कार्ययोजना और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
कार्यक्रम में संघ से जुड़े सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हुए। आयोजन स्थल पर मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध था।
बौद्धिक वर्ग में शामिल होने के लिए पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से पहले सदस्यों के मोबाइल फोन बाहर जमा कराए गए थे।
RSS प्रमुख के दौरे को देखते हुए बिलासपुर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। रेलवे स्टेशन से कोनी स्थित कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।
सरस्वती महाविद्यालय परिसर और आसपास 100 से अधिक जवान तैनात किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी स्तर के अधिकारी और कई निरीक्षक शामिल रहे।
उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना है। इसलिए स्वयंसेवकों को संगठित और सजग रहकर राष्ट्रहित में काम करना चाहिए।
RSS केवल हिंदुओं के लिए नहीं, पूरे राष्ट्र के लिए काम करता है
उन्होंने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि संघ का काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है। संघ शुद्ध सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर हिंदू समाज और राष्ट्र को एकजुट करना चाहता है।
भागवत ने कहा कि सामाजिक एकता के लिए स्वयंसेवकों को लगातार प्रयास करना चाहिए। राष्ट्रहित के लिए काम करते समय प्रेम, सद्भाव और संगठन की भावना जरूरी है।
पहले उपेक्षा हुई, फिर विरोध और अब जय-जयकार: भागवत
उन्होंने कहा कि मौजूदा माहौल में स्वयंसेवकों को और सतर्क होकर काम करना चाहिए। शताब्दी वर्ष के दौरान पिछले एक साल में किए गए कार्यों को आगे भी जारी रखना होगा।
भागवत ने स्वयंसेवकों को लोगों से संपर्क बढ़ाने का लक्ष्य दिया। उन्होंने कहा कि पहले किसी अनजान व्यक्ति को परिचित बनाएं। फिर उससे दोस्ती करें और दोस्त बनने के बाद उसे स्वयंसेवक बनाने का प्रयास करें।
पानी के फॉर्मूले से समझाया संघ और स्वयंसेवकों का रिश्ता
उन्होंने स्वयंसेवकों से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझने की अपील की। भागवत ने उनके व्यक्तित्व को आदर्श बताया।
आंदोलन का उद्देश्य समाधान हो, नफरत फैलाना नहीं
उनके मुताबिक, आंदोलन हमेशा समाधान निकालने के उद्देश्य से होने चाहिए। सभी गतिविधियां संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर की जानी चाहिए।
शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करने का लक्ष्य
उन्होंने संघ के तीन आधार बताए। इनमें शाखा, कुटुंब और अपनत्व शामिल हैं। इन तीनों को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास करने की जरूरत है।
भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि संघ के सभी आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जरूरत पड़ने पर संघ उन्हें विचारों और मार्गदर्शन में सहयोग देता है।
एक साल में खुलीं 2311 नई शाखाएं
बैठक में बताया गया कि शताब्दी वर्ष के दौरान एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। इसके बाद शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर 5500 हो गई है।
रायपुर के कार्यकर्ताओं ने रात में शाखा शुरू करने के प्रयोग की जानकारी भी दी। यह शाखा पावभाजी बेचने वालों के लिए शुरू की गई थी। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं खोलने की जानकारी दी।
युवाओं को जोड़ने और अगले साल की रणनीति पर होगी चर्चा
बैठक में RSS और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव को लेकर रणनीति पर भी विचार किया जाएगा। दूसरे सत्र में संघ के पदाधिकारियों के साथ भाजपा संगठन के पदाधिकारी, नेता और मंत्री भी शामिल हो सकते हैं।
इन बैठकों में आगामी वर्ष की कार्ययोजना और संगठनात्मक गतिविधियों को लेकर चर्चा होने की संभावना है।
बौद्धिक वर्ग में मीडिया और मोबाइल पर प्रतिबंध
बौद्धिक वर्ग में शामिल होने के लिए पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से पहले सदस्यों के मोबाइल फोन बाहर जमा कराए गए थे।
मोहन भागवत की सुरक्षा में 100 से ज्यादा जवान तैनात
सरस्वती महाविद्यालय परिसर और आसपास 100 से अधिक जवान तैनात किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी स्तर के अधिकारी और कई निरीक्षक शामिल रहे।
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