पंचायत चुनाव में कांग्रेस के टिकटों पर घमासान, सीताराम लांबा ने कहा-दफ्तरों पर ताले लगा दो
Ashish Bhardwaj | Oct 23, 2026, 12:28 IST
सीताराम लांबा
राजस्थान में पंचायती राज चुनाव के बीच कांग्रेस के अंदर टिकट वितरण को लेकर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य और राजस्थान युवा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सीताराम लांबा की एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में है। लांबा ने टिकट वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठाए है।
सीताराम लंबा ने सोशल मीडिया पर जाहिर की नाराजी
लांबा की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए उम्मीदवारों का चयन हो चुका है और कई जगह टिकट नहीं मिलने से नाराजगी सामने आ रही है। उनकी पोस्ट को संगठन के भीतर कार्यकर्ताओं की भूमिका और टिकट तय करने के अधिकार को लेकर उठे सवालों से जोड़कर देखा जा रहा है।
टिकट वितरण पर उठाए सवाल
उनकी टिप्पणी का मुख्य संदेश यह है कि चुनाव के समय जमीनी कार्यकर्ताओं की राय और संगठन में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। पंचायत चुनावों में स्थानीय स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ता ही गांवों में पार्टी के लिए प्रचार करते हैं और मतदाताओं से संपर्क बनाए रखते हैं। ऐसे में उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में उनकी सुनवाई न होने से असंतोष पैदा हो सकता है।
हालांकि, लांबा ने अपनी पोस्ट में किन जिलों या वार्डों में टिकट वितरण को लेकर आपत्ति जताई है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने किसी खास विधायक या उम्मीदवार का नाम लेकर आरोप लगाया हो, इसकी भी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
विधायक और हारे हुए प्रत्याशी ही पंचायत टिकटों के मालिक हैं ! तो संगठनों और कार्यकर्ताओं के ताले लगा दो !
— Sitaram Lamba (@sitaramlamba) October 23, 2026
पहले भी सामने आई टिकटों को लेकर नाराजगी
निकाय चुनावों में सामने आई नाराजगी के बाद कांग्रेस ने पंचायत चुनावों में संगठन की भूमिका मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर सक्रिय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की बात कही थी। इसके बावजूद टिकट वितरण के बाद अलग-अलग इलाकों से विरोध की खबरें सामने आती रहीं।
सीताराम लांबा की ताजा टिप्पणी को इसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। इससे टिकट चयन में संगठन की भूमिका और स्थानीय नेताओं के प्रभाव को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
छात्र राजनीति से प्रदेश संगठन तक का सफर
लांबा की नाराजगी का केंद्र यह है कि पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को केवल प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि टिकट वितरण में भी उनकी राय को महत्व मिले। उनके बयान से यह सवाल भी उठा है कि क्या कांग्रेस का स्थानीय संगठन उम्मीदवार चयन में पर्याप्त भूमिका निभा पा रहा है।
अब प्रदेश नेतृत्व के सामने चुनौती
दूसरी ओर, उम्मीदवारों का चयन करते समय पार्टी को स्थानीय जनाधार, चुनाव जीतने की संभावना और संगठन के प्रति निष्ठा जैसे अलग-अलग पहलुओं में संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में टिकट वितरण को लेकर उठने वाली शिकायतों का समाधान करना नेतृत्व के लिए अहम हो जाता है।
लांबा की पोस्ट के बाद अब निगाहें प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व पर हैं। देखना होगा कि पार्टी इस नाराजगी पर क्या प्रतिक्रिया देती है और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर उठे सवालों का जवाब किस तरह देती है। फिलहाल, यह बयान चुनावी माहौल में कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को चर्चा के केंद्र में ले आया है।
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